इंडियन आर्मी ने इस देश में 1 दिन में बनाया 120 फीट लंबा पुल, महीने में तीसरा ब्रिज बनाकर बोली सेना- लाइफ लाइन बहाल हुई

श्रीलंका में पिछले साल आए चक्रवात दितवाह ने काफी तबाही मचाई थी. भारत ने अपने पड़ोसी देश की सबसे अधिक सहायता की. इसी सिलसिले में इंडियन आर्मी ने भारत सरकार के नेबरहुड फर्स्ट की नीति को और मजबूत किया है.

भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने श्रीलंका में बी-492 राजमार्ग पर किलोमीटर 15 पर 120 फीट लंबे तीसरे बेली ब्रिज का सफलतापूर्वक निर्माण किया है. यह पुल श्रीलंका के मध्य प्रांत में स्थित है और कैंडी तथा नुवारा एलिया जिलों को जोड़ता है. यह एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जो चक्रवात डितवाह से हुई भारी तबाही के बाद पिछले एक महीने से ज्यादा समय से बाधित था. इससे पहले भारतीय सेना ने जाफना और कैंडी क्षेत्रों में दो बेली ब्रिज बनाए थे. इन सभी इंजीनियरिंग प्रयासों के माध्यम से सड़क संपर्क बहाल हुआ है, जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है और चक्रवात से प्रभावित समुदायों को बड़ी राहत मिली है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय सेना ने इसकी जानकारी देते पोस्ट किया, “भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने जाफना और कैंडी क्षेत्रों में दो महत्वपूर्ण बेली ब्रिज सफलतापूर्वक स्थापित करने के बाद, श्रीलंका के मध्य प्रांत में बी-492 राजमार्ग पर किलोमीटर 15 पर 120 फीट लंबा तीसरा बेली ब्रिज तैयार किया है.” पोस्ट में आगे कहा गया, “कैंडी और नुवारा एलिया जिलों को जोड़ने वाला यह पुल उस महत्वपूर्ण जीवनरेखा को बहाल करेगा, जो चक्रवात डिटवाह के बाद एक महीने से अधिक समय तक कटी हुई थी. यह प्रयास श्रीलंका के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता (डेडिकेशन) और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की पुष्टि करता है.”

भारत ने शुरू किया था ‘ऑपरेशन सागर बंधु’

पिछले साल के अंत में श्रीलंका से टकराने वाले चक्रवात डितवाह ने भारी बाढ़, भूस्खलन और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया था. इससे स्थानीय आपदा-प्रतिक्रिया तंत्र पर भारी दबाव पड़ा. भारत ने अपने पड़ोसी देश की सहातया के लिए नवंबर 2025 में ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू किया था. इसके तहत मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रदान की गई, जिसमें सड़कों, पुलों और आवश्यक सेवाओं की बहाली भी शामिल थी. बी-492 मार्ग पर तेजी से संपर्क बहाल कर भारतीय सेना ने न केवल प्रभावित लोगों के डेली लाइफ को आसान बनाया, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सद्भाव को भी मजबूत किया.

यह प्रयास एक बार फिर श्रीलंका के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता (स्ट्रांग कमिटमेंट) और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को रेखांकित करता है. इस नीति के तहत भारत सरकार अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ फ्रेंडली और एक दूसरे के लिए लाभकारी संबंध विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध (कमिटेड) है. भारत अपने पड़ोसियों के लिए एक सक्रिय विकास साझेदार है. इसके तहत भारत की अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित कई देशों में विभिन्न परियोजनाओं में शामिल है. 

क्या है भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी

भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी का मकसद स्थिरता और समृद्धि के लिए लोगों पर फोकस्ड, क्षेत्रीय और दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी ढांचे तैयार करना है. यह नीति परामर्श आधारित, गैर-प्रतिशोधात्मक (नॉन रिटालिएटरी यानी बिना बदले की कार्रवाई वाली) और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण (रिजल्ट ओरिएंटेड) पर आधारित है. इसका फोकस बेहतर संपर्क, मजबूत बुनियादी ढांचा, विकास सहयोग, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना है.

लोस अध्यक्ष श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष से मिले

इस बीच, भारत-श्रीलंका संबंधों को और मजबूत करते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ देशों के संसद अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) के दौरान श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष जगत विक्रमरत्ने से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने संसदों के बीच करीबी सहयोग पर चर्चा की और भारत-श्रीलंका के बीच समय-परीक्षित मित्रता, आपसी सहयोग और साझा लोकतांत्रिक परंपराओं को याद किया. साथ ही, तकनीक आधारित संसदीय नवाचार में गहरे सहयोग पर भी विचार-विमर्श हुआ.

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