हां! हम मोसाद एजेंट हैं… शरीर काटा, घावों पर नमक डाला, ईरानी पत्रकार का हैरतअंगेज खुलासा; कैसे खामेनेई शासन ‘US-इजरायल का जासूस’ बनाता है?

ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों में बेतहाशा हिंसा हुई है. मौतों का आंकड़ा 2000 के पार कर गया है, तो वहीं गिरफ्तार लोगों की संख्या भी 19000 से अधिक है. प्रदर्शनकारियों को शासन के क्रूर दमन का सामना करना पड़ रहा है, इस पर ईरानी-अमेरिकी पत्रकार अहमद बातेबी ने सनसनीखेज खुलासा किया है.

ईरान में 28 दिसंबर, 2025 को आर्थिक कारणों से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए. बीते दिनों से यह खबर लिखे जाने तक अलग-अलग रिपोर्ट के अनुसार मौतों का आंकड़ा 2000-12000 तक बताया जा रहा है. तेहरान से उठी चिंगारी ने पूरे देश को अपने चपेट में ले लिया. इसमें मस्जिदें जलाई गईं, सरकारी भवनों में आग लगाई गई और खामेनेई को निशाना बनाते हुए तानाशाहु मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए. अमेरिका के व्हाइट हाउस की ओर से यह भी दावा किया गया कि ईरान में 800 लोगों को फांसी दी जाने वाली थी. ईरानी सरकार ने इन विरोध प्रदर्शनों में विदेशी हाथ बताया है. इसी बीच ईरानी-अमेरिकी पत्रकार अहमद बातेबी ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा कि अयातुल्ला शासन ने यह कहने के लिए उन्हें टॉर्चर किया कि वे अमेरिका के जासूस हैं.

अहमद बातेबी ने गुरुवार को कहा कि उन्हें जबरन खुद को अमेरिका का जासूस घोषित करने के लिए मजबूर किया गया था. उन्होंने कहा कि ‘शैतानी’ अयातुल्ला शासन के हाथों उन्हें भीषण यातना, एकांत कारावास और जबरन कबूलनामों का सामना करना पड़ा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को संबोधित करते हुए बातेबी ने बताया कि उन्हें एक छात्र के रूप में ऐसे ही प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण गिरफ्तार किया गया था. ठीक वैसे ही जैसे आज ईरान की सड़कों पर देखे जा रहे हैं. इन्हें तेहरान लगातार “विदेश-प्रायोजित” करार देता रहा है.

कठोर यातनाएं दी गईं, बातेबी ने सुनाया किस्सा

उन्होंने कहा कि उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. कई वर्षों तक जेल में रखा गया. दो साल तक एकांत कारावास में बंद किया गया. उन्हें बार-बार यातनाएं दी गईं, जिनमें नकली फांसी (मॉक एक्जीक्यूशन) भी शामिल थी. उन्होंने कहा कि यह सरकार मानती है कि उसके खिलाफ प्रदर्शन करना ईश्वर के खिलाफ लड़ाई है, क्योंकि वे ईश्वर के प्रतिनिधि हैं. इस्लामी कानून, शरीयत के अनुसार, इसकी सजा मौत है. बातेबी ने आगे कहा कि उन्होंने मेरे शरीर को काटा और घावों पर नमक डाला. पत्रकार ने सबूत के तौर पर अपने शारीरिक निशान दिखाने की पेशकश की.

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से कई कारणों से प्रताड़ित किया गया. इसका एक कारण यह था कि मुझे सरकारी टीवी कैमरे के सामने लाकर लोगों से यह कहलवाया जाए कि ‘मैं अमेरिका का जासूस हूं.’ उन्हें सरकारी टीवी पर पेश होकर झूठा कबूलनामा देने के लिए मजबूर किया गया कि वे अमेरिका, इजरायल, मोसाद और सीआईए के एजेंट हैं. आज भी ईरानी सरकारी मीडिया में ऐसे जबरन कबूलनामे दिखाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी ऐसा नहीं किया, लेकिन उन्होंने मुझे ऐसा कहने के लिए यातना दी. आज ईरान में बिल्कुल वही स्थिति है.’

ईरानी शासन कहलवाता है- हां हम मोसाद के एजेंट हैं

बातेबी ने कहा, ‘अगर आप सरकारी टीवी देखें, तो आपको कई निर्दोष लोग दिखेंगे. वे सिर्फ अपने अधिकारों के लिए नारे लगाने सड़कों पर आए थे. ईरानी शासन उन्हें कैमरे के सामने खड़ा करता है और कहलवाता है, ‘हां, हम मोसाद के एजेंट हैं.’ तेजी से बढ़ती महंगाई, आर्थिक कठिनाइयों और शासन के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश से प्रेरित व्यापक सरकार-विरोधी प्रदर्शन हो रहे है. इनका जिक्र करते हुए बातेबी ने कहा कि अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने वाले निर्दोष ईरानियों को सरकारी टीवी पर परेड कराई जा रही है. उन्हें विदेशी एजेंट बताया जा रहा है.

अमेरिका उठाए कठोर कदम

उन्होंने बताया कि आखिरकार वे जेल से भागने में सफल रहे और अमेरिका में शरण ली. इस देश ने मेरे लिए अपने दरवाजे खोल दिए. मैं यहां आया, मैं यहां सुरक्षित हूं. आपके सामने, ईरान के शैतानी ‘अयातुल्ला शासन’ का एक प्रतिनिधि खड़ा है. जब हम ईरानी शासन की बात करते हैं, तो हम किसी सामान्य शासन की बात नहीं करते. हम एक शैतानी शासन की बात करते हैं. अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग करते हुए बातेबी ने वैश्विक समुदाय, स्पेशली अमेरिका, से अपील की कि वह केवल निंदा से आगे बढ़कर ईरानी जनता की मदद के लिए ठोस कदम उठाए.

उन्होंने कहा कि आप केवल नारों से एक शैतानी शासन से नहीं लड़ सकते. उनके पास बंदूकें हैं, पैसा है और ताकत है. ईरानी लोगों को वास्तविक मदद की जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया तो बड़े पैमाने पर हत्याएं जारी रहेंगी और यह स्थिति ‘नरसंहार’ में बदल सकती है.

ईरान कैसे साबित करता है लोगों को मोसाद का जासूस

ईरानी अधिकारी लगातार दावा करते रहे हैं कि यह सरकार-विरोधी प्रदर्शन विदेशी ताकतों द्वारा रचे गए हैं. प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि इस हिंसा को मोसाद आतंकवादियों से जोड़ने वाले स्पष्ट सबूत मौजूद हैं. उन्होंने अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री और सीआईए निदेशक माइक पोम्पियो की 2 जनवरी की एक एक्स पोस्ट का हवाला दिया. इसमें उन्होंने लिखा था कि ईरानी शासन मुश्किल में है. भाड़े के लड़ाकों को लाना उसकी आखिरी उम्मीद है. दर्जनों शहरों में दंगे हो रहे हैं. मशहद, तेहरान और जाहेदान में बसीज फोर्स घिरी हुई है. अगला पड़ाव बलूचिस्तान होगा. इस शासन के 47 साल और राष्ट्रपति भी 47. संयोग? उन्होंने आगे लिखा, सड़कों पर उतरे हर ईरानी को नववर्ष की शुभकामनाएं और उनके साथ चल रहे हर मोसाद एजेंट को भी.

‘प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे मोसाद एजेंट’ के उनके इस संदर्भ ने ऐसी अटकलों को जन्म दिया. इससे माना गया कि ईरान में सरकार-विरोधी अशांति को विदेशी शक्तियों खासतौर पर अमेरिका और इजरायल द्वारा समर्थन दिया जा रहा है. उनका उद्देश्य है कि 1979 से सत्ता में रहे खामेनेई शासन को गिराया जा सके.  हालांकि, इस आरोप को कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने सिरे से खारिज किया है.

ईरान पर हमला ट्रंप ने टाला

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यू एजेंसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक कम से कम 2,677 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,693 मामलों की अभी समीक्षा की जा रही है. गंभीर रूप से घायल लोगों की संख्या भी 2,677 तक पहुंच गई है, वहीं 19,097 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. यह विरोध प्रदर्शन अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चेतावनी दी है. बुधवार तक ऐसा अंदेशा बन रहा था कि अमेरिका हमला करने वाला है, लेकिन गुरुवार को मामला ठंडा पड़ गया. पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने खुद तेहरान में रात 1 बजे फोन करके कहा कि वे हमला नहीं करेंगे. हालांकि, व्हाइट हाउस ने सैन्य विकल्प को अब भी टाला नहीं है. 

ये भी पढ़ें:-

इधर मचाडो ट्रंप से मिलीं, उधर डेल्सी ने दिया अपना पहला भाषण, ट्रंप को चुनौती या सरेंडर? वेनेजुएला की राष्ट्रपति क्या बोलीं?

नहीं मान रहे ट्रंप, ग्रीनलैंड पहुंचने लगी यूरोपीय सेना, डेनमार्क के लिए आगे बढ़ा NATO, अब क्या करेगा US?

चीनी दादागिरी के बीच US का बड़ा फैसला, ताइवान के साथ 250 अरब डॉलर की ट्रेड डील, टैरिफ भी घटा, किसका फायदा?

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >