Iran Speaker Qalibaf: इस शांति वार्ता में शामिल होने के लिए ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ शुक्रवार देर रात एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां पहुंच चुके हैं. गालीबाफ ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि ईरान के पास बातचीत के लिए ‘गुडविल’ (इरादा तो नेक) तो है, लेकिन अमेरिका पर ‘भरोसा’ बिल्कुल नहीं है.
ईरान ने बातचीत से पहले रखी दो बड़ी शर्तें
एक भावुक संदेश देते हुए स्पीकर कलीबाफ पाकिस्तान के लिए अपनी ऑफिशियल फ्लाइट में ‘मीनाब घटना’ के पीड़ितों की तस्वीरें भी साथ लेकर आए. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा कि इस उड़ान में मेरे साथी. ईरानी स्टेट मीडिया Press TV की रिपोर्ट के अनुसार, गालीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि बातचीत शुरू होने से पहले दो शर्तों का पूरा होना जरूरी है.
पहली शर्त लेबनान में सीजफायर (युद्धविराम) लागू करना और दूसरी अमेरिका द्वारा रोकी गई ईरान की संपत्तियों को रिलीज करना है. ईरान का कहना है कि जब तक ये दो काम नहीं होते, तब तक डायलॉग आगे नहीं बढ़ सकता. गालीबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इस बातचीत को सिर्फ एक ‘दिखावा’ या ‘धोखा’ समझेगा, तो ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल करेगा.
डेढ़ साल के भीतर दो बार हमले का आरोप
इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी डेलिगेशन में विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हम्मती जैसे बड़े नाम शामिल हैं. IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें सुरक्षा, सैन्य और आर्थिक एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं. गालीबाफ ने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक साल में दो बार ऐसा हुआ जब बातचीत के बीच में ही ईरान पर हमले किए गए. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देगा.
अमेरिका की ओर से जेडी वेंस करेंगे अगुवाई
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस बैठक के लिए इस्लामाबाद रवाना हो चुके हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, अमेरिकी टीम में स्पेशल एन्वाय स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर भी शामिल हैं. वेंस ने कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से बात करेगा, तो अमेरिका दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर ईरान ने बातचीत में चालाकी करने की कोशिश की, तो अमेरिकी टीम उसे बर्दाश्त नहीं करेगी.
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सीजफायर के दायरे पर बना है विवाद
यह पूरी कवायद अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के अस्थाई सीजफायर समझौते को आगे बढ़ाने के लिए हो रही है. ईरान का दावा है कि इस समझौते में इजरायल द्वारा लेबनान में किए जा रहे हमलों को रोकना भी शामिल है. वहीं, अमेरिका और इजरायल का कहना है कि यह सीजफायर हिजबुल्ला के ठिकानों पर लागू नहीं होता. इसी आपसी मतभेद की वजह से डिप्लोमैटिक कोशिशें उलझी हुई हैं. शनिवार सुबह से शुरू होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं कि क्या वेस्ट एशिया में महीने भर से चल रही जंग खत्म हो पाएगी.
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