1 महीने में UAE को इतना कर्ज चुकाएगा पाकिस्तान, एक झटके में खत्म होगा 18% विदेशी मुद्रा भंडार

Pakistan to Pay UAE Loan: पाकिस्तान यूएई से कई सालों में लिया गया 3.5 अरब डॉलर का अप्रैल महीने में चुकाएगा. इस रकम की अदायगी से पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार पर भी अच्छी खासी चपत खानी पड़ेगी.

Pakistan to Pay UAE Loan: कर्जों पर चल रहे पाकिस्तान को अब इसे चुकाने का समय आ गया है. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इस महीने के भीतर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा लिए गए पूरे कर्ज को चुकाने का फैसला किया है. लेकिन इस कर्ज को चुकाने में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार से 18 प्रतिशत रकम बाहर हो जाएगी. वह इस रकम को वापस करने में अपनी राष्ट्रीय गरिमा का हवाला दे रहा है. 

पाकिस्तान इस महीने के अंत से पहले यूएई को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाएगा. इसमें कई बार ली गई रकम शामिल है, एक कर्ज तो उसने तीस साल पहले लिया था. डॉन अखबार ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यह रकम जल्द से जल्द लौटा दी जाएगी. अधिकारी ने कहा कि यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार को काफी कम कर देगा, लेकिन वित्तीय कारणों के लिए राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, पाकिस्तान यह कीमत चुकाने को तैयार है.

पाकिस्तान ने कब लिया कर्ज और कैसे चुकाएगा?

पाकिस्तान ने 1996-97 में सिर्फ एक साल के लिए 450 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया. इसके बाद यूएई ने 2019 में पाकिस्तान को उसके भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) को स्थिर करने के लिए वित्तीय सहायता दी थी. इसे 2019 से कई बार बढ़ाया (रोलओवर) गया था. 

हाल के महीनों में इन विस्तारों की अवधि घटकर केवल एक महीने तक रह गई थी. ताजा फैसले के बाद अब अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए जमा की गई रकम को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है.

पाकिस्तान 3.5 अरब डॉलर की इस पूरी राशि को इसी महीने में तीन किश्तों में लौटाएगा. अप्रैल की 11 , 17 और 23 तारीख को पाकिस्तान क्रमशः 450 मिलियन डॉलर, 2 अरब डॉलर और 1 अरब डॉलर वापस करेगा. 

विदेशी मुद्रा भंडार को भारी नुकसान होगा

वर्तमान में पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 16.3 अरब डॉलर हैं.  अप्रैल में ही 3 अरब डॉलर की रकम इससे बाहर होती है, तो इसमें 18 प्रतिशत की कमी आएगी. इस राशि की वापसी से पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और यदि नई फंडिंग नहीं मिली तो आईएमएफ कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान की स्थिति जटिल हो सकती है. क्योंकि इससे बाहरी सुरक्षा कवच (एक्सटर्नल बफर) कमजोर होगा और आयात कवर भी घटेगा. 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ चल रहे कार्यक्रम के तहत, पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने और बाहरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे तीन प्रमुख साझेदारों से लगभग 12.5 अरब डॉलर के रोलओवर की आवश्यकता है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के डिपॉजिट भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा थे.

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के बाहरी प्रवाह की लगातार निगरानी और प्रबंधन कर रहा है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान सरकार अपने सभी बाहरी दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध (कमिटेड) है. हालांकि, उन्होंने किसी भी योजना का खुलासा नहीं किया है.

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यूएई क्यों मांग रहा अपना पैसा?

ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात पर सुरक्षा का दबाव काफी बढ़ गया है. बीते एक महीने में सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने के बावजूद उसे आर्थिक और रणनीतिक नुकसान झेलना पड़ा है. ऐसे हालात में अबू धाबी अपनी प्राथमिकताओं को फिर से तय कर रहा है. खासतौर पर घरेलू सुरक्षा बजट को मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे (जैसे सऊदी नेतृत्व वाले मुस्लिम नाटो) में अपनी भूमिका को टिकाऊ बनाना. संभवतः इसी रणनीतिक सोच के तहत उसने पाकिस्तान से अपने दिए गए कर्ज की वापसी की मांग तेज कर दी है, ताकि बाहरी जोखिमों के बीच अपनी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखा जा सके.

दूसरी ओर, इस फैसले के पीछे कूटनीतिक असंतोष भी एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान ईरान के प्रति पाकिस्तान के अपेक्षाकृत नरम रुख ने अबू धाबी को असहज किया है. रियाद में हुई बैठकों में पाकिस्तान द्वारा ईरान के खिलाफ खुलकर समर्थन न देने और उसके झुकाव के संकेतों ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा की है. इससे आपसी भरोसे में कमी आई और आर्थिक फैसलों पर भी असर पड़ा.

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