नेपाल में कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि देखते ही देखते नदी ने रौद्र रूप ले लिया. घर, सड़कें, पुल और गाड़ियां मलबे और पानी के सैलाब में समा गए. कैमरों में कैद तबाही के ये मंजर इस आपदा की भयावहता बयां कर रहे हैं.
26 अगस्त की सुबह रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई. जिसके कारण नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिम्रो इलाके से शुरू हुआ नदी का सैलाब नीचे की ओर बढ़ा और देखते ही देखते पानी के साथ मिट्टी, चट्टानें और भारी मलबा अपने रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी संरचनाओं को अपनी चपेट में लेता चला गया.
कुछ ही पलों में पानी में समा गया पूरा इलाका
रसुवागढ़ी इलाके से सामने आए वीडियो में पानी और मलबे का भयावह वेग दिखाई देता है. कुछ फुटेज में लोग अचानक आई बाढ़ से बचने के लिए भागते नजर आते हैं. पानी कुछ ही पलों में आसपास के इलाकों को अपने साथ बहाता दिखाई देता है.
तिम्रो और रसुवागढ़ी जैसे सीमावर्ती इलाकों में तबाही का मंजर इतना तेज था कि लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचने के लिए बेहद कम समय मिला.
बाढ़ की रफ्तार का अंदाजा उन तस्वीरों और वीडियो से लगाया जा सकता है, जिनमें पुल और दूसरी संरचनाएं पानी के तेज बहाव के सामने टिक नहीं पाता.
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक बाढ़ से 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर सड़क को नुकसान पहुंचा है.
जहां पूरी बस्ती, वहां अब सिर्फ मलबा
बाढ़ के बाद सामने आई तस्वीरों में कई जगह सड़कें मलबे में तब्दील दिखाई दे रही हैं. कहीं वाहन पानी और कीचड़ के बीच फंसे हैं तो कहीं घरों और दूसरी इमारतों के आसपास मलबे का ढेर जमा है.
नेपाल-चीन सीमा से जुड़ा महत्वपूर्ण व्यापारिक और आवाजाही वाला इलाका भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. रसुवागढ़ी क्षेत्र में बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया.
इस आपदा की भयावहता जमीन से ली गई तस्वीरों के अलावा सैटेलाइट तस्वीरों में भी दिखाई दे रही है.
प्रारंभिक सैटेलाइट विश्लेषण में रसुवागढ़ी के उत्तर-पूर्वी इलाके में बड़े पैमाने पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के निशान मिले हैं. इसके बाद पानी और मलबे का तेज प्रवाह नीचे की ओर आया.
रासुवा से शुरू हुआ बाढ़ का प्रवाह आगे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पहुंचा, जिससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ.
मलबे के बीच जिंदगी तलाशते लोग
तबाही के बीच बचावकर्मी लगातार रेसक्यू अभियान में लगे हैं. नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं.
मौत और गुमशुदगी का बढ़ रहा आंकड़ा
27 अगस्त की दोपहर तक नेपाल पुलिस के मुताबिक 270 शव बरामद किए जा चुके थे.
National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) के नए आंकड़ों के मुताबिक 826 लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं. इनमें सुरक्षा बलों के जवान, स्थानीय लोग और पर्यटक शामिल हैं.
NDRRMA के मुताबिक संपर्क से बाहर लोगों में 44 नेपाली सेना, 28 नेपाल पुलिस और 13 सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं. पर्यटकों की संख्या भी बड़ी है.
आखिर कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती जांच में सामने आया है कि नेपाल-चीन सीमा के पास ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा खिसकने से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया.
NDRRMA के प्रारंभिक सैटेलाइट विश्लेषण में इसे आइस-रॉक एवलॉन्च से जोड़कर देखा गया है. Nepal flood explained : बर्फ के चट्टान, ग्लेशियर झील या बारिश, नेपाल में बाढ़ की क्या है वजह
एक आपदा, जिसने सब कुछ बदल दिया
नेपाल में आई इस बाढ़ की तस्वीरें सिर्फ टूटे पुलों, बहती सड़कों और मलबे में दबे घरों की कहानी नहीं कहतीं. ये उन लोगों की कहानी हैं जिनकी जिंदगी कुछ ही मिनटों में बदल गई.
रसुवागढ़ी से लेकर तिम्रो, स्याफ्रुबेसी और आगे त्रिशूली नदी के किनारे तक तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं. राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारी अब भी उन लोगों की तलाश में जुटे हैं जो इस भयावह जल प्रलय के बाद लापता हैं.
कैमरों में कैद ये तस्वीरें बता रही हैं कि हिमालय की शांत दिखने वाली घाटियां कैसे कुछ ही मिनटों में विनाशकारी सैलाब में बदल सकती हैं.
