राष्ट्रपति चुनाव में मिर्जा फखरुल का मुकाबला 11 दलीय विपक्षी गठबंधन और नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संयुक्त उम्मीदवार ओली अहमद से था. मिर्जा फखरुल को कुल 255 वोट मिले. जबकि ओली अहमद (विपक्षी गठबंधन) को केवल 88 वोट ही मिले. मुख्य चुनाव आयुक्त एएसएम नासिर उद्दीन की देखरेख में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसके बाद उन्होंने नतीजों की आधिकारिक घोषणा की.
35 साल बाद दिखा ऐसा मुकाबला
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव बेहद खास माना जा रहा है. पिछले 35 वर्षों में यह पहला मौका था जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे. इससे पहले के चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा उम्मीदवार न उतारने के कारण चुनाव एकतरफा ही होते रहे थे.
नामांकन से पहले छोड़ा था पार्टी पद
BNP की राष्ट्रीय स्थाई समिति की बैठक के बाद वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहूल कबीर रिजवी ने उनके नाम का ऐलान किया था. प्रधानमंत्री और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान से विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया था. राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए आलमगीर ने पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय स्थाई समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था.
क्यों पड़ी चुनाव की जरूरत?
यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के अचानक इस्तीफे के कारण हुआ. 76 वर्षीय शहाबुद्दीन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था. उनके इस्तीफे के बाद संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत जातीय संसद के अध्यक्ष और कार्यवाहक राष्ट्रपति मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद ने अंतरिम जिम्मेदारी संभाली थी. संविधान के तहत 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना अनिवार्य था, जिसे तय सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है.
