खामेनेई पर हमला हुआ तो जिहाद होगा, ईरान की संसद और राष्ट्रपति ने अमेरिका को दी चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ईरानी संसद और राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि अगर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमला हुआ, तो इसे युद्ध माना जाएगा. अमेरिका के बयानों, ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों, हजारों मौतों और संभावित सैन्य टकराव ने हालात को और गंभीर बना दिया है.

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने साफ चेतावनी दी है कि अगर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमला हुआ, तो इसे जिहाद यानी धार्मिक युद्ध माना जाएगा. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Iranian Students News Agency (ईरानियन स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी) के मुताबिक, संसद समिति ने कहा कि ऐसा हमला सिर्फ ईरान पर नहीं, बल्कि पूरे इस्लामी दुनिया पर हमला माना जाएगा. समिति ने कहा कि इसके बाद इस्लामी विद्वान जिहाद का ऐलान करेंगे और दुनिया भर में मौजूद इस्लाम के अनुयायी इसका जवाब देंगे.

अमेरिका-ईरान तनाव लगातार बढ़ रहा है

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही काफी बढ़ा हुआ है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई को लेकर चेतावनी दी थी कि वॉशिंगटन इसका जवाब दे सकता है. इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने शनिवार को अपने भाषण में ट्रंप को अपराधी कहा.

उन्होंने कहा कि ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए ट्रंप जिम्मेदार हैं. खामेनेई ने यह भी कहा कि पहले पश्चिमी मीडिया ईरान में अशांति को बढ़ावा देता था, लेकिन इस बार खुद अमेरिका के राष्ट्रपति ने प्रदर्शन करने वालों को उकसाया.

राष्ट्रपति पेजेशकियान बोले: हमला मतलब पूरी जंग

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी रविवार को ऐसा ही बयान दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर खामेनेई पर हमला हुआ, तो इसे ईरानी जनता के खिलाफ खुली जंग माना जाएगा.

उन्होंने अमेरिका पर ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया. पेज़ेशकियान ने कहा कि ईरान के लोगों को जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उसकी बड़ी वजह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध हैं.

ट्रंप ने खामेनेई के शासन पर उठाए सवाल

डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को Politico को दिए इंटरव्यू में खामेनेई के करीब 40 साल के शासन को खत्म करने की बात कही. उन्होंने खामेनेई को बीमार व्यक्ति बताया और कहा कि उन्हें अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की जान जाना बंद करनी चाहिए. इन बयानों के बाद दोनों देशों के बीच हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए.

विरोध प्रदर्शन में हजारों मौतों का दावा

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पहले महंगाई, वीक करेंसी और इकोनॉमिक परेशानियों को लेकर थे. बाद में ये प्रदर्शन सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए और कई जगहों पर शासन बदलने की मांग उठी. अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 4,029 लोगों की मौत हो चुकी है. एजेंसी ने बताया कि मरने वालों में 3,786 प्रदर्शनकारी, 180 सुरक्षाकर्मी, 28 बच्चे और 35 ऐसे लोग शामिल हैं जो प्रदर्शन में शामिल नहीं थे.

एजेंसी का कहना है कि असली संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है. यह संस्था पहले भी ईरान में हुए आंदोलनों में सही आंकड़े देती रही है और जमीनी कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए मौतों की पुष्टि करती है.

इंटरनेट बंद कर बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ा गया

जैसे-जैसे आंदोलन तेज हुआ, ईरानी सरकार ने 8 जनवरी को इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दीं. इससे देश के अंदर संचार प्रभावित हुआ और ईरान का संपर्क बाहरी दुनिया से काफी हद तक टूट गया. इसका असर यह हुआ कि इंडिपेंडेंट रिपोर्टिंग भी मुश्किल हो गई.

ट्रम्प ने ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने को कहा

पिछले मंगलवार को ट्रम्प ने ईरान के लोगों से प्रदर्शन जारी रखने और अपने संस्थानों पर कब्जा करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मदद आ रही है. उसी समय ऐसी खबरें भी सामने आईं कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने के करीब है. बुधवार को अमेरिका लगभग हमला शुरू करने ही वाला था, लेकिन बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और हालात को देखते हुए ट्रम्प ने फिलहाल कदम पीछे खींच लिया.

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By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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