US-Iran Conflict : ईरान- अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे दो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला हुआ. इस हमले में भारत के 148 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस घटना के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने डिप्टी चीफ ऑफ मिशन (डीसीएम) मोहम्मद जवाद होसैनी समेत ईरान के राजनयिकों को तलब किया. इससे पहले भी एक भारतीय नाविक लापता हो चुका है, जिससे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
भारत के 11 जहाजों को सुरक्षित निकासी हो रहा विचार
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत के 11 जहाजों को भी सुरक्षित निकासी की सूची में रखा गया है. अब तक लगभग 3,918 नाविकों को विभिन्न शिपिंग कंपनियों की मदद से सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि भारतीय नौसेना और केंद्र सरकार इस हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
होर्मुज बना दुनिया का तनाव क्षेत्र
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षित दक्षिणी समुद्री मार्ग का समर्थन कर रहे हैं, जबकि ईरान उत्तरी मार्ग को ही वैध बता रहा है. लगातार हो रहे हमलों के कारण कई जहाज अब अपने ट्रांसपोंडर बंद कर गुप्त तरीके से इस रास्ते को पार कर रहे हैं.
युद्धविराम टूटा, बढ़ सकता है वैश्विक संकट
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम सीजफायर अब लगभग खत्म होता नजर आ रहा है. ईरान ने दोबारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे हर हाल में खुला रखने का दावा किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार और भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल उन 148 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी है, जो अब भी संघर्ष क्षेत्र के बेहद करीब मौजूद हैं.
