Melting glacier in Switzerland :यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है. इसका सबसे ज्यादा असर स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर दिखाई दे रहा है, लगातार बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो इस साल “ग्लेशियर लॉस डे” रिकॉर्ड समय से पहले आ सकता है. इसका मतलब है कि पूरे साल बनने वाली बर्फ से ज्यादा बर्फ पहले ही पिघल जाएगी.
कम बर्फबारी और सहारा की धूल बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल सर्दियों में सामान्य से कम बर्फबारी हुई. इससे ग्लेशियरों को नई बर्फ नहीं मिल सकी. वहीं, सहारा रेगिस्तान से आई धूल ग्लेशियरों पर जम गई है. इससे उनकी सफेद सतह गहरी हो गई, जो ज्यादा धूप और गर्मी सोख रही है. यही कारण है कि बर्फ पहले से कहीं तेजी से पिघल रही है.
हर सेकंड बह रहा भारी मात्रा में पानी
स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क (GLAMOS) के वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लेशियरों से हर सेकंड करीब 400 घन मीटर पानी बह रहा है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि हर छह सेकंड में एक ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल भर सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जून में इतनी तेज़ बर्फ पिघलने की घटना पहले कभी दर्ज नहीं की गई.
पूरे यूरोप में गर्मी का असर
स्विट्जरलैंड के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और स्पेन समेत कई यूरोपीय देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. भीषण गर्मी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है. कई जगह स्कूल बंद कर दिए गए हैं, सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द किए गए हैं और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है.
वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन से जलवायु परिवर्तन तेज हो रहा है. इसी वजह से ऐसी भीषण गर्मी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. आगर वैश्विक तापमान पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्विट्जरलैंड समेत दुनिया के कई ग्लेशियर तेजी से खत्म हो सकते हैं.
