Iran War Damage: ईरान के मंत्रियों का कहना है कि अब हालात सुधारने की कोशिशें जारी हैं. ईरान के सड़क और शहरी विकास उप मंत्री (Roads and Urban Development Minister) ने IRNA को बताया कि 40 दिनों की जंग के दौरान 24 पुलों और चौराहों को निशाना बनाया गया. उन्होंने साफ कहा कि इनमें से एक भी जगह मिलिट्री से जुड़ी नहीं थी, बल्कि ये सब आम जनता की सुविधा के लिए बनाए गए थे. मंत्री ने इन हमलों के लिए ‘अमेरिका-इजरायल’ को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हमले के तुरंत बाद ही इन्हें फिर से बनाने का काम शुरू कर दिया गया है.
775 स्कूलों की हुई मरम्मत
ईरान के शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजमी ने IRNA को जानकारी दी कि हमले में कुल 1300 स्कूलों को नुकसान पहुंचा था. इनमें से 775 स्कूलों को अब तक ठीक किया जा चुका है. काजमी के अनुसार, करीब 20 स्कूल पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं. सबसे ज्यादा असर तेहरान, केरमनशाह, इस्फहान और होर्मुजगन प्रांतों में देखा गया है. जो स्कूल ज्यादा खराब हो चुके हैं, उन्हें अक्टूबर तक ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है.
हमलों के बीच ऑनलाइन चलती रही पढ़ाई
शिक्षा मंत्री काजमी ने बताया कि युद्ध के कारण पढ़ाई नहीं रुकी. ‘ईरानी टेलीविजन स्कूल’ के जरिए बच्चों को घर बैठे और ऑनलाइन पढ़ाया गया. इसके साथ ही छात्रों और स्टाफ की काउंसलिंग भी की जा रही है. मीनाब के शजरेह तैयबा गर्ल्स स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए 170 लोगों (जिनमें ज्यादातर छात्राएं और टीचर्स थे) की याद में स्कूलों में शोक सभाएं भी आयोजित की गईं.
ईरान की शर्त: घेराबंदी हटेगी तभी होगी बात
तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के दूत आमिर सईद इरावानी ने बातचीत के लिए एक बड़ी शर्त रखी है. उन्होंने रुडलॉ न्यूज नेटवर्क (Rudlaw News Network) को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका को सबसे पहले अपनी समुद्री घेराबंदी (Naval Blockade) खत्म करनी होगी. इरावानी ने साफ किया कि जब तक वॉशिंगटन ‘सीजफायर के उल्लंघन’ को नहीं रोकता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी.
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डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम: 3 से 5 दिन का समय
एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के गुटों को एक साथ आकर जवाब देने के लिए बहुत कम समय दिया है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ईरान को अपनी स्थिति साफ करने के लिए सिर्फ 3 से 5 दिन की मोहलत दे रहे हैं. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह सीजफायर हमेशा के लिए नहीं है. वॉशिंगटन अब ईरान के अगले कदम का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही अमेरिका अपनी आगे की रणनीति तय करेगा.
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