US-Iran डील के 14 पॉइंट : तेहरान की बल्ले-बल्ले! 12 अरब डॉलर तुरंत देगा अमेरिका, सेना भी हटाएगा

Iran US Peace Deal 14 Points MoU: अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर से पहले ईरानी मीडिया ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन का मसौदा सार्वजनिक करने का दावा किया है. इसमें युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, प्रतिबंध हटाने और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने जैसे कई बड़े प्रावधान शामिल बताए गए हैं.

Iran US Peace Deal 14 Points MoU: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में हस्ताक्षर होने हैं.  ईरान का दावा है कि दोनों देशों के बीच 14 पॉइंट पर सहमति बनी है. इसमें अरबों डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को रिलीज करने से  लेकर परमाणु कार्यक्रम और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर डील होगी. जानकारी सामने आई है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज ने इसकी जानकारी दी है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. 

24 अरब डॉलर जारी करने का दावा

मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, समझौता ज्ञापन में 60 दिन की वार्ता अवधि के दौरान कुल 24 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियां जारी करने का जिक्र है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस राशि का आधा हिस्सा यानी 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाना चाहिए. हालांकि, इस दस्तावेज की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

यही वह बिंदु है, जिस पर अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा मतभेद दिखाई दे रहा है.

अमेरिका ने किया ईरानी दावे का खंडन

ईरानी मीडिया की रिपोर्ट सामने आने के कुछ ही समय बाद अमेरिकी पक्ष ने अलग रुख अपनाया. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस से बातचीत में कहा कि ईरान की कोई भी फ्रीज की गई संपत्ति तब तक जारी नहीं की जाएगी, जब तक तेहरान अपने दायित्वों को पूरा नहीं करता. अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा, ‘यह प्रदर्शन के बदले भुगतान वाला समझौता है.’

अमेरिकी रुख से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन पहले ईरान की ओर से समझौते के प्रावधानों के पालन को देखना चाहता है और उसके बाद ही वित्तीय रियायतें देने के पक्ष में है.

अमेरिका-ईरान प्रस्तावित समझौते के 14 प्रमुख बिंदु

मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जिनका उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करना और दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते का रास्ता तैयार करना है. अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में निम्नलिखित प्रावधान शामिल हैं:

  1. लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियानों को तत्काल तथा स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा.
  2. अमेरिका, ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने की प्रतिबद्धता जताएगा.
  3. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह समाप्त किया जाएगा.
  4. अमेरिका, ईरान के आसपास तैनात अपने सैन्य बलों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू करेगा.
  5. होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों के भीतर फिर से खोला जाएगा. इसकी व्यवस्था और संचालन ईरान की देखरेख में होगा.
  6. ईरानी तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित किया जाएगा तथा ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक पूर्ण पहुंच दी जाएगी.
  7. अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करेंगे.
  8. परमाणु मुद्दे, अमेरिकी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता अवधि निर्धारित की जाएगी.
  9. ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा.
  10. वार्ता अवधि के दौरान अमेरिका क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल नहीं भेजेगा और ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा.
  11. अंतिम 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान ईरान की 24 अरब डॉलर की अवरुद्ध संपत्तियां जारी की जाएंगी. इनमें से आधी राशि वार्ता शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराई जाएगी.
  12. समझौते के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग मैकेनिज्म) स्थापित किया जाएगा.
  13. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से औपचारिक मान्यता दी जाएगी.
  14. अंतिम दौर की वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की अवरुद्ध संपत्तियों का आधा हिस्सा जारी नहीं कर दिया जाता, तेल प्रतिबंधों को निलंबित नहीं किया जाता और नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती. अंतिम समझौता केवल संवर्धित परमाणु सामग्री (एनरिच्ड मटेरियल) और यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत तथा ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण कार्यक्रम तक सीमित रहेगा. ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोधी समूहों (रेजिस्टेंस ग्रुप्स) को समर्थन से जुड़े मुद्दों को वार्ता के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखा गया है.

ट्रंप की घोषणा के बाद बढ़ी चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है. ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा. युद्ध के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी. समझौते की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस से सफेद धुआं उठता दिखाई दिया, जिसे इस बात का संकेत माना गया कि दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं.

ईरान ने रखी अपनी शर्तें

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने तस्नीम न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि अंतिम समझौते पर शुक्रवार को सिग्नेचर होंगे. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके लिए 60 दिनों की वार्ता होगी. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा. इनमें युद्ध समाप्त करना, नाकेबंदी हटाना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना शामिल है. हालांकि, ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में लेबनान में युद्धविराम का प्रावधान भी शामिल है, जबकि 14 पॉइंट समझौते में इसका जिक्र नहीं था. 

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शहबाज शरीफ ने भी की पुष्टि

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी समझौते की घोषणा की. शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर कहा , ‘गहन वार्ताओं के बाद हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है. दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का फैसला किया है.’ उन्होंने यह भी बताया था कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे. साथ ही कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की मध्यस्थता भूमिका की सराहना की थी.

इजरायल की चुप्पी भी चर्चा में

जहां अधिकांश देशों ने समझौते का स्वागत किया है, वहीं इजरायल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इजरायल लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि उसे दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. हाल के महीनों में उसने अपने सैन्य अभियानों का विस्तार उन इलाकों तक भी किया है, जहां उसकी सेना पिछले लगभग 25 वर्षों से सक्रिय नहीं थी.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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