नवंबर में बनी प्लानिंग, 6 महीने बाद खामेनेई को मारना है; तो फरवरी में क्यों हुआ अटैक?

Ali Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के अटैक में हो गई. उनकी मौत की प्लानिंग इजरायल ने नवंबर 2025 में ही कर ली थी, जिसमें यह तय किया गया कि यह कार्रवाई 2026 के मध्य में होगी. लेकिन यह हमला फरवरी, 26 के आखिरी दिन ही हो गया. आखिर ऐसा कैसे हुआ? इजरायली रक्षा मंत्री ने इसके बारे में खुलासा किया है.

Ali Khamenei Death: इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के ऊपर एयरस्ट्राइक की. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. इजरायल ने यह हमला इतनी सटीकता के साथ किया कि किसी को भनक नहीं लगी. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने गुरुवार को खुलासा किया कि खामेनेई को मारने का फैसला पिछले साल नवंबर में ही कर लिया था. इस ऑपरेशन को लगभग छह महीने बाद अंजाम देने की योजना बनाई गई थी.

गुरुवार को काट्ज़ ने बताया कि यह रणनीतिक लक्ष्य पिछले साल के अंत में हुई एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक के दौरान तय किया गया था. उन्होंने कहा, ‘नवंबर में ही प्रधानमंत्री के साथ एक बेहद सीमित बैठक हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खामेनेई को खत्म करने का लक्ष्य तय किया था.’ काट्ज़ के मुताबिक शुरुआत में इस ऑपरेशन को लगभग छह महीने बाद, यानी 2026 के मध्य तक अंजाम देने की योजना थी. लेकिन बाद में ईरान में आंतरिक अशांति बढ़ने के बाद इस योजना के समय में बदलाव कर दिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने अपनी इस रणनीति की जानकारी वॉशिंगटन को भी दी और जनवरी के आसपास ऑपरेशन को आगे बढ़ाने का फैसला किया. काट्ज़ ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि आशंका थी कि तेहरान का दबाव झेल रहा धार्मिक नेतृत्व मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर हमले शुरू कर सकता है. 

क्या है ईरान पर हमले का कारण?

खामेनेई की हत्या अमेरिका-इजरायल के साझा हवाई अभियान में की गई. इस कार्रवाई को इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया. हाल कि दिनों में यह किसी संप्रभु देश के सर्वोच्च नेता को हवाई हमले में मार गिराने की पहली घटना मानी जा रही है. इजरायल का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु परियोजना से पैदा हो रहे ‘अस्तित्वगत खतरे’ को खत्म करना है. इसके साथ ही वह ईरान में ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन का भी समर्थन करता है. हालांकि काफी हमले झेलने के बाद भी ईरान के शासकों ने अब तक सत्ता छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है.

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युद्ध के 7 दिन बीते, अब क्या हाल हैं?

इस संयुक्त हवाई अभियान को अब एक सप्ताह हो चुके हैं. शुरुआती हमलों में ईरान के शीर्ष नेताओं की मौत हो गई, जिसके बाद क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई. इसके बाद ईरान ने इजरायल, खाड़ी देशों और इराक में हमले किए, जबकि इजरायल ने ईरान और लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह पर भी हमले किए.

इस शुरुआती हमले के बाद इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने ईरान पर अपने हवाई हमलों को और तेज कर दिया है. गुरुवार को आईडीएफ ने बताया कि उसने तेहरान में हमलों की 12वीं लहर पूरी कर ली है, जिसमें ईरान की सुरक्षा और सैन्य ढांचे से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया.

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इन हमलों में अलबोर्ज प्रांत में स्थित एक विशेष यूनिट के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया, जो आंतरिक सुरक्षा बलों का संचालन करती है. इजरायली एयरफोर्स ने बताया कि इसके अलावा आईआरजीसी और बासिज फोर्स के ठिकानों पर भी हमले किए गए. आईएएफ ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा बलों के एक केंद्रीय कमांड सेंटर को भी निशाना बनाया. इसके अलावा हथियारों के भंडारण और निर्माण से जुड़े दर्जनों अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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