पाकिस्तान में तख्तापलट की सुगबुगाहट: मोहसिन नकवी ने खोली शरीफ सरकार की पोल, 21 साल पुराने घोटाले का खुलासा

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर तख्तापलट के कयास तेज हो गए हैं. शहबाज शरीफ सरकार में गृह मंत्री और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले मोहसिन नकवी ने अपनी ही सरकार की पोल खोल दी है. उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है.

मीडिया से बातचीत के दौरान गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक का पर्दाफाश करने का दावा किया. उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था में भ्रष्टाचार इस कदर जड़ जमा चुका है कि इसमें न्यायपालिका, नौकरशाही, नेता और बैंकर, सभी समान रूप से शामिल हैं.

"मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के इतिहास में कभी इतना बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें जज, नौकरशाह, राजनेता और बैंकर सभी शामिल रहे हों. 21 सालों से पैसे का अवैध लेन-देन चलता रहा और लोग इसे लेते रहे. हम इसके लिए जिम्मेदार हर एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे." मोहसिन नकवी

पाकिस्तान में तख्तापलट का इतिहास

  • पहला तख्तापलट (1958) - राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने संविधान भंग कर मार्शल लॉ लागू किया और जनरल अय्यूब खान को मुख्य मार्शल लॉ प्रशासक बनाया. 13 दिन बाद अय्यूब खान ने इस्कंदर मिर्जा को ही देश से निर्वासित कर दिया और खुद सत्ता संभाल ली. 1958 से 1969 तक अय्यूब खान का शासन रहा.


  • दूसरा तख्तापलट (1977) - जनरल जिया-उल-हक ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की चुनी हुई सरकार का तख्तापलट कर दिया. भुट्टो को गिरफ्तार किया गया और 1979 में फांसी दे दी गई. 1977 से 1988 जिया-उल-हक सत्ता में रहे. उनकी मौत विमान दुर्घटना में हुई.
  • तीसरा तख्तापलट (1999) - कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ को बर्खास्त करने की कोशिश की. इसके जवाब में सेना ने नवाज शरीफ की सरकार को उखाड़ फेंका और मुशर्रफ ने देश की कमान संभाल ली. 1999 से 2008 तक परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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