MPO से लोगों को डरा रहा पाकिस्तान? इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, कानून पर क्यों उठ रहे सवाल

PTI Protest : पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की अलीमा, उजमा और नोरीन हिरासत में हैं. जानिए MPO के तहत कार्रवाई की वजह और पूरा मामला.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के संस्थापक इमरान खान की तीन बहनें इन दिनों चर्चा में हैं. अलीमा खान को 20 सितंबर और डॉ उजमा खान तथा नूरीन नियाजी को 21 सितंबर को लाहौर में हिरासत में लिया गया. तीनों को पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर यानी MPO के तहत हिरासत में ले 30 दिनों के लिए कोट लखपत जेल भेजा गया है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब PTI ने 27 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया है.इस कार्रवाई को MPO कानून और शहबाज सरकार के फैसले को लेकर चर्चा हो रही है

क्या है MPO कानून?

  • MPO यानी मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर. पाकिस्तान में इसका इस्तेमाल सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाता है. पंजाब में इस कार्रवाई का आधार पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 है. इस कानून की धारा 3 प्रशासन को किसी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी एहतियाती हिरासत में रखने की शक्ति देती है.
  • आसान भाषा में समझें तो अगर प्रशासन को लगता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से सार्वजनिक शांति या सुरक्षा को खतरा हो सकता है, तो वह संभावित घटना को रोकने के लिए पहले ही हिरासत का आदेश दे सकता है. कानून में संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार और हिरासत में लेने की शक्ति का प्रावधान है.

इमरान खान की बहनों को हिरासत में क्यों लिया गया

  • लाहौर प्रशासन के मुताबिक, उजमा खान और नूरीन नियाजी की गतिविधियों को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए नुकसानदेह माना गया. आदेश में आरोप लगाया गया कि दोनों मई 2023 के पीटीआई प्रदर्शनों में शामिल थीं और कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रेरित किया था.
  • प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों सोशल मीडिया और सार्वजनिक बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को दोबारा लामबंद कर रही थीं और सरकार तथा संस्थानों के खिलाफ नारे लगाकर लोगों को उकसाने की कोशिश कर रही थीं.
  • इससे पहले अलीमा खान के मामले में भी लाहौर प्रशासन ने 30 दिन की हिरासत का आदेश दिया. प्रशासन ने कहा कि सार्वजनिक जगह पर उनकी मौजूदगी से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है.

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हिरासत का 27 सितंबर के मार्च से क्या है कनेक्शन?

  • तीनों बहनों की हिरासत का समय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि PTI ने 27 सितंबर को इमरान खान की रिहाई और संविधान की सर्वोच्चता की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया है.
  • सरकार ने इस मार्च को लेकर सख्त रुख अपनाया है. गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा है कि सरकार प्रदर्शन को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगी. दूसरी तरफ PTI का कहना है कि उसका आंदोलन राजनीतिक और शांतिपूर्ण है.

MPO और सामान्य गिरफ्तारी में क्या फर्क है?

यह इस पूरे मामले को समझने की सबसे अहम कड़ी है. सामान्य आपराधिक मामले में पुलिस किसी कथित अपराध की जांच करती है, और मामला अदालत तक जाता है.जबकि MPO का फोकस भविष्य में संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने पर है.

  • सामान्य गिरफ्तारी: कथित अपराध के मामले में कार्रवाई.
  • MPO के तहत हिरासत: संभावित सार्वजनिक अव्यवस्था को रोकने के लिए एहतियाती हिरासत.

इसी वजह से MPO का इस्तेमाल हमेशा संवेदनशील माना जाता है, खासकर तब जब हिरासत राजनीतिक प्रदर्शन या विरोध से पहले की जाए.

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क्या है विवाद की असली वजह?

इस मामले में एक तरफ प्रशासन का कहना है कि PTI से जुड़ी गतिविधियों से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है. दूसरी तरफ PTI कहना है कि ये कार्रवाई राजनीतिक दमन है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी तीनों बहनों और अन्य पीटीआई कार्यकर्ताओं की हिरासत पर गंभीर मानवाधिकार चिंता जताई है.

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By गौतम कुमार

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