ईरान के विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 60 के पार, इंटरनेट बंद बेअसर, सड़कों पर उतरी जनता

Iran Protest Intensified: ईरान में बीते दो हफ्ते से चल रहे विरोध प्रदर्शन में अब भी कोई कमी आती नहीं दिख रही है. इस जन आंदोलनल पर सरकार की सख्ती भी अब तेज होती जा रही है. नॉर्वे और अमेरिका स्थित दो अलग-अलग ह्यूमन राइट्स संगठनों के अनुसार मरने वालों की संख्या 60 के पार पहुंच गई है. सरकार का इंटरनेट ब्लैकआउट बेअसर होता दिख रहा है, देश भर में फैले इस आंदोलन में जनता सरकार मुर्दाबाद के नारे अब भी लगा रही है.

Iran Protest Intensified: ईरान में बीते करीब दो सप्ताह से जारी जनआंदोलन के दौरान मरने वालों की संख्या बढ़कर 60 के पार पहुंच गई है. आर्थिक समस्याओं को लेकर शुरू आंदोलन अब देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है. नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार, बढ़ती महंगाई और राष्ट्रीय मुद्रा की तेज गिरावट के विरोध में शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. सख्त सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद विरोध प्रदर्शन तेहरान से निकलकर मशहद सहित कई अन्य शहरों तक फैल चुके हैं. वहीं अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स’ समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है. एजेंसी ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 2,300 गिरफ्तारियां हुई हैं.

कड़ी कार्रवाई और दमन के बावजूद ईरानी नागरिक लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारियों की आंखों में तेज जलन हुई, लेकिन इसके बावजूद वे बार-बार दोबारा इकट्ठा हो रहे हैं. फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रदर्शनकारी माजिद ने कहा, “पुलिस पैलेट गन, आंसू गैस और शॉटगन से लोगों को निशाना बना रही है. शुरू में लोग भागे, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से सड़कों पर लौट आए. हमें अपनी जान का खतरा मालूम है, फिर भी हम बेहतर भविष्य के लिए विरोध कर रहे हैं.”

खामनेई ने अमेरिका और ट्रंप पर साधा निशाना

इससे पहले ईरान में इंटरनेट बंद कर दिया गया. सरकार संचार के अन्य साधनों को बंद कर रही है, ताकि विरोध प्रदर्शनों को देश के बाहर से आने वाले संदेशों को रोक सके और अंदर हो रही समस्या को दबाया जा सके. इसी बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है. सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके हाथ “ईरानियों के खून से रंगे हुए हैं.” इस दौरान उनके समर्थक “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते नजर आए. ईरान के सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनकारियों को बार-बार “आतंकवादी” करार देना शुरू कर दिया. इससे पहले भी देश में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसी भाषा का इस्तेमाल अक्सर हिंसक कार्रवाई से पहले किया जाता रहा है.

सड़कों पर कायम विरोध

दिसंबर के अंत में शुरू हुआ यह आंदोलन अब तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों तक फैल चुका है. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की संख्या और हताहतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान में लोग महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन से आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं. बीते 28 दिसंबर को ईरानी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 14 लाख तोमान को पार कर गई. इसके बाद व्यापारियों ने बाजार बंद कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. हालांकि, ये प्रदर्शन तो रुक गए, लेकिन देश के बाकी हिस्सों में जनता सड़कों पर उतर आई. लोगों ने सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए. वहीं ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की थी, जिसका गहरा असर देखने को मिला है. 

पुराने आंदोलनों की याद

मौजूदा विरोध प्रदर्शन 2022-2023 के उस आंदोलन की याद दिलाते हैं, जो सख्त महिला ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन के आरोप में हिरासत में ली गई महसा अमीनी की मौत के बाद भड़का था. उस समय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को दबाने के लिए घातक बल का इस्तेमाल किया था, जिसमें दर्जनों लोगों की जान गई थी. मौजूदा हालात में भी वही दमनकारी रवैया दोहराया जाता दिख रहा है.

पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ.

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