ईरान ने होर्मुज में चलाया ‘अजदर’, जल कर राख हुए दो जहाज, क्या है यह साइलेंट किलर

Iran UUV Drone Azhdar: ईरान ने युद्ध में अपने सारे पत्ते अब धीरे-धीरे खोलने शुरू कर दिए हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के बाद, उसने दो जहाजों पर हमला किया है. लेकिन यह हमला हवा से नहीं, बल्कि पानी के अंदर से किया. इसमें उसका सबसे बड़ा हथियार बना है अजदर.

Iran UUV Drone Azhdar: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है. दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस यातायात वाला इलाका लगभग चोक है. तेल की कीमतें 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल पार हुई हैं. पूरी दुनिया में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है.  ईरान ने जो कहा वह सब हासिल किया है. इसमें उसके अंडरवाटर ड्रोन का बड़ा हाथ है. पानी के अंदर का यह साइलेंट किलर अजदर है. 

ईरान के ऊपर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल का हमला हुआ. इस अटैक के बाद ईरान की दक्षिणी सीमा के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की घोषणा हो गई. हालांकि, 2 मार्च तक कुछ शिप आ-जा रहे थे. लेकिन ईरान की आईआरजीसी ने आधिकारिक घोषणा कर दी, कोई भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा तो उसकी खैर नहीं. यह वॉर्निंग कोरी नहीं थी.

बुधवार को इराक में भारतीय दूतावास ने कहा, 11 मार्च 2026 को मार्शल द्वीप के झंडे के तहत चल रहे अमेरिका के मालिकाना हक वाले वाले कच्चे तेल के टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर इराक के बसरा के पास हमला हुआ. इसमें दुर्भाग्य से एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई. बाकी 15 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है.

इसी दौरान फारस की खाड़ी में एक और तेल टैंकर को भी आग लगा दी गई. उस पर इराकी जलक्षेत्र में हमला हुआ. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी पर कहा, एक पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन ऑपरेशन के जरिए ‘फारस की खाड़ी में दो तेल टैंकरों को उड़ा दिया गया.‘

हमले का शिकार हुए जहाजों की पहचान माल्टा के झंडे वाले ‘जेफिरोस‘ और मार्शल द्वीप के झंडे वाले ‘सेफसी विष्णु‘ के रूप में हुई. ‘सेफसी विष्णु‘ अमेरिका की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के ओनरशिप में है, जबकि ‘जेफिरोस‘ ग्रीस की एक कंपनी का जहाज है. तो ईरान ने इन्हें कैसे निशाना बनाया?

पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन कैसे काम करते हैं?

पानी के भीतर ड्रोन से हमले करने के लिए मानवरहित पानी के नीचे चलने वाले वाहनों (यूयूवी) का इस्तेमाल किया जाता है. इस श्रेणी में पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन और स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (एयूवी) शामिल होते हैं. पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन में कोई इंसानी ऑपरेटर सवार नहीं होता. इन्हें ट्रैक करना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि यूयूवी पूरी तरह पानी के भीतर चलते हैं. 

इन ड्रोन का सबसे बड़ा फायदा है कि इन्हें रडार से भी पकड़ना बेहद कठिन होता है. ये चुपचाप लक्ष्य तक पहुंचते हैं और अचानक हमला कर देते हैं. इसी वजह से इन्हें समुद्री युद्ध का ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है.

सैन्य इस्तेमाल में कई ऐसे एयूवी को एकतरफा हमले के लिए तैयार किया जाता है. यानी इन्हें जहाज से टकराकर विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया जाता है, ठीक उसी तरह जैसे विस्फोटक ले जाने वाला टॉरपीडो. ये छोटे और तेज गति वाले नाव जैसे होते हैं. 

ये भी पढ़ें:- रिपोर्ट का दावा: कोमा में हैं मोजतबा खामेनेई, ईरान के सुप्रीम लीडर ने हमले में एक पैर भी गंवाया

ईरान के पास क्या-क्या है?

अजदर: इस यूयूवी को अक्सर ‘साइलेंट प्रिडेटर‘ यानी चुपचाप हमला करने वाला शिकारी कहा जाता है. इसमें लिथियम-आयन बैटरी तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे यह शांत इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के साथ चलता है. इसे समुद्री मार्गों को बाधित करने और दुश्मन के जहाजों के पास चुपचाप पहुंचकर विस्फोटक चार्ज से हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है.

डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगभग 25 नॉट यानी करीब 45 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से पानी के भीतर चल सकता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी ऑपरेशनल क्षमता है. यह लगभग चार दिनों तक लगातार समुद्र में मिशन पर रह सकता है और करीब 600 किलोमीटर तक का क्षेत्र कवर कर सकता है.

इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे रडार छोड़िए और सोनार से भी पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. यह समुद्र के भीतर चुपचाप लक्ष्य के करीब पहुंचता है और जहाज के नीचे या पास जाकर विस्फोट कर सकता है. इसी वजह से इसे समुद्री युद्ध में ‘स्टील्थ अटैक प्लेटफॉर्म’ भी माना जाता है. ऐसे ड्रोन बड़े युद्धपोतों, तेल टैंकरों और सैन्य जहाजों के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते हैं.

नाजिर सीरीज: इस श्रेणी में बड़े आकार के प्लेटफॉर्म शामिल बताए जाते हैं, जैसे नाज़िर-5. इसके अलावा कुछ अत्यधिक बड़े अंडरवाटर ड्रोन (एक्स्ट्रा-लार्ज यूयूवी) भी विकसित किए जाने की बात कही जाती है, जो भारी पेलोड ले जाने में सक्षम होते हैं. इनका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने जैसे अभियानों के लिए किया जा सकता है.

साबेहत-15: यह जीपीएस से लैस दो सीटों वाला एक छोटा पनडुब्बी जैसा वाहन है, जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाता है. इसका उपयोग समुद्र में गुप्त टोही मिशन, तटीय इलाकों में निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने जैसे कार्यों में किया जा सकता है.

‘सुसाइड‘ टॉरपीडो ड्रोन: ईरान के कई यूयूवी मूल रूप से एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन के रूप में डिजाइन किए गए हैं. ये टॉरपीडो की तरह लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेविगेशन की मदद से जहाज के कमजोर हिस्सों को पहचानकर हमला करते हैं. आमतौर पर ये जहाज के पानी की सतह के पास वाले हिस्से को निशाना बनाते हैं, जहां हमला सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है.

ये भी पढ़ें:- कौन हैं मोहम्मद अली जाफरी? जिनकी स्ट्रेटजी से तन कर खड़ा है ईरान; हरा नहीं पा रहे US-इजरायल

माना जाता है कि ये या तो आईआरजीसी से जुड़े हैं या फिर ऐसे डिजाइन हैं, जिन्हें यमन के हूती विद्रोही भी इस्तेमाल करते हैं. भौगोलिक दृष्टि से होर्मूज जलडमरूमध्य एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है, जिसकी चौड़ाई कुछ स्थानों पर लगभग 3.3 किलोमीटर के आसपास ही रह जाती है. इस संकरे समुद्री रास्ते के आसपास ईरान ने वर्षों से अपनी मिसाइल प्रणालियों, नौसैनिक ठिकानों, तेज रफ्तार नौकाओं और ड्रोन नेटवर्क को मजबूत किया है. 

ईरान की रणनीति साफ है कि अगर उस पर लगातार हमले होते रहे, तो वह इस जलमार्ग को असुरक्षित बनाकर वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और ईरान ने इन्हीं युद्धक तरीकों का इस्तेमाल कर समुद्री तेल आपूर्ति को बाधित करना, वैश्विक तेल कीमतों को बढ़ाना और अमेरिका व इजरायल पर आर्थिक दबाव बढ़ाना शामिल है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >