Nepal Flood : विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन ने जारी किया लेवल-4 अलर्ट, बैरियर झील टूटने का खतरा; निचले इलाकों में मच सकती है तबाही

नेपाल में बुधवार 26 अगस्त को आई बाढ़ के सदमे से लोग अभी उबर भी नहीं पाएं हैं और चीन ने लेवल-चार का अलर्ट जारी करके चेतावनी दी है कि दो नदियों के संगम के पास बनी एक नई बैरियर झील के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है.

Nepal Flood : अगर बैरियर झील टूटती है तो जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ सकती है. बैरियर झील वह झील होती है जो किसी प्राकृतिक रुकावट के कारण नदी या जलधारा का रास्ता बंद हो जाने से बनती है. आखिर चीन का यह अलर्ट कितना गंभीर है और बैरियर झील टूटने पर क्या हो सकता है, आइए समझते हैं.

लेवल-1 सबसे गंभीर चेतावनी

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने बृहस्पतिवार रात तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की और छोचेन खोला तथा पुरेपु त्संगपो नदियों के संगम के पास बनी इस बैरियर झील से पैदा हुए खतरे को लेकर आगाह किया. ये दोनों नदियां तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में भोटे कोशी नदी की धारा का हिस्सा हैं. चीन की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने वाली आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में चार स्तर हैं. इनमें लेवल-1 सबसे गंभीर और लेवल-4 सबसे निचला स्तर है. मौजूदा अलर्ट लेवल-4 का है, इसलिए इसे चीन की सबसे गंभीर चेतावनी नहीं माना जाता. हालांकि, बैरियर झील में लगातार बढ़ रहा पानी और इसके टूटने की आशंका निचले इलाकों के लिए संभावित जोखिम को गंभीर बनाती है. इसी वजह से चीन के अधिकारी झील, बारिश और जल प्रवाह की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहे हैं.

बैरियर झील के टूटने की आशंका बढ़ी

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह तक झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था.पूर्वानुमान के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश के कारण अगले तीन दिन में झील में पानी का प्रवाह करीब 30 लाख घन मीटर तक पहुंच सकता है जिससे इसके टूटने का खतरा और बढ़ गया है. ऐसी स्थिति में बाढ़ का पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है और चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट तथा आसपास के निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकता है. इसके मद्देनजर जल संसाधन मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों को बैरियर झील और बारिश की स्थिति पर कड़ी नजर रखने, मौसम और जल प्रलय के पूर्वानुमान तथा जोखिम के आकलन को बेहतर बनाने व निचले इलाकों में संभावित रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की सटीक पहचान करने के निर्देश दिए हैं.

राहत-बचाव कार्य के लिए ड्रोन भी तैनात

इस बीच चीन ने नेपाल सीमा के पास तिब्बत के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए उपग्रहों और ड्रोनों को तैनात किया है.चीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने बताया कि उसने प्रभावित क्षेत्र की आपातकालीन तस्वीरें लेने और पुरानी तस्वीरें जुटाने के लिए उपग्रह संसाधनों का इस्तेमाल शुरू किया है. अब तक आपदा के आकलन और राहत कार्यों में मदद के लिए संबंधित विभागों को आपदा से पहले की पांच और आपदा के बाद की 10 तस्वीरें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं.

लापता लोगों की खोज जारी

शिन्हुआ की खबर के अनुसार चीन ने इलाके का व्यापक हवाई सर्वेक्षण करने के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले कैमरों से लैस ड्रोन विंग लोंग को भी तैनात किया है. वहीं, बचावकर्मी अभियान के दौरान छोटे ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन ड्रोन में लगे उच्च-गुणवत्ता वाले कैमरों की मदद से बाढ़ प्रभावित इलाके का वास्तविक-समय में 3डी मॉडल तैयार किया जाएगा. इससे बचाव अभियान के नियंत्रण केंद्र को पूरे क्षेत्र की स्थिति समझने और उन इलाकों को चिह्नित करने में मदद मिलेगी, जहां सबसे पहले तलाशी अभियान चलाने की जरूरत है. इसके अलावा, बचावकर्मी घने वन क्षेत्रों और कीचड़ में समा चुके इलाकों में लापता लोगों का पता लगाने के लिए ड्रोन में लगे यूएवी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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