'बल्ला' छिन जाने के बाद भी इमरान खान ने पाकिस्तान के चुनाव में ऐसे मारा छक्का!

पाकिस्तान में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलती नजर नहीं आ रही है. इसके बाद यहां सरकार बनाने की जोड़तोड़ शुरू हो गई है. जानें क्या है ताजा अपडेट

पाकिस्तान चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है. यहां फिलहाल चुनाव के पूरे नतीजे सामने नहीं आए हैं लेकिन जीत का दावा पीएमएल-एन और पीटीआई दोनों की ओर से की जा रही है. इस बीच इमरान खान ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर विक्ट्री स्पीच दी है जिसे नए टक्नोलॉजी एआई से जैयार किया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि पीटीआई प्रमुख अभी जेल में बंद हैं. तीन मामलों में सजा होने की वजह से वह चुनावी मैदान में नजर नहीं आए. यही नहीं उनकी पार्टी का निशान ‘बल्ला’ तक जब्त करने का काम किया गया. इसके बाद भी वे हार नहीं मानें और पीटीआई समर्थक चुनाव में कमाल करते नजर आ रहे हैं.

जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने अपना लोहा चुनावी में दिखाया. पाकिस्तान के प्रमुख वेबसाइट डॉन ने जो खबर दी है उसके अनुसार अभी इमरान खान दौड़ में सबसे आगे हैं. उनकी पार्टी पीटीआई के 91 समर्थक जीत चुके हैं. वहीं नवाज शरीफ की पार्टी 71 सीट के साथ दूसरे नंबर पर हैं जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) 53 सीटों पर कब्जा किया है. इस बीच पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के साथ गठबंधन करने से पीटीआई की ओर से इनकार करने के बाद अब सबके मन में सवाल आ रहा है कि पाकिस्तान की राजनीति में क्या इस बार कुछ अलग देखने को मिलेगा?

जनता का दिल से शुक्रिया: इमरान खान

पीटीआई के संस्थापक इमरान खान ने 2024 के आम चुनाव में ‘जीत’ के लिए जनता और अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को बधाई जेल के अंदर से दी है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म अकाउंट एक्स पर पोस्ट किए गए एआई-जनरेटेड बयान में नवाज शरीफ पर जमकर हमला किया. साथ ही उन्होंने कहा कि जनता ने मतदान करके आजादी की नींव रखी है. मैं आप सभी को 2024 का चुनाव जीतने के लिए बधाई देता हूं. आगे उन्होंने कहा कि लोगों के वोट के कारण ‘लंदन प्लान’ फेल हो गया है. नई टक्नोलॉजी एआई का यूज करके पूर्व पीएम ने कहा कि जनता का दिल से शुक्रिया…

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नई टक्नोलॉजी एआई का यूज चुनाव में इमरान ने किया

दरअसल, इमरान खान की पार्टी पीटीआई इस बार चुनाव में खास प्लान के साथ उतरी थी. पीटीआई ने चुनाव में विरोधियों पर हमला करने के लिए नई टेक्नोलॉजी एआई का भी सहारा लिया. पार्टी इस टेक्नोलॉजी का उपयोग करके इमरान खान की आवाज तैयार कर रही थी. जेल से किसी तरह इमरान खान के भाषण की कॉपी बाहर लाई जाती थी, जिसे एआई के सहारे इमरान की आवाज में बदलने का काम किया जाता था. इमरान के इस आवाज को रैलियों में बड़ी स्क्रीन पर प्रसारित करके लोगों से पीटीआई के पक्ष में मताधिकार को प्रयोग करने को कहा जाता था. पार्टी का दावा है कि यह पहली बार है कि एआई वॉयस जेनरेशन का इस्तेमाल पाकिस्तान में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है.

336 सीटों में से 266 पर ही हुआ मतदान

यहां चर्चा कर दें कि पाकिस्तान में द्विसदनीय संसदीय व्यवस्था है, जिसमें नेशनल असेंबली के ज्यादातर सदस्यों को जनता चुनती है. नेशनल असेंबली में कुल 336 सीटें हैं, जिनमें से 266 सीटों के लिए लोग मताधिकार का प्रयोग करते हैं. वहीं 60 सीटें महिलाएं व 10 सीटें गैर मुस्लिमों के लिए हैं.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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