होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकर पर ईरान ने किया हमला, कहा-प्रतिबंध जारी रहेगा

Strait of Hormuz : होर्मुज स्ट्रेट 17 अप्रैल को खुलने के बाद 18 को एक बार फिर बंद कर दिया गया है. ईरान ने अमेरिकी धमकी के बाद यह फैसला किया है.

Strait of Hormuz : मिडिल ईस्ट में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव एकबार फिर बढ़ गया है. इस बार तनाव की वजह है ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में शनिवार को एक टैंकर पर हमला करना. ब्रिटेन की सेना ने यह जानकारी दी है कि ईरान से जुड़ी गनबोट ने एक टैंकर पर गोलीबारी की.

हमला तब हुआ जब टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार ईरान के दो गनबोट ने होर्मुज से गुजर रहे एक टैंकर को निशाना बनाया. हालांकि राहत की बात यह है कि इस हमले में टैंकर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं.

ईरान ने होर्मुज पर प्रतिबंध की फिर की घोषणा

ईरान ने 17 अप्रैल को यह कहा था कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर लगाए प्रतिबंध को वापस लेता है और सभी जहाजों के आवागमन की अनुमति देता है. लेकिन शनिवार 18 अप्रैल को ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर प्रतिबंध फिर से लागू करने की घोषणा कर दी. उसके बाद ही टैंकर पर हमले की यह घटना हुई है. प्रतिबंध की घोषणा सुबह की गई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी नाकेबंदी तब तक पूरी तरह प्रभावी बनी रहेगी, जब तक तेहरान अमेरिका के साथ समझौते पर नहीं पहुंचता, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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