भारत अब वेनेजुएला का तेल खरीद सकता है. बदलती ऊर्जा रणनीति और वैश्विक कूटनीतिक दबावों के बीच यह नया समीकरण सामने आया है. अमेरिका ने वेनेजुएला के ऊपर 3 जनवरी को हमला किया और राजधानी कराकास से तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद से अमेरिका इस लैटिन अमेरिकी देश के तेल पर अपना दावा कर रहा है. वहीं भारत को लेकर अमेरिका का दावा है कि वह रूस से तेल लेना कम कर रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध के रुकने के आसार दिख रहे हैं, ऐसे में तेल बाजार की दिशा तेजी से बदल सकती है. भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में बड़ा संतुलन बदलाव कर सकता है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को संकेत दिया है कि वह जल्द ही वेनेज़ुएला से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू कर सकता है. यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब भारत रूस से अपने तेल आयात में तेजी से कटौती कर रहा है. बताया जा रहा है कि वाशिंगटन लंबे समय से भारत के ऊर्जा व्यापार को लेकर दबाव बनाए हुए है.
उसका दावा है कि आने वाले महीनों में रूस से भारत को मिलने वाले तेल की मात्रा और घट सकती है. इस पहल के पीछे अमेरिका की मंशा यह है कि भारत, रूस से कम हो रही आपूर्ति की भरपाई वेनेज़ुएला से तेल लेकर कर सके. इस मामले से जुड़े सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है.
रूस से भारत का कच्चा तेल आयात जनवरी में लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) रहा. रिपोर्ट का दावा है कि यह मात्रा फरवरी में घटकर करीब 10 लाख bpd और मार्च में लगभग 8 लाख bpd तक आ सकती है. इसके बाद इसमें और गिरावट की भी संभावना जताई गई है.
पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था जो वेनेजुएला से तेल खरीदते थे, और इस नीति का असर भारत पर भी पड़ा था. इस कारण वेनेजुएला से तेल आयात लगभग ठप हो गया था. वहीं अमेरिका ने भारत के ऊपर रूस का तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. इसकी वजह से भारत के ऊपर कुल टैरिफ 50% हो गया है. भारत इस दबाव को जरूर कम करना चाहता है.
पीएम मोदी और रोड्रिगेज के बीच हुई बातचीत
यह ऑफर उस घोषणा के एक दिन बाद हुआ है जब वेनेजुएला ने अपने हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया. यह एक बड़ा परिवर्तन है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित करने और तेल उत्पादन को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बातचीत की. उन्होंने एक्स/ट्विटर पर लिखा, दोनों पक्ष सभी क्षेत्रों में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा और विस्तृत करने पर सहमत हुए हैं. आने वाले वर्षों में भारत-वेनेज़ुएला संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की साझा विजन रखते हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी व्यापार, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि तथा लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाई जाएगी, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी. वैश्विक ऊर्जा बाजार तथा भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के विकल्पों को भी तलाश रहा है.
अब भारत रूस से तेल खरीद कम कर रहा है, तो अमेरिका ने संकेत दिया है कि वेनेजुएला को एक वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्वीकार किया जा सकता है. अमेरिकी अधिकारी ने भारत के ऊपर टैरिफ कम करने का भी इशारा किया है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि भारत को वेनेज़ुएला का तेल सीधे उसकी सरकारी कंपनी PDVSA बेचेगी या अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए आपूर्ति होगी.
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस का तेल भारी छूट पर मिलने लगा था, जिससे भारत उसका बड़ा खरीदार बन गया. रिपोर्ट के मुताबिक, अब अमेरिकी टैरिफ दबाव और वैश्विक समीकरणों के चलते भारत अपने तेल स्रोतों में विविधता ला रहा है. भारतीय रिफाइनर पहले ही रूसी कच्चे तेल की खरीद सीमित करने लगे हैं.
वहीं, ट्रेडिंग कंपनियां वेनेज़ुएला के विभिन्न तेल ग्रेड की संभावनाएं तलाश रही हैं, ताकि घटती रूसी आपूर्ति की भरपाई की जा सके. भारत का रूस से तेल आयात भी दो वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ चुका है. इसके परिणामस्वरूप भारत के आयातित तेल मिश्रण में ओपेक देशों की हिस्सेदारी बढ़कर 11 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, क्योंकि रिफाइनर वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर रहे हैं.
नई दिल्ली मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से आयात बढ़ाकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. अमेरिका लंबे समय से यह कोशिश कर रहा है कि रूस के तेल निर्यात से होने वाली कमाई कम की जाए. वाशिंगटन का मानना है कि यही पैसा यूक्रेन युद्ध में मॉस्को की मदद कर रहा है. ऐसे में भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति देना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. यह कदम भारत-अमेरिका व्यापारिक वार्ताओं को भी नई दिशा दे सकता है.
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