Coronavirus Pandemic : कोरोना वायरस के बारे में कई तथ्य अब भी बने हुए हैं रहस्य

Coronavirus Pandemic : चीन में तीन महीने पहले शुरू हुए कोरोना वायरस (Coronavirus) के बारे में डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के गहन अध्ययन के बावजूद इस संक्रामक रोग के बारे में कई राज अब भी खुले नहीं हैं.

पेरिस : चीन में तीन महीने पहले शुरू हुए कोरोना वायरस के बारे में डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के गहन अध्ययन के बावजूद इस संक्रामक रोग के बारे में कई राज अब भी खुले नहीं हैं.

सबसे बड़ा रहस्य तो यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह विषाणु करीब 80 प्रतिशत लोगों में कुछ या कोई लक्षण नहीं दिखाता जबकि अन्यों में यह जानलेवा न्यूमोनिया तक साबित हो सकता है. चीन में जब यह महामारी चरम पर थी तो हांगकांग विश्वविद्यालय और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर लियो पून तथा नांचांग विश्वविद्यालय की एक टीम ने बीमारी के हल्के और गंभीर लक्षणों वाले मरीजों की तुलना की.

Also Read: यूपी के 15 जिले पूरी तरह सील- दुकानें भी रहेंगी बंद, सरकार पहुंचायेगी घरों तक राशन

ब्रिटिश पत्रिका ‘द लांसेट’ में प्रकाशित उनके अध्ययन में पाया गया कि इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित लोग बुजुर्ग थे और उनमें नाक तथा गले में विषाणु का जमाव इससे हल्के रूप से प्रभावित लोगों के मुकाबले 60 प्रतिशत अधिक था. सवाल अब भी बरकरार है कि क्या उम्र के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने के कारण वे इसके ज्यादा चपेट में आए या वे विषाणु के अधिक संपर्क में आए.

खसरे के विषाणु पर अनुसंधान से पता चलता है कि बीमारी की गंभीरता उसके संपर्क में आने से संबंधित होती है. बहरहाल, विशेषज्ञों को अभी मालूम नहीं है कि क्या कोविड-19 के मामले में भी ऐसा ही है. कोरोना वायरस को शारीरिक संपर्क में आने या किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से गिरने वाले कणों के जरिए फैलने वाली बीमारी के तौर पर जाना जाता है, लेकिन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार यह हवा में भी रह सकता है.

Also Read: विपक्षी दलों के साथ बैठक के बाद पीएम मोदी ने दिये संकेत, बढ़ेगी लॉकडाउन की अवधि

बहरहाल, वैज्ञानिकों को यह नहीं पता कि क्या उस स्तर पर भी यह बीमारी फैल सकती है. इस सवाल पर कि क्या कोविड-19 उत्तरी गोलार्ध में गर्मी आने से रुक सकता है, इस पर विशेषज्ञों ने कहा कि यह संभव है लेकिन इस बारे में पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है. फ्लू जैसे श्वसन संबंधी विषाणु ठंडे और शुष्क मौसम में अधिक स्थिर होते हैं इसलिए वे सर्दियों में अधिक तेजी से फैलते हैं.

हांगकांग के शोधकर्ताओं ने पाया कि एशिया में 2002-03 का सार्स विषाणु उस समय अधिक फैला जब नमी और तापमान कम था. यह विषाणु कोरोना वायरस से निकटता से जुड़ा है. अमेरिका में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक हालिया अध्ययन में आगाह किया गया कि केवल मौसम में बदलाव से कोविड-19 के मामले कम नहीं होंगे जब तक कि बड़े पैमाने पर जन स्वास्थ्य संबंधी उपाय न किए जाए.

एक सवाल यह भी है कि क्या किशोरों के मुकाबले बच्चों को कोविड-19 से कम खतरा है. एक चीनी अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 से संक्रमित 10 में कोई बच्चा बहुत अधिक बीमार नहीं पड़ा. उन्हें गले में सूजन, खांसी और हल्के बुखार के ही लक्षण थे. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि विषाणु से संक्रमित लोगों के साथ रह रहे बच्चों में किशोरों के मुकाबले इसकी चपेट में आने की आशंका दो से तीन गुना कम रहती है. 2002-03 में सार्स विषाणु के मामले में ही यह सच हुआ था.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: ArbindKumar Mishra

Published by: Prabhat Khabar

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >