Indonesia Earthquake : इंडोनेशिया में आए भीषण भूकंप के कई दिन बाद भी हजारों लोग राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं. पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आए भूकंप से कम से कम 68 लोगों की मौत हुई है, जबकि 135 लोग घायल हुए हैं. सैकड़ों मकान और अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं. कई प्रभावित इलाकों में अब भी राहत पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं.
इंडोनेशिया ने सोमवार को अपना 81वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. राजधानी जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों का नेतृत्व किया. उन्होंने देश के लोगों से पूर्वी नुसा तेंगारा समेत आपदा प्रभावित इलाकों के लोगों के लिए प्रार्थना करने की अपील की.
फ्लोरेस द्वीप पर बड़ी संख्या में लोग अब भी अपनों की तलाश कर रहे हैं. कई लोग क्षतिग्रस्त मकानों के बाहर तिरपाल से बने अस्थायी तंबुओं में रात गुजार रहे हैं. भूकंप के कारण कुछ समुदायों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है.
1,300 से अधिक मकान तबाह
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, शनिवार को पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आए भूकंप से 1,300 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. अकेले फ्लोरेस में करीब 250 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए. करीब 5,000 लोगों को अस्थायी शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
प्रांत के गवर्नर ने रविवार को 14 दिन के लिए आपातकाल की घोषणा की. प्रभावित क्षेत्र में 3,500 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. अधिकारियों के अनुसार, करीब 275 टन राहत सामग्री भी इलाके में पहुंचाई जा चुकी है.
राहत पहुंचाने में आ रही मुश्किल
राहत सामग्री पहुंचने के बावजूद कई प्रभावित समुदायों तक मदद पहुंचाने में देरी हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें भोजन, दवाओं और साफ पानी के साथ खाना पकाने के लिए जरूरी सामान की भी जरूरत है.
मंगराई रीजेंसी के रियो गांव में कपड़ों का कारोबार करने वाले रशीद जफर ने कहा कि उनका घर मलबे में बदल गया है और उन्हें तत्काल भोजन, दवाओं तथा साफ पानी की जरूरत है.
रियो गांव की निवासी मारियाना तेवु ने कहा कि उनके पास कुछ भी नहीं बचा है और प्रभावित क्षेत्र में सामुदायिक रसोई की जरूरत है.
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995 झटके दर्ज
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार, शनिवार सुबह छह बजे से कुछ पहले भूकंप आया था. इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी. भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई, जिसके चलते लोग घरों से बाहर निकल आए. बाद में चेतावनी वापस ले ली गई.
अधिकारियों ने इसके बाद भूकंप के कम से कम 995 झटके दर्ज किए. इनमें से 46 झटके लोगों ने महसूस किए.
भूकंप के कारण फ्लोरेस के कई हिस्सों में सड़कें अवरुद्ध हो गईं. पेड़ गिरने और भूस्खलन के कारण आवागमन प्रभावित हुआ. पहाड़ों से बड़े पत्थर नीचे आ गए और कई मकान पूरी तरह नष्ट हो गए. इमारतों के गिरने से कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.
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1992 की आपदा की यादें ताजा
भूकंप ने फ्लोरेस के लोगों को वर्ष 1992 में आए शक्तिशाली भूकंप और सुनामी की याद दिला दी. उस आपदा में करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी.
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है. यह इलाका भूकंपीय भ्रंश और ज्वालामुखियों के कारण भूकंप तथा ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाओं के लिए जाना जाता है.
वर्ष 2018 में सुलावेसी द्वीप पर 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी आई थी, जिसमें 4,400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. वहीं, वर्ष 2004 में सुमात्रा के तट के पास 9.1 तीव्रता के भूकंप से आई सुनामी में 12 देशों में करीब 2,30,000 लोगों की जान गई थी. अकेले आचे प्रांत में करीब 1,70,000 लोगों की मौत हुई थी.
