अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की नई पहल, विदेश मंत्री अराघची को बुलाया इस्लामाबाद

पाकिस्तान ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को जल्द इस्लामाबाद आने का न्योता दिया. माना जा रहा है कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की अपनी भूमिका बनाए रखना चाहता है.

US Iran Tensions : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने मीडिएटर की भूमिका निभाने के लिए पहल करनी तेज कर दी है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची को जल्द से जल्द इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है. अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान इस पहल के जरिए तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ की अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है.

इशाक डार ने दिया इस्लामाबाद आने का न्योता

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि विदेश मंत्री इशाक डार और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच फोन पर बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम समेत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की. बातचीत के दौरान डार ने अराघची को उनकी सुविधा के अनुसार जल्द पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया. हालांकि, इस निमंत्रण पर ईरान की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है पाकिस्तान

पाकिस्तान के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह पहल ऐसे समय की गई है जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. अधिकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद खुद को दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में बनाए रखना चाहता है. उन्होंने बताया कि फिलहाल पर्दे के पीछे कूटनीतिक संपर्क लगातार जारी हैं और पाकिस्तान तनाव कम करने की कोशिशों में अपेक्षाकृत कम सक्रिय लेकिन अहम भूमिका निभा रहा है.

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई टालने की बात कही थी. हालांकि बाद में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जबकि तेहरान ने इससे इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल किसी तरह की वार्ता नहीं चल रही है.

गौरतलब है कि जून में अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें पाकिस्तान ने जमानतदार और मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. लेकिन जुलाई की शुरुआत में समझौते के उल्लंघन और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े विवाद के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया. ऐसे में पाकिस्तान की यह नई कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय राजनीति में अहम मानी जा रही है.

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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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