भाड़े के सैनिक या सुपारी किलर! जंग के पीछे पाकिस्तान नहीं कोई और… काबुल-इस्लामाबाद तनाव पर बोला तालिबान

Kabul-Islamabad Tensions Taliban on Pakistan Role: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी हुई, लेकिन मामला नहीं बना. इस पर तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि यह पाकिस्तान की जंग नहीं है, इसके पीछे कोई और है. हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है.

Taliban on Pakistan Role Kabul-Islamabad Tensions: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान की ओर से स्पष्ट संदेश सामने आया है. तालिबान नेतृत्व का कहना है कि वह किसी भी तरह के सैन्य टकराव के पक्ष में नहीं है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को जरूरी मानता है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि संगठन पाकिस्तान के साथ युद्ध की कोई संभावना नहीं देखता. उनके मुताबिक, तालिबान की नीति अच्छे पड़ोसी संबंधों पर आधारित है और दोनों देशों के बीच टकराव से किसी को भी लाभ नहीं होगा. टोलो न्यूज के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि काबुल और इस्लामाबाद के बीच जारी तनाव ने कई क्षेत्रों पर नकारात्मक असर डाला है और इसका कोई सकारात्मक या रचनात्मक नतीजा नहीं निकल रहा.

मुजाहिद ने मौजूदा हालात के पीछे दो संभावित वजहें गिनाईं. उनका कहना था कि संभव है पाकिस्तान के कुछ वर्ग किसी अन्य देश के इशारे पर काम कर रहे हों, या फिर उन्होंने यह मान लिया हो कि सत्ता में आने के बाद तालिबान पाकिस्तान के प्रभाव में ही रहेगा. इसी संदर्भ में उन्होंने इस धारणा को सिरे से खारिज किया कि वर्तमान तनाव पाकिस्तान के अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “यह पाकिस्तान की लड़ाई नहीं है. यह संघर्ष किसी और की ओर से थोपा जा रहा है और इसमें शामिल लोग भाड़े के सैनिकों या सुपारी किलरों की तरह काम कर रहे हैं.” 

TTP के ठिकाने, संचालन क्षेत्र और नियंत्रण सब पाकिस्तान में

मुजाहिद ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने यह मान लिया था और इसे बढ़ावा दिया कि इस्लामिक अमीरात पाकिस्तान का ही विस्तार है और उसके नियंत्रण में है. संभव है कि पाकिस्तान ने भी कभी इस सोच को सच मान लिया हो. सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए तालिबान प्रवक्ता ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पाकिस्तान का आंतरिक मसला बताया. उनके अनुसार, TTP के ठिकाने, संचालन क्षेत्र और नियंत्रण वाले इलाके सभी पाकिस्तान के भीतर ही हैं, इसलिए इस संगठन को अफगानिस्तान से जोड़ने का कोई आधार नहीं है.

हमने किसी से मदद नहीं ली

विदेशी समर्थन को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों पर भी मुजाहिद ने प्रतिक्रिया दी और 20 वर्षों के संघर्ष के दौरान तालिबान को किसी बाहरी ताकत से मदद मिलने के दावों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि तालिबान किसी भी विदेशी शक्ति के प्रति जवाबदेह नहीं है और अफगानिस्तान का संघर्ष पूरी तरह उसकी अपनी धरती पर लड़ा गया. उनके मुताबिक, लड़ाई देश के हर हिस्से फरयाब, कुंदूज, बदख्शां, हेरात, कंधार और हेलमंद सहित सभी प्रांतों में हुई, जो यह दर्शाता है कि यह संघर्ष जनता से जुड़ा और व्यापक था, न कि किसी बाहरी देश द्वारा संचालित.

धार्मिक विद्वानों के बीच बातचीत से सुलझेगा मामला!

ये बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब काबुल और इस्लामाबाद के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ रहा है. सीमा पर दोनों देश कई बार भिड़ चुके हैं. शांति वार्ता के लिए दोनों देशों ने पहले तुर्की और फिर सऊदी अरब में बातचीत की. लेकिन इससे मामला नहीं बना. हालांकि दोनों देशों के उलेमाओं के बीच कुछ सांठगांठ बनती दिख रही है. मौलाना फजलुर रहमान के द्वारा पाकिस्तानी सेना की ओर से अफगानिस्तान पर किए गए हमले की आलोचना के बाद, तालिबान की ओर से सिराजुद्दीन हक्कानी ने भी इस बात की ताईद की. इसी बीच, टोलो न्यूज के अनुसार, इसी परिप्रेक्ष्य में धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक नेताओं ने एक वर्चुअल चर्चा के दौरान दोनों देशों से तुरंत बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है, ताकि आपसी भरोसा बहाल किया जा सके और सीमा चौकियों पर मानवीय गतिविधियों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जा सके.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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