यमन के हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं. सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में 13 नागरिक घायल हुए हैं. वहीं खमीस मुशैत, आभा और ताइफ में हुए हमलों के बाद कई इलाकों में इमरजेंसी अलर्ट जारी की गई. यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है.
हूतियों का दावा,सैन्य ठिकाने को बनाया निशाना
- हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के खमीस मुशैत इलाके में एक सैन्य एयरबेस को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे.
- रॉयटर्स ने सऊदी अधिकारियों के हवाले से बताया कि हमलों में 13 नागरिक घायल हुए हैं. वहीं सऊदी अधिकारियों ने बताया कि सात घरों और दो वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है.
- सऊदी सिविल डिफेंस ने खमीस मुशैत और आभा समेत दक्षिणी इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी. बाद में अधिकारियों ने बताया कि कुछ इलाकों में खतरा टल गया है और आपात चेतावनी हटा दी गई.
पहले भी हो चुके हैं बड़े हमले
- यह पहली बार नहीं है जब हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब को निशाना बनाया है. इससे पहले भी आभा, खमीस मुशैत, जजान और नजरान में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई थीं. एक पिछले हमले में 73 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट आई थी. यानी हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है.
- सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है. दूसरी तरफ हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और हाल के दिनों में उसने लाल सागर के तट पर अपनी पकड़ और मजबूत की है.
यमन के मोचा और मयून पर हूतियों का कब्जा
- हूतियों ने हाल में यमन के रणनीतिक मोचा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया. इसके बाद मयून द्वीप पर भी उनका नियंत्रण बताया गया है.
- यह इलाका बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है. दुनिया के लिए यह समुद्री रास्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से लाल सागर के रास्ते तेल और दूसरे सामान की आवाजाही होती है.
- यमन की सरकारी सेना और सऊदी अरब की तरफ से हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई हमले भी किए जा रहे हैं. यमन में 2022 के बाद अपेक्षाकृत शांत रहा संघर्ष अब दोबारा बड़े युद्ध में बदलने की आशंका बढ़ा रहा है.
अमेरिका ने सीधे युद्ध में उतरने से बनाई दूरी
- सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मदद मांगी है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे अमेरिकी हमले की मंजूरी नहीं दी है.
- अमेरिका की तरफ से खुफिया और लक्ष्य संबंधी सहायता दिए जाने की बात सामने आई है. ट्रंप ने यह भी कहा है कि हूतियों ने अमेरिका से इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं होने की अपील की है.
- इसी बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जेद्दा में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात की. दोनों के बीच क्षेत्रीय हालात और बढ़ते तनाव पर चर्चा हुई.
- फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि यमन का संघर्ष अगर और फैलता है, तो इसका असर लाल सागर की जहाजरानी, सऊदी तेल निर्यात और दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है.
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