चुनाव से पहले पीओके में सियासी बवाल, पाकिस्तान आर्मी पर आरोप; गिलगित में ‘लश्कर सरकार’ बनवाना चाहती है

Gilgit Baltistan Election 2026 Pakistan: गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव से पहले पाकिस्तान सेना और उसके प्रमुख असीम मुनीर पर आरोप लगने लगे हैं. पीटीआई ने चुनावी प्रक्रिया में दखल और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े राजनीतिक चेहरों को बढ़ावा देने के आरोप लगाया है. इसके साथ ही विपक्ष ने चुनाव में धांधली और राजनीतिक दबाव का मुद्दा उठाया है.

Gilgit Baltistan Election 2026 Pakistan: गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले चुनाव से पहले पाकिस्तान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी दलों और स्थानीय संगठनों ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और पाक आर्मी पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं. आरोप है कि विपक्षी नेताओं की गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन दिया जा रहा है, जिनका संबंध लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े राजनीतिक नेटवर्क से बताया जाता है.

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान आर्मी ने पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) से जुड़े उम्मीदवारों को समर्थन दिया है. इस राजनीतिक दल को कई विश्लेषक लश्कर-ए-तैयबा संस्थापक हाफिज सईद से जुड़े राजनीतिक मंच के रूप में देखते हैं.

गिलगित-बाल्टिस्तान की आबादी में शिया समुदाय की बड़ी हिस्सेदारी है. ऐसे में स्थानीय राजनीतिक समूहों का कहना है कि इस तरह के उम्मीदवारों को आगे लाने से क्षेत्र में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है.

विपक्ष का आरोप- प्रचार करने से रोका गया

विपक्षी दलों, खासकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और तहरीक तहफ्फुज-ए-आइन पाकिस्तान (टीटीएपी) गठबंधन से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नेताओं को इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया और उन्हें स्कार्दू जाकर चुनावी सभाओं को संबोधित करने की अनुमति नहीं दी गई. स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया, कुछ को क्षेत्र से बाहर भेजा गया, जबकि कई लोगों पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाए गए.

‘पहले से तय नतीजों’ का आरोप

विपक्षी खेमे का कहना है कि चुनाव से पहले जो कदम उठाए जा रहे हैं, उनका मकसद मनचाहे राजनीतिक परिणाम सुनिश्चित करना है. आलोचकों का आरोप है कि आर्मी इस क्षेत्र में अपने अनुकूल नेतृत्व तैयार करने की कोशिश कर रहा है.

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने इसकी तुलना पूर्व सैन्य शासक जनरल जिया-उल-हक के दौर की नीतियों से भी की है. उनका कहना है कि शिया बहुल क्षेत्र में सुन्नी इस्लामवादी संगठनों को बढ़ावा देकर इस्लामाबाद अपना प्रभाव मजबूत करना चाहता है और राजनीतिक अधिकारों की मांगों को कमजोर करना चाहता है.

मतदाता सूची और बैलेट पेपर पर भी सवाल

विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया है. आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूचियों में गड़बड़ी की गई है और नकली बैलेट पेपर तक प्रसारित किए जा रहे हैं. कुछ नेताओं ने यह आशंका भी जताई है कि 2024 के आम चुनावों की तरह यहां भी ‘फॉर्म-47 मॉडल’ की दोहराया जा सकता है. पाकिस्तान में विपक्ष पहले भी आरोप लगा चुका है कि मतगणना के दौरान नतीजों में हेरफेर की गई थी.

6,000 पंजाब पुलिसकर्मियों की तैनाती पर विवाद

चुनाव से पहले पंजाब सरकार द्वारा 6,000 पुलिसकर्मियों को गिलगित-बाल्टिस्तान भेजने का फैसला भी विवाद का कारण बन गया है. विपक्ष का यह भी आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर अतिरिक्त बल की तैनाती चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इन जवानों को चुनावी सुरक्षा व्यवस्था के लिए भेजा जा रहा है और उन्हें दंगा-रोधी उपकरणों से लैस किया जाएगा.

‘डीप स्टेट रणनीति’ का हिस्सा बताई जा रही कार्रवाई

रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया सूत्रों का दावा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में हो रही गतिविधियां पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत राजनीतिक प्रबंधन और प्रभावशाली समूहों के सहारे क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखा जाता है. सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर चरमपंथी संगठनों से जुड़े राजनीतिक चेहरों की भूमिका बढ़ती है, तो इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है और गिलगित-बाल्टिस्तान की सामाजिक एवं वैचारिक संरचना पर असर पड़ सकता है.

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विरोध प्रदर्शन के बाद सत्ता परिवर्तन का खेल

पाकिस्तान के कब्जे वाले इस भारतीय इलाके में पिछले दिनों काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे. पहले अपनी मांगो को लेकर जनता सड़क पर उतरी थी. इसमें कई लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भी काफी हिंसक प्रदर्शन हुए थे. पाकिस्तान के ऊपर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वह इस क्षेत्र में डेमोग्राफिक चेंज लाने की कोशिश कर रहा है. 

हालांकि, पाकिस्तान सरकार और सेना लगातार इन आरोपों को नकारती रही है. उनका कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कराए जाते हैं तथा किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाता.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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