अमेरिका ने माना ‘ईरान के पास परमाणु बम से भी बड़ा हथियार’, खुफिया रिपोर्ट का खुलासा; जब चाहे कर सकता है इस्तेमाल

Iran Hormuz Strait US Deal: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन में दावा किया गया है कि ईरान अब किसी भी समय होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की क्षमता रखता है. रिपोर्ट के अनुसार यह क्षमता परमाणु हथियार से भी बड़ी है.

Iran Hormuz Strait US Deal: पश्चिम एशिया में अब तनाव थमने की गुंजाइश लग रही है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को शुक्रवार को अमीलजामा पहनाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की ओर से इसकी सार्वजनिक स्वीकारोक्ति आ चुकी है. जहां ईरान का दावा है कि उसकी सभी शर्तें मान ली गई हैं. उसने अपना 14 सूत्रीय एजेंडा सामने रखा, वहीं अमेरिका अभी इस पर ना-ना ही कर रहा है. विश्व के बड़े राजनीतिक हलकों में इसे ईरान की जीत के रूप में ही देखा जा रहा है. होर्मुज पर नियंत्रण से ईरान ने दुनिया को घुटनों पर ला दिया, जिसकी बदौलत अमेरिका को झुकना पड़ा. अब इसे दबे स्वर में अमेरिका ने भी स्वीकार कर लिया है. 

अमेरिका-ईरान वार्ताओं के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई आकलन रिपोर्ट ने वॉशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध के बाद ईरान ने ऐसी क्षमता हासिल कर ली है, जिसके बल पर वह किसी भी समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शुक्रवार, 19 जून को प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी यह जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होगा. यानी ईरान की यह क्षमता भविष्य में भी वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए चुनौती बन सकती है.

सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर हमले करने और क्षेत्रीय हालात का फायदा उठाने की रणनीति ने ईरान को नई ताकत दी है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया था. ये वही ठिकाने थे जिन्हें अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा की गारंटी के तौर पर देखता रहा है.

‘परमाणु हथियार से भी बड़ा हथियार’

अमेरिकी खुफिया आकलन से जुड़े एक सूत्र ने सीएनएन से कहा, ‘हमने व्यावहारिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण स्वीकार कर लिया है. यह ऐसा हथियार है जो किसी भी परमाणु हथियार से अधिक शक्तिशाली साबित हो सकता है.’

रिपोर्ट के मुताबिक, जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल कराने के लिए अमेरिका को ईरान के साथ गहन बातचीत करनी पड़ी. इससे यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में तेहरान का प्रभाव अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है.

ईरान ने होर्मुज पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा

होर्मुज स्ट्रेट ऐसा समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का यातायात होता है. ईरान ने इसकी नाकेबंदी करके पूरी दुनिया की ग्लोबल ऑयल सप्लाई को पूरी तरह संकट में डाल दिया. तेल की आपूर्ति सीमित होने के साथ-साथ इसके दाम भी बढ़ गए. नतीजतन पूरी दुनिया में महंगाई भी बढ़ी. अमेरिका ने होर्मुज खोलने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश की

अमेरिका ने ईरान के मिलिट्री इंस्टालेशन पर हमले किए. दावा किया कि ईरान की मिलिट्री समाप्त हो गई है. उसके हथियार समाप्त हो गए हैं. लेकिन ईरान शांति और मजबूती से होर्मुज पर अपने कंट्रोल को बनाए रख पाया. अमेरिका ने खार्ग, केश्म और अन्य आईलैंड पर भी हमले किए, लेकिन जमीन पर सैनिक उतारे बिना ईरान को हराना संभव नहीं था.

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पास अब भी सैकड़ों मिसाइल, ड्रोन, मिसाइल लांचर, छोटी और तेज नावें हैं. इनकी मदद से वे होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अटैक कर सकते हैं. ईरान इन सभी को (हथियार) बहुत तेजी से बना भी रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान एक इकॉनमिक न्यूक्लियर वीपन बनाने पर भी प्लान कर रहा है. इसमें वह यमन के अपने हूथी सहयोगियों के साथ बाब अल मंदेब को भी ब्लॉक करने के लिए मना रहा है. हालांकि, यह तब होगा, जब शुक्रवार की वार्ता फेल होगी. लिहाजा ऐसा माना जा रहा है कि ईरान ने अपनी शर्तों पर ही यह पीस डील स्वीकारी है. 

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अमेरिका-ईरान समझौते में क्या है?

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं. इस समझौते को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा, ‘इस समझौते में तीन प्रमुख बातें हैं. पहली, ईरान परमाणु हथियार नहीं रखेगा. दूसरी, होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा. और तीसरी, अगर ईरान जिम्मेदार व्यवहार करता है तो उसे कई लाभ मिल सकते हैं. यदि वह ऐसा नहीं करता, तो उसे कुछ भी नहीं मिलेगा.’ हालांकि वेंस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान को कौन-कौन से लाभ दिए जा सकते हैं.

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ट्रंप जल्द सार्वजनिक करेंगे समझौते का पूरा ब्यौरा

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह कुछ दिनों के भीतर ईरान के साथ हुए समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक कर सकते हैं. ट्रंप ने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ने पर वह कैमरों के सामने पूरे दस्तावेज को पढ़कर भी सुना सकते हैं. फ्रांस में जी-7 समिट के दौरान यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से ट्रंप ने कहा कि वह पहले एक औपचारिक मंच का इंतजार कर रहे हैं. उसके बाद इसे सार्वजनिक करने में मुझे कोई परेशानी नहीं है. यह एक शानदार दस्तावेज है.

समझौते का सबसे अहम बिंदु क्या?

डील पर हिंट देते हुए ट्रंप ने कहा कि इस दस्तावेज में साफ लिखा है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा. उन्होंने रविवार को इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर कर दिए थे, लेकिन इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है. दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों और कई विश्व नेताओं ने भी अभी तक समझौते का पूरा दस्तावेज नहीं देखा है. इसके बावजूद ट्रंप ने गोपनीयता को लेकर उठ रहे सवालों को ज्यादा महत्व नहीं दिया.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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