अब मेट्रो में बिना हेडफोन गाना सुनना पड़ेगा भारी, लगेगा ₹1 लाख का जुर्माना!

Noise Ban In Metro: लंदन मेट्रो में अब बिना हेडफोन के म्यूजिक सुनना या कॉल पर तेज आवाज़ में बात करना आपको महंगा पड़ सकता है. ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन (TfL) ने इसे "सॉडकास्टिंग" करार देते हुए यात्रियों पर 1 लाख रुपये (1000 पाउंड) तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है. यह सख्ती यात्रियों को शांति से यात्रा करने का अनुभव देने के लिए की जा रही है.

Noise Ban In Metro: अगर आप मेट्रो में सफर करते वक्त बिना हेडफोन के तेज़ गाने सुनते हैं या कॉल पर जोर-जोर से बात करते हैं, तो अब सतर्क हो जाइए खासकर अगर आप लंदन मेट्रो में सफर कर रहे हैं. लंदन की अंडरग्राउंड मेट्रो में यात्रियों की ऐसी बदतमीजी भरी आदतों पर लगाम कसने की तैयारी हो चुकी है. ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन (TfL) ने इस व्यवहार को “सॉडकास्टिंग” की संज्ञा दी है और नियम तोड़ने वालों पर 1 लाख रुपये (1000 पाउंड) तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है.

भारत में भी आम है यह समस्या

दिल्ली मेट्रो में सफर करने वालों को भी यह समस्या खूब परेशान करती है. मेट्रो में कई बार लोग बिना हेडफोन के म्यूजिक सुनते हैं, वीडियो देखते हैं या तेज आवाज़ में कॉल करते हैं, जिससे अन्य यात्रियों को असुविधा होती है. हालांकि, भारत में इस तरह के व्यवहार पर सख्ती कम ही देखने को मिलती है.

क्या है “सॉडकास्टिंग”?

सॉडकास्टिंग (Sodcasting) शब्द की शुरुआत 2000 के दशक में हुई थी, जब लोग मोबाइल फोन के स्पीकर पर गाने चलाकर पब्लिक स्पेस में दूसरों को परेशान करने लगे थे. यह व्यवहार अब कई देशों में असभ्य और दंडनीय माना जाता है.

लंदन मेट्रो में क्या है नया नियम?

बिना हेडफोन के म्यूजिक सुनने, गेम खेलने या कॉल पर तेज आवाज में बात करने पर 1000 पाउंड (लगभग ₹1 लाख) तक जुर्माना और जरूरत पड़ने पर यात्रियों को ट्रेन से उतारा भी जा सकता है. 27 अगस्त से सोशल मीडिया और पोस्टर कैंपेन के जरिए यात्रियों को जागरूक किया जा रहा है.

अन्य देशों में भी लागू हैं सख्त नियम

अमेरिका (मैसाचुसेट्स) और कनाडा (टोरंटो) में बिना हेडफोन म्यूजिक चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. फ्रांस में एक यात्री को स्पीकर कॉल पर बात करने पर ₹19,000 का जुर्माना लगा था. आयरलैंड रेल ने भी ऐसे व्यवहार पर ₹9,500 तक पेनल्टी लगाने की चेतावनी दी है.

क्यों ज़रूरी है यह नियम?

मेट्रो जैसे सार्वजनिक स्थानों में पहले से ही अनाउंसमेंट और ट्रेन की आवाजें होती हैं. ऐसे में किसी का तेज म्यूजिक या कॉल बाकी यात्रियों के लिए असुविधाजनक हो सकता है और उन्हें जरूरी सूचना सुनने में बाधा आ सकती है. इसीलिए TfL और अन्य ट्रांजिट सिस्टम यात्रियों से अपेक्षा रखते हैं कि वे हेडफोन का इस्तेमाल करें और दूसरों का ध्यान रखें.

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लेखक के बारे में

आयुष डिजिटल पत्रकार हैं और इनको राजनीतिक खबरों को लिखना, वीडियो बनाना और रिसर्च करना पसंद है. इससे पहले इन्होंने न्यूज इंडिया 24*7 में बतौर कंटेन्ट राइटर और रिपोर्टर काम किया है. इनको बिहार यूपी और दिल्ली की राजनीति में विशेष रुचि है. आयुष को क्रिकेट बहुत पसंद है

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