नवाज शरीफ की पार्टी ही जीतेगी पाकिस्तान का आम चुनाव? रिपोर्ट से हुआ खुलासा

मतदान के दिन यानी आठ फरवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है. मतदान पूरा होने के तत्काल बाद वोटों की गिनती शुरू कर दी जाएगी. पूर्व पीएम इमरान खान के जेल में होने की वजह से पूर्व प्रधानमंत्री शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है.

पाकिस्तान में आम चुनाव के लिए मतदान जारी है. मतदान का वीडियो सामने आ रहा है जिसमें लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करते दिख रहे हैं. माना जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आ सकती है क्योंकि इसे सेना की ओर से बैकअप दिया गया है. इस खबर के बाद लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि यदि नवाज शरीफ के हाथों में पाकिस्तान की कमान गई तो भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते?

मीडिया में एक खबर चल रही है जिसमें एक रिपोर्ट की चर्चा है. रिपोर्ट के अनुसार, नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज देश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आ सकती है. वहीं बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के दूसरे स्थान पर रहने की संभावना का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है. इसके बाद इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी और दूसरे दल नजर आएंगे. पाकिस्तानी मीडिया ने एक अधिकारी के हवाले से यह खबर दी है जिसमें कहा गया है कि रिपोर्ट पुलिस सोर्स, राजस्व विभाग, श्रमिक संगठनों और अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले पेशेवर लोगों के इंटव्यू के आधार पर बनाई गई है.

पाकिस्तान में चुनाव के बीच देशभर में मोबाइल सर्विस सस्पेंड

पाकिस्तान में चुनाव के बीच देशभर में मोबाइल सर्विस को सस्पेंड कर दिया गया है. आंतरिक मंत्रालय ने ‘बिगड़ती सुरक्षा स्थिति’ के मद्देनजर यह फैसला किया है. मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में हाल की वृद्धि के परिणामस्वरूप यह निर्णय लिया गया है.

नेशनल असेंबली : 336 सीटों में से 266 पर ही मतदान

आपको बता दें कि पाकिस्तान में द्विसदनीय संसदीय व्यवस्था है, जिसमें नेशनल असेंबली के ज्यादातर सदस्यों को लोगों द्वारा चुना जाता है. नेशनल असेंबली में कुल 336 सीटें हैं, जिनमें से 266 सीटों के लिए लोग मताधिकार का प्रयोग करते हैं. वहीं 60 सीटें महिलाएं व 10 सीटें गैर मुस्लिमों के लिए हैं.

किस प्रांत में कितनी सीटें

राज्य-सीटें

पंजाब- 141

सिंध- 75

खैबर पख्तूनख्वा- 55

बलूचिस्तान- 20

इस्लामाबाद- 03

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5,121- कुल उम्मीदवार

4,806- पुरुष

312- महिलाएं

02- ट्रांसजेंडर

ये हैं अहम दावेदार

नवाज शरीफ

नवाज शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष हैं. चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए चुनाव मैदान में वे उतरे हैं. पीएमएल-एन को 2018 में 64, जबकि 2013 में 126 सीटों पर जीत मिली थी.

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बिलावल भुट्टो जरदारी

बिलावल भुट्टो जरदारी (35) पाकिस्तान पीपल पार्टी (पीपीपी) के नेता हैं. वह पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे हैं. यहां चर्चा कर दें कि 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी.

पूर्व पीएम इमरान खान

क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) के संस्थापक हैं. जब देश में आम चुनाव हो रहा है, वह जेल में हैं. उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न छीनने का काम पहले ही किया जा चुका है. पार्टी के नेता अलग-अलग चुनाव चिह्न पर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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