पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले करीब दो महीनों से जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच शहबाज शरीफ सरकार का रुख बदलता नजर आ रहा है. जिस आंदोलन को कुछ समय पहले तक सरकार कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बता रही थी. अब उसी से जुड़े प्रदर्शनकारियों को ‘देशभक्त नागरिक’ कहा जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पाक सरकार ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की पेशकश भी की है.
राणा सनाउल्लाह ने आंदोलनकारियों को बताया देशभक्त
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक चुनावी सभा में कहा कि JAAC से जुड़े करीब 99 प्रतिशत लोग देशभक्त नागरिक हैं. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी PML-N PoK में दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाती है, तो सरकार की पहली प्राथमिकताओं में JAAC प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करना और उनकी मांगों का समाधान निकालना शामिल होगा.
JAAC के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में छात्र, व्यापारी, वकील, ट्रांसपोर्टर और दूसरे सामाजिक समूह शामिल हैं. संगठन की प्रमुख मांग PoK विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना है. JAAC का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद का सत्ता प्रतिष्ठान PoK की राजनीति में प्रभाव बनाए रखता है और अपनी पसंद की सरकार बनाने की कोशिश करता है.
पहले आंदोलन को बताया जा रहा था सुरक्षा के लिए खतरा
पाक सरकार का यह बयान उसके पुराने रुख से बिल्कुल अलग माना जा रहा है. इससे पहले पाकिस्तान सरकार और PML-N की ओर से दावा किया जाता रहा था कि आंदोलनकारियों के बीच प्रतिबंधित संगठनों के तत्व मौजूद हैं. इसी आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की गई थी. अब सरकार का बातचीत और सम्मान का रुख राजनीतिक दबाव का संकेत माना जा रहा है.
मौतों के आंकड़ों पर सरकार और JAAC आमने-सामने
JAAC का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और जून से अब तक मृतकों की संख्या करीब 400 तक पहुंच गई है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार इन आंकड़ों को खारिज करती रही है और आरोप लगाया है कि आंदोलनकारी मौतों के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता
PoK में बिगड़ते हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता सामने आई है. 7 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर चिंता जताई और घटनाओं की निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही तय करने की मांग की. इससे पाकिस्तान सरकार पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव का भी संकेत मिलता है.
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