कीड़े-मकौड़े से परेशान हैं पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान, पत्नी ने कहा- दूसरे जेल में भेजो

इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने शनिवार को अटक जेल प्रशासन को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को उपयुक्त मेडिकल सुविधाएं मुहैया करने का निर्देश दिया तथा उन्हें अपने दोस्तों और परिवार से कानून के मुताबिक मिलने की इजाजत देने को कहा है. इस बीच पूर्व पीएम की पत्नी ने जेल बदलने की मांग की है.

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी ने गृह सचिव को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने पति की जेल बदलने की मांग की है. आपको बता दें कि पिछले दिनों पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पहली बार उच्च सुरक्षा वाली अटक जेल में अपनी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की थी.

वकील नईम हैदर पंजुथा ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो संदेश में बताया था कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के 70 वर्षीय अध्यक्ष और उनकी पत्नी के बीच आमने-सामने की यह मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली. उन्होंने बताया कि बुशरा बीबी से इमरान की मुलाकात आधे घंटे तक चली. बुशरा बीबी ने कहा कि इमरान खान साहब बिल्कुल ठीक हैं, लेकिन उन्हें क्लास सी में रखा गया है. हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद विधि दल को मिलने नहीं दिया गया. हम इस मामले को कोर्ट के समक्ष उठाएंगे.

इमरान की तीसरी पत्नी बुशरा पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं. वह एक आध्यात्मिक चिकित्सक हैं और उन्हें सूफीवाद के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता हैं.

मक्खियां और कीड़े-मकौड़े से परेशान हैं इमरान खान

कुछ दिन पहले खबर आयी थी कि जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने वकीलों से कहा है कि उन्हें अटक जेल से बाहर निकाला जाए क्योंकि वह ऐसी कोठरी में नहीं रहना चाहते जहां दिन में मक्खियां और रात में कीड़े-मकौड़े भरे रहते हैं. इमरान नाखुश और चिंतित है क्योंकि वह जेल की कोठरी में बंद हैं. क्रिकेटर से नेता बने 70 वर्षीय इमरान खान को इस्लामाबाद की निचली अदालत द्वारा मामले में “भ्रष्ट आचरण” का दोषी पाए जाने के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया था.

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जियो न्यूज ने इमरान खान और उनके वकील के बीच मुलाकात की जानकारी रखने वाले अटक जेल के सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष ने अपनी कानूनी टीम से कहा है कि वह जेल में नहीं रहना चाहते. अधिकारियों ने खान को उद्धृत करते हुए कहा, मुझे यहां से बाहर निकालो, मैं यहां नहीं रहना चाहता. खान के वकील नईम हैदर पंजोथा को जेल अधिकारियों ने उनसे मिलने की इजाजत दी. पंजोथा ने ‘पीटीआई’ अध्यक्ष से मिलने के बाद कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को “सी-क्लास जेल सुविधाएं” प्रदान की गई हैं और उन्हें “परेशान करने वाली” परिस्थितियों में रखा जा रहा है.

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जेल का निर्माण 1906 में हुआ

अटक जेल की बात करें तो इसका निर्माण 1906 में हुआ था. इसमें कैदियों की संख्या आमतौर पर 1,000 से अधिक होती है.हालांकि, जेल में वर्तमान में 700 से अधिक कैदी हैं और उनके पास केवल सी-श्रेणी की सुविधाएं हैं. सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर 100 से अधिक कैदियों को अदियाला और अन्य जेलों में स्थानांतरित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है.

इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा

इधर इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने गत शनिवार को अटक जेल प्रशासन को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को उपयुक्त मेडिकल सुविधाएं मुहैया करने का निर्देश दिया तथा उन्हें अपने दोस्तों और परिवार से कानून के मुताबिक मिलने की इजाजत देने को कहा. डॉन न्यूज ने कोर्ट के हवाले से कहा, उन्हें (पूर्व प्रधानमंत्री को) नमाज अदा करने वाली चटाई और कुरान का अंग्रेजी प्रारूप भी मुहैया कराया जा सकता है. उन्हें उपयुक्त मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं.

भाषा इनपुट के साथ

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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