India-Pakistan Nuclear Risk: रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही दोनों देश सीधा युद्ध नहीं चाहते, लेकिन आतंकी संगठन ऐसी स्थिति पैदा कर सकते हैं जिससे हालात बिगड़ जाएं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने दिखाया कि कैसे ऐसी घटनाएं बड़े संघर्ष की वजह बन सकती हैं.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में यह बड़ा दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दखल की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया परमाणु तनाव कम हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के इंटरवेंशन (हस्तक्षेप) ने दोनों देशों के बीच बिगड़ते हालात को संभाला. हालांकि, इसके बावजूद दक्षिण एशिया में सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं क्योंकि आतंकी गुट अब भी एक्टिव हैं.
भारत का मानना है कि यह पूरी तरह से एक ‘बायलेटरल’ मामला है
अमेरिकी रिपोर्ट में भले ही ट्रंप के दखल की बात कही गई हो, लेकिन भारत सरकार ने हमेशा इस तरह के दावों को सिरे से खारिज किया है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कई बार स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी विवाद, चाहे वह कश्मीर हो या सैन्य संघर्ष, उसमें अमेरिका या किसी भी अन्य देश की मध्यस्थता की कोई जरूरत नहीं है. भारत का साफ मानना है कि यह पूरी तरह से एक ‘बायलेटरल’ (दो-पक्षीय) मामला है.
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद के हालातों पर साफ कहा है कि युद्धविराम या तनाव कम होने में किसी तीसरे देश का कोई हाथ नहीं था. उन्होंने स्पष्ट किया है कि युद्ध जैसी स्थिति का रुकना (Cessation of Hostilities) भारत और पाकिस्तान के बीच की अपनी बातचीत का नतीजा था. भारत की नीति हमेशा से यही रही है कि बाहरी दखल के बिना ही पड़ोसी देशों से जुड़े मुद्दों को सुलझाया जाए.
पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर
रिपोर्ट में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (बैसेरन वैली) में हुए आतंकी हमले का जिक्र है. इस हमले में एक नेपाली नागरिक समेत 26 लोगों की जान गई थी. इसके जवाब में भारतीय सेना ने 6 और 7 मई की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था. भारत ने पाकिस्तान और PoK में मौजूद 9 आतंकी कैंपों पर सटीक स्ट्राइक की थी, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के 100 से ज्यादा आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए थे.
पाकिस्तान की मिसाइल तकनीक और खतरा
यूएस इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल पावर पर चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार ऐसी एडवांस मिसाइलें बना रहा है जो न सिर्फ दक्षिण एशिया, बल्कि उससे बाहर भी हमला कर सकती हैं. अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो पाकिस्तान ऐसी ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) बना लेगा जो सीधे अमेरिका के लिए भी खतरा बन सकती हैं.
ISIS-K का बढ़ता प्रभाव
दक्षिण एशिया में आतंकी संगठन ISIS-K (इस्लामिक स्टेट-खोरासान) की मौजूदगी पर भी रिपोर्ट में बात की गई है. रिपोर्ट कहती है कि यह संगठन बाहरी देशों पर हमले की फिराक में है. हालांकि, तालिबान ने इनके खिलाफ कई रेड्स की हैं और इनके कुछ लीडर्स को पड़ोसी देशों में भागने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है.
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पाकिस्तान और तालिबान में ठनी
पाकिस्तान और तालिबान के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैं. 26 फरवरी 2026 को अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने काबुल और अन्य शहरों पर बमबारी की. यह पहली बार था जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के शहरी इलाकों को निशाना बनाया. पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि शांति तभी होगी जब तालिबान अपनी जमीन से पाकिस्तान विरोधी आतंकियों को खत्म करेगा.
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