हम पाकिस्तान के आभारी हैं… अमेरिकी विदेश मंत्री इस बात पर हुए गदगद, मुनीर सेना को कर रहे थैंक्यू

Marco Rubio grateful of Pakistan: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने गाजा में शांति स्थापना के लिए सैनिक भेजने को लेकर पाकिस्तान की पेशकश पर आभार जताया है. हालांकि पाकिस्तान इसे लेकर उलझन में फंसा हुआ है. रूबियो ने इसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम करवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र कर दिया.

Marco Rubio grateful of Pakistan: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पाकिस्तान का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि गाजा की शांति के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल में भागीदारी पर विचार करने की पेशकश के लिए अमेरिका पाकिस्तान का आभारी है. क्या गाजा में शांति स्थापना के लिए सैनिक भेजने को लेकर अमेरिका को पाकिस्तान की सहमति मिली है? इस पर रुबियो ने कहा कि जिन देशों से वाशिंगटन ने जमीनी स्तर पर मौजूदगी को लेकर बातचीत की है, वे सभी यह जानना चाहते हैं कि विशिष्ट जनादेश क्या होगा और वित्तपोषण की व्यवस्था कैसी होगी. रूबियो ने कहा कि हम पाकिस्तान के आभारी हैं कि उसने इसमें हिस्सा बनने की पेशकश की है, या कम से कम इस पर विचार करने की पेशकश की है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक न तो कोई औपचारिक प्रतिबद्धता मांगी गई है और न ही हासिल हुई है.

बीते दिनों यह खबर आई थी कि वाशिंगटन इस गाजा शांति मिशन में सैनिक भेजने के लिए इस्लामाबाद पर दबाव बना रहा है. इसी हफ्ते रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित मिशन में पाकिस्तान की भागीदारी चाहने के चलते पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को अपने बढ़े हुए अधिकारों की पहली बड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है. वहीं मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने का भरोसा है और ‘इस संघर्ष में सभी पक्षों को स्वीकार्य कई देश’ ऐसे हैं, जिन्होंने स्थिरीकरण बल में योगदान देने की इच्छा जताई है. रूबियो ने विदेश मंत्रालय में एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इजरायल-हमास शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने में ट्रंप प्रशासन के सामने मौजूद राजनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों को भी स्वीकार किया.

पाकिस्तान की सीमाएं स्पष्ट

हालांकि, पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से अपनी सीमाएं साफ कर दी हैं. विदेश मंत्री इशाक डार ने पिछले महीने कहा था कि पाकिस्तान शांति स्थापना की भूमिका पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास को निरस्त्र करना “हमारा काम नहीं है.” कई देश इस बल में शामिल होने को लेकर सतर्क हैं, खासकर अगर इसके जनादेश में हमास को हथियारों से मुक्त करना शामिल हुआ, क्योंकि इससे गहरे सैन्य उलझाव और घरेलू प्रतिक्रिया की आशंका है. वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरल मुनीर आने वाले हफ्तों में डोनाल्ड ट्रंप से संभावित मुलाकात के लिए वाशिंगटन जा सकते हैं. यह छह महीनों में ट्रंप के साथ उनकी तीसरी बैठक होगी, जिसमें गाजा स्थिरीकरण योजना पर चर्चा होने की संभावना है.

‘बोर्ड ऑफ पीस’ योजना

इजरायल और हमास के बीच शांति कराने में डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी भूमिका रही. उनके द्वारा पेश किए गए 20 सूत्रीय शांति समझौते पर दोनों पक्ष सहमत हुए और बंदियों की रिहाई का पहला चरण पूरा किया. हालांकि ट्रंप की गाजा युद्धविराम योजना पर इसके बाद की प्रगति धीमी रही है. अब अमेरिकी अधिकारी इस योजना को अमल में लाने के लिए एक “बोर्ड ऑफ पीस” बनाने पर जोर दे रहे हैं, जो दो साल के युद्ध के बाद गाजा का प्रशासन संभालेगा. हालांकि रूबियो ने आशा जताते हुए कहा कि अभी कई बड़ी चुनौतियां बाकी हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि वहां तक पहुंचने से पहले हमें उन्हें कुछ और जवाब देने होंगे. यह टिप्पणी उन्होंने सैनिक योगदान पर अंतिम फैसलों के संदर्भ में की.

भारत-पाक युद्ध रुकवाने के ट्रंप के दावे पर बोले रूबियो

इसी प्रेस कांफ्रेस के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘‘शांतिदूत के तौर पर अपनी भूमिका को प्राथमिकता दी है.’’ ट्रंप भारत एवं पाकिस्तान के बीच संघर्ष सुलझाने में अपनी भूमिका को लेकर कई बार दावा कर चुके हैं. वह अब तक लगभग 70 बार यह दावा कर चुके हैं. रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और उसने ऐसे संघर्ष सुलझाने में भी भूमिका निभाई है जो ‘‘अमेरिका के रोजमर्रा के जीवन के लिए संभवत: उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं.’’

रुबियो ने शुक्रवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘राष्ट्रपति ने शांतिदूत की भूमिका को प्राथमिकता दी है और इसलिए आपने हमें वर्तमान की चुनौतियों जैसे कि रूस, यूक्रेन, भारत और पाकिस्तान या थाईलैंड और कंबोडिया के संघर्षों को समाप्त करने की कोशिश में अहम भूमिका निभाते देखा है.’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा सुलझाए गए कुछ संघर्षों की जड़ें ‘‘कई वर्षों पुरानी हैं, लेकिन हम इन्हें सुलझाने में सहायता करने के लिए तैयार हैं.’’

भारत ने किसी की भी मध्यस्ता से किया है इनकार

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादी हमले में 26 आम नागरिकों की मौत के बाद भारत ने छह-सात मई की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया और पाकिस्तान एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया. चार दिनों तक जारी रहे सीमा पार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान 10 मई को संघर्ष को समाप्त करने के लिए सहमत हुए. वहीं भारत ने संघर्ष के समाधान में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से लगातार इनकार किया है.

पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ.

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