वह केवल समस्या पैदा करती है… उसे एंगर मैनेजमेंट की समस्या है, डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रेटा थनबर्ग पर निकाला गुस्सा

Donald Trump criticized Greta Thunberg: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि वह ट्रबलमेकर है, उसे एंगर मैनेजमेंट की समस्या है. उसे डॉक्टर से मिलना चाहिए.

Donald Trump criticized Greta Thunberg: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बेबाक भाषणों और टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं. वे दुनिया भर में युद्ध रुकवाने का दावा करते हैं, इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए खुद को नोबेल पुरस्कार देने की भी मांग उठा दी. हाल ही में उन्होंने दावा कर दिया कि ओसामा बिन लादेन के बारे में लोगों को आगाह किया था, लेकिन सुरक्षा बलों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने यह भी कह दिया कि कोई तुम्हारे काम का क्रेडिट नहीं देता, तो तुम खुद ही ले लो. अब डोनाल्ड ट्रंप ने क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की आलोचना की, कहा उसे गुस्सा नियंत्रित करने की जरूरत है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि थनबर्ग को एंगर मैनेजमेंट (गुस्सा नियंत्रित करने की) समस्या है और उन्हें डॉक्टर से मिलना चाहिए. ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब इजरायल ने थनबर्ग को ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला टू गाजा में भाग लेने के दौरान हिरासत में लेकर देश से निर्वासित कर दिया. ट्रंप ने थनबर्ग को मुसीबत खड़ी करने वाली ट्रबलमेकर बताया और यह कहकर हैरानी जताई कि इतनी कम उम्र में कोई व्यक्ति इतना गुस्से में कैसे रह सकता है.

उन्होंने कहा, “वह (ग्रेटा थनबर्ग) बस एक ट्रबलमेकर है… अब उसका पर्यावरण से कोई लेना-देना नहीं है. वह सिर्फ मुसीबत खड़ी करती है. उसे एंगर मैनेजमेंट की समस्या है. मेरा मानना है कि उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए… क्या आपने उसे देखा है? वह इतनी युवा है, लेकिन हमेशा गुस्से में और पागलपन से भरी रहती है… वह सिर्फ एक ट्रबलमेकर है.”

ग्रेटा थनबर्ग. फोटो- सोशल मीडिया.

ग्रेटा थनबर्ग को इजरायल ने किया निर्वासित

स्वीडिश कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को इजरायल द्वारा निर्वासित किए जाने के बाद वह 160 अन्य कार्यकर्ताओं के साथ ग्रीस पहुंची हैं. ये सभी कार्यकर्ता ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला का हिस्सा थे. इजरायल के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि उसने कुल 171 कार्यकर्ताओं को निष्कासित (डिपोर्ट) किया है. इन कार्यकर्ताओं के जहाजों को पिछले हफ्ते गाजा के लिए जा रहे काफिले को रोकते समय पकड़ा गया था. 

हमास से जुड़ा मिला सबूत तो इजरायली नौसेना ने रोका फ्लोटिला काफिला

शुक्रवार को इजरायली बलों ने 40 से अधिक नौकाओं वाले इस काफिले को रोका था, जो गाजा की नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था. इजरायल का कहना है कि काफिले में कोई मानवीय सहायता सामग्री नहीं थी, और इसमें शामिल लोग टकराव पैदा करने के उद्देश्य से आए थे, न कि राहत पहुंचाने के लिए. इजरायल के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, गाजा से प्राप्त जानकारी में हमास के प्रत्यक्ष संगठनात्मक और वित्तीय सहयोग के सबूत मिले हैं, जो इस संगठन से घनिष्ठ रूप से जुड़े फ्लोटिला नेटवर्क को नाकेबंदी तोड़ने के लिए समर्थन दे रहे थे.

गाजा नाकेबंदी और पुराना विवाद 

इजरायल और मिस्र ने 2007 में हमास के गाजा पर कब्जा करने के बाद से वहां हथियारों की तस्करी रोकने के लिए नाकेबंदी लागू कर रखी है. इसके बाद से कई बार फलस्तीनी कार्यकर्ता फ्लोटिला अभियानों के जरिए इस नाकेबंदी को चुनौती देते रहे हैं. 2011 में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच ने 2010 मावी मर्मारा घटना में इजरायली बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की आलोचना की थी, लेकिन नाकेबंदी को कानूनी माना था.

हमास हमले और मौजूदा स्थिति

7 अक्टूबर को हमास द्वारा गाजा सीमा के पास इज़रायली इलाकों पर किए गए हमलों में करीब 1,200 लोग मारे गए और 252 इजरायली व विदेशी नागरिकों को बंधक बनाया गया. वर्तमान में 48 बंधकों में से लगभग 20 के जीवित होने की संभावना जताई गई है.

गाजा में शांति पर ट्रंप का बयान

इस युद्ध और मानवीय त्रासदी को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने भी पूरा जोर लगा दिया है. उन्होंने 20 सूत्रीय प्लान पेश किया है, जिस पर इजरायल और हमास दोनों ही तैयार हो गए थे. हालांकि कुछ मुद्दों पर बात न बनने के कारण यह अब तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है. 

गाजा युद्ध समाप्त करने पर बातचीत शुरू

हमास, इजरायल और अमेरिका के प्रतिनिधि सोमवार को मिस्र में मिलेंगे ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना पर अप्रत्यक्ष वार्ता शुरू की जा सके. यह बातचीत मिस्र के रेड सी रिसॉर्ट शहर शरम-अल-शेख में होगी, और यह हमास के इजरायल पर हमलों की दूसरी बरसी की पूर्व संध्या पर आयोजित की जा रही है. चर्चाओं से उम्मीद जताई जा रही है कि लाखों जानें लेने वाले इस लंबे युद्ध का अब कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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