World News : Plastic Pollution से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया Self Degradable प्लास्टिक

Plastic Pollution दुनिया के लिए एक बड़ा व गंभीर खतरा बन चुका है. यह न केवल पर्यावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि अनेक स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न कर रहा है. प्लास्टिक की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह लंबे समय तक धरती में यूं ही पड़ा रहता है और उसकी गुणवत्ता खराब करता […]

Plastic Pollution दुनिया के लिए एक बड़ा व गंभीर खतरा बन चुका है. यह न केवल पर्यावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि अनेक स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न कर रहा है. प्लास्टिक की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह लंबे समय तक धरती में यूं ही पड़ा रहता है और उसकी गुणवत्ता खराब करता है. Complex Chemical Nature के कारण इसे नष्ट होने में वर्षों लगते हैं. इस समस्या के निपटने के लिए दुनिया के कई देश प्लास्टिक यूज पर प्रतिबंध भी लगा चुके हैं. अपने देश में भी Single Use Plastic पर प्रतिबंध है, फिर भी इसका उपयोग धड़ल्ले से जारी है. ऐसे में प्लास्टिक पॉल्यूशन से निपटने के लिए अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक नये तरह का प्लास्टिक विकसित किया है जो self Degradable है. यह शोध विज्ञान पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है.


बेसिलस सबटिलिस बैक्टीरिया को मिलाकर तैयार हुआ प्लास्टिक


अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने नये तरह के प्लास्टिक को तैयार करने के लिए पॉलीयूरीथेन प्लास्टिक में एक बैक्टीरिया को मिलाया है. यह बैक्टीरिया प्लास्टिक खा जाता है और इस तरह प्लास्टिक स्वयं ही नष्ट हो जाता है. इस नये प्लास्टिक में जो बैक्टीरिया मिलाया गया है उसका नाम बेसिलस सबटिलिस है. यह बैक्टीरिया हमारे भोजन में एक प्रोबायोटिक के रूप में उपयोग किया जाता है, परंतु इसके वास्तविक रूप में इसे प्लास्टिक में नहीं मिलाया जा सकता है. प्लास्टिक में मिलाने के लिए इसे जेनेटिक इंजीनियरिंग की हेल्प से तैयार करना पड़ता है ताकि वह प्लास्टिक बनाने के लिए जरूरी अत्यधिक तापमान को सहन कर सके.


ऐसे काम करता है बैक्टीरिया


शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्लास्टिक में मिलाया गया बैक्टीरिया तब तक निष्क्रिय पड़ा रहता है जब तक प्लास्टिक का उपयोग होता रहता है. पर इस्तेमाल के बाद जैसे ही यह प्लास्टिक कचरे में फेंक दिया जाता है, वैसे ही इसके नष्ट होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. वास्तव में प्लास्टिक के कचरे के संपर्क में आने के बाद इसमें मौजूद बैक्टीरिया सक्रिय हो जाता है और प्लास्टिक को खाने लगता है.


प्रदूषण घटाने में मिलेगी सहायता


यदि यह प्रयोग सफल हो जाता है और नया प्लास्टिक, प्लास्टिक का विकल्प बन जाता है, तब प्रदूषण को घटाने में निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी. इस प्रकार यह दुनिया के लिए एक बड़ी राहत होगी. एक अनुमान के अनुसार, प्लास्टिक कचरे में प्रतिवर्ष 35 करोड़ टन की बढ़ातरी हो रही है. यह कचरा केवल लैंडफिल में ही नहीं है, बल्कि माइक्रोप्लास्टिक के रूप में यह हवा, पानी और हमारे खाने में भी मौजूद है. इस लिहाज से देखा जाए, तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बन चुका है. यह समस्या कितनी गंभीर है, इसे 2021 के एक शोध से समझा जा सकता है. वर्ष 2021 में शोधकर्ताओं को एक अजन्मे बच्चे के गर्भनाल में माइक्रोप्लास्टिक मिला था. अभी यह प्लास्टिक लैब में ही है, परंतु संभावना है कि कुछ वर्षों में यह रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए तैयार हो जायेगा.

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