Iran War: ईरान युद्ध अब अमेरिका के गले की फांस बनता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगभग हर रोज ईरान से डील होने और न होने को लेकर बयान दे रहे हैं, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ होता नहीं नजर आ रहा. इसी बीच एक्सियोस की एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें कहा गया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन इससे पहले कि इस पर कोई बात आगे बढ़ती, ईरानी विदेश मंत्री ने इसे खारिज कर दिया.
एक्सियोस ने सोमवार, 16 मार्च को एक अमेरिकी अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले एक स्रोत के हवाले से एक रिपोर्ट दी. इसमें कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के के विशेष दूत स्टीव विटकाफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच सीधा संचार चैनल हाल के दिनों में फिर से सक्रिय हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के बीच भेजे गए संदेश कितने महत्वपूर्ण या ठोस थे, यह स्पष्ट नहीं है. हालांकि, यह अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच पहली ज्ञात प्रत्यक्ष बातचीत मानी जा रही है.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अब्बास अराघची ने स्टीव विटकॉफ को टेक्स्ट संदेश भेजे थे. इससे पहले ड्रॉप साइट न्यूज ने रिपोर्ट किया था कि स्टीव विटकॉफ ने अब्बास अराघची को संदेश भेजे थे. लेकिन इन दोनों रिपोर्ट्स में एक ही बात और दोहराई गई, वह यह थी कि वॉशिंगटन तेहरान से बात नहीं कर रहा है और विदेश मंत्री अब्बास इन संदेशों को नजरअंदाज कर रहे थे.
अराघची ने खारिज किया रिपोर्ट का दावा
अराघची ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट में लिखा, मिस्टर विटकॉफ से मेरा आखिरी संपर्क उनके नियोक्ता द्वारा ईरान पर एक और अवैध सैन्य हमले के जरिए कूटनीति को खत्म करने के फैसले से पहले हुआ था. इसके विपरीत कोई भी दावा तेल व्यापारियों और आम जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है. अराघची का इशारा 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल का ईरान के ऊपर किए गए हमले से था. यानी दोनों (ईरान और अमेरिका) के बीच इस हमले से पहले ओमान की मध्यस्ता में जिनेवा में बातचीत हुई थी और संभवतः वही आखिरी बात थी.
तेल संकट क्यों पैदा हुआ?
अराघची ने साफ कर दिया कि 28 फरवरी के बाद उन्होंने विटकाफ को कोई मैसेज नहीं किया है. अमेरिका द्वारा इस तरह की बातें फैलाना केवल तेल संकट को कम करने का प्रयास है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करके पूरे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में इजाफा करवा दिया है, क्योंकि ईरान के दक्षिणी सीमा से गुजरने वाले इस समुद्री रास्ते से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का यातायात होता है, जो अभी आंशिक रूप से ठप पड़ा है. आंशिक क्यों? क्योंकि अब भारत और चीन समेत कई देशों के जहाज यहां से सीमित मात्रा में गुजरने लगे हैं, लेकिन अमेरिका और इजरायल के लिए यह रास्ता पूरी तरह बंद है.
झुकने के मूड में नहीं है ईरान
ईरान इस युद्ध में किसी तरह के मोलभाव के मूड में नहीं है. उसने अमेरिका और इजरायल से तब तक लड़ने की कसम खाई है, जब तक कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकल जाता. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान बातीचत करना चाहता है. उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिकी ईरानी सेना तबाह कर दी है. उसकी नौसेना के जहाज नष्ट कर दिए गए हैं. ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान की अब मिसाइल और ड्रोन हमला करने की क्षमता भी कम हो गई है. इससे पहले ट्रंप ने ईरान के सरेंडर करने की भी घोषणा की थी, लेकिन उस समय भी अराघची ने इससे इनकार किया था.
इससे पहले अराघची ने कहा कि ईरान ने न तो किसी युद्धविराम (ट्रूस) की मांग की है और न ही बातचीत की पहल की है, और उन्होंने ऐसे दावों को भ्रमपूर्ण बताया है. विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान की शक्तिशाली सेना तब तक कार्रवाई जारी रखेगी जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति यह नहीं समझ लेते कि अमेरिका द्वारा थोपा गया यह अवैध युद्ध गलत है और इसे दोबारा नहीं दोहराया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि इसके साथ ही, ईरान ने यह भी कहा कि इस संघर्ष के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए.
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यह बयान ईरान की तरफ से अमेरिका के दावों को खारिज करने वाले सख्त रुख को दर्शाता है. उसने साफ कहा है कि वह सीजफायर के लिए बातचीत में शामिल नहीं हुआ है. इसके साथ ही उसने सैन्य कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है.
वहीं, इजरायली सेना ने मंगलवार तड़के एक बार फिर ईरान की राजधानी में बड़े पैमाने पर हमले शुरू करने की घोषणा की. इजरायल ने ईरान की ओर से दो हमलों की सूचना मिलने के बाद इन नए हमलों की घोषणा की. उसने लेबनान में भी ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिजबुल्ला पर भी हमले तेज कर दिए.
