Pakistan Heavy Firing PoK: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलाकोट क्षेत्र में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है. आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलीबारी की. सोशल मीडिया पर इस गोलीबारी में 100 से अधिक लोगों के मरने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. वहीं, इस संघर्ष में 4 पुलिस वालों की मौत जरूर हुई है. पीओके के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) ने एक बयान में कहा कि रविवार को रावलाकोट में हुई गोलीबारी में चार पुलिसकर्मी मारे गए. उन्होंने कहा कि इस घटना में 20 से अधिक अन्य घायल हो गए.
ट्रिब्यून पाकिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े सशस्त्र तत्वों ने क्षेत्र में तैनात कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर गोलीबारी की. अधिकारियों ने इसे एक सुनियोजित हमला बताया. पुलिस प्रमुख ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘समन्वित, सशस्त्र और आतंकवादी कृत्य’ बताया. उन्होंने कहा कि हमलावरों ने सीएमएच रावलाकोट (कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल) को भी निशाना बनाया.
JAAC ने क्या कहा?
JAAC ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘बलों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग की जा रही है और रावलाकोट में गोले दागे जा रहे हैं. सीएमएच पर भी गोले दागे जा रहे हैं, लेकिन लोग अपने स्थानों से हटने को तैयार नहीं हैं.’ उसने आगे लिखा, ‘आज जब धरने पर बैठे दृढ़ निश्चयी लोगों पर आंसू गैस और गोलियों की बारिश की गई, तो वे भागने के बजाय और अधिक अडिग हो गए. रावलाकोट का आसमान भय से नहीं, बल्कि क्रांति के नारों से गूंज उठा. उस साहस, उस संकल्प और उस निडरता को सलाम.’
सोशल मीडिया पर दावा- 150-200 लोग मारे गए
इस घटना के बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में, एक लोकल ने दावा किया कि इस घटना में अब तक 150-200 लोग मारे जा चुके हैं. उसने कहा कि रावलाकोट में पायलट हाई स्कूल से लेकर सीएमएच तक लाशें ही लाशें हैं. रेंजर्स ने आस पास की बिल्डिंगों की छत से फायरिंग की. लोगों को लाशें उठाने भी नहीं दी जा रही है. जो भी ऐसा करने की कोशिश कर रहा है, उसके ऊपर भी फायरिंग की जा रही है. उसने कहा कि यह वाकया तब हुआ, जब लोग शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे.
पीओके में इस समय इंटरनेट बंद कर दिया गया है. ऐसे में वहां से पक्की और स्पष्ट खबरें सामने नहीं आ रही हैं. इसीलिए, प्रभात खबर इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता. देखें-
JAAC के एक वरिष्ठ सदस्य की गोलीबारी में हुई मौत
इस घटना से पहले 5 जून की रात पीओके में शहजैब हबीब नामक व्यक्ति की मौत हो गई. शहजैब हबीब जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के एक वरिष्ठ सदस्य थे. उनकी मौत भी कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलो की फायरिंग से हुई थी. हबीब का शव रावलाकोट के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के बाहर रखा गया था, जिसके बाद पूरे इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और लोगों में भारी गुस्सा फैल गया.
कई नेताओं की गिरफ्तारी; 9 जून को होगा भारी विरोध प्रदर्शन
रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून की देर रात प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है. प्रदर्शनकारी हबीब की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे थे.
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं. टेलीकॉम सेवाओं पर भी रोक लगा दी है. इसके अतिरिक्त पाकिस्तान फेडरल पुलिस और पाकिस्तान रेंजर्स की टुकड़ियां मुजफ्फराबाद भेजी जा रही हैं. यह सब 9 जून को JAAC द्वारा घोषित बड़े विरोध मार्च से पहले किया जा रहा है. प्रशासन ने टूरिस्ट से कहा है कि वे फिलहाल इस क्षेत्र को छोड़ दें और 20 जून तक यहां घूमने की योजना न बनाएं.
मस्जिदों से हो रहा ऐलान
9 जून के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए, मस्जिदों से भी ऐलान हो रहा है. मुजफ्फराबाद में होने वाले प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद की जा रही है.
विवाद की पृष्ठभूमि
यह क्षेत्र पिछले वर्ष अक्टूबर में अपने सबसे उथल-पुथल भरे दौरों में से एक से गुज़रा था, जब JAAC के नेतृत्व में संवैधानिक और शासन संबंधी सुधारों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. इस अशांति में कम से कम नौ लोग, जिनमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल थे, मारे गए थे. विरोध प्रदर्शनों और हड़ताल का आयोजन करने वाली JAAC ने मांगों का एक व्यापक चार्टर पेश किया था, जिसमें शामिल थे:
- सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग (रूलिंग एलीट) को मिलने वाले विशेषाधिकारों का अंत.
- शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को समाप्त करना. ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में बस गए थे.
- कोटा प्रणाली को खत्म करना.
हिंसा के दो दिन बाद, सरकार और JAAC के बीच 12 मुख्य तथा 13 अतिरिक्त बिंदुओं पर आधारित एक समझौता हुआ. इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने एजेके विधान सभा में शरणार्थी सीटों के मुद्दे की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने पर सहमति जताई.
राजनीतिक उथल-पुथल
इस अशांति ने क्षेत्र में राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी. इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) भी शामिल हो गई.
अप्रैल 2023 में 48 वोटों से निर्वाचित हुए हक ने इस्तीफा देने के बजाय विश्वास मत का सामना करने का फैसला किया. 17 नवंबर को राजा फैसल मुमताज राठौर ने हक को हरा दिया. उन्होंने चुनाव में 36 वोट हासिल किए और गुलाम जम्मू एवं कश्मीर के 16वें प्रधानमंत्री बने.
शरणार्थी सीटों पर विवाद
27 जुलाई को होने वाले चुनाव नजदीक हैं और शरणार्थी सीटों का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है. ऐसे में पीओके सरकार ने मुजफ्फराबाद में एक सर्वदलीय सम्मेलन (APC) आयोजित किया ताकि आम सहमति बनाई जा सके. लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इसमें भाग लिया, लेकिन पीटीआई (PTI) और JAAC ने इसका बहिष्कार किया. JAAC का कहना है कि सरकार पहले ही 30 मई को प्रस्तुत उसके लिखित प्रस्तावों को खारिज कर चुकी थी, इसलिए सम्मेलन में भाग लेना निरर्थक था.
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उसने दो विकल्प सुझाए थे:
पहला- कश्मीर विवाद के स्थायी समाधान तक शरणार्थी प्रतिनिधित्व को प्रतीकात्मक रूप में बनाए रखा जाए.
दूसरा- विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त कर उनकी जगह एजेके काउंसिल में 4 सीटें दी जाएँ.
लेकिन JAAC की मांग नहीं मानी गई और उसे देश के आतंकवाद विरोधी कानून 2014 के तहत ‘प्रतिबंधित संगठन’ की सूची में डाल दिया गया है. PoJK के गृह विभाग का आरोप है कि यह संगठन ‘राज्य विरोधी गतिविधियों’ में शामिल है. इसी के विरोध में JAAC ने 9 जून को मुजफ्फराबाद में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है. उसने क्षेत्र में बंद की घोषणा की है. लोगों का मानना है कि इसमें पूरे क्षेत्र से काफिले पहुंचेंगे.
