India High Commissioner Bangladesh: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिए अहम माने जा रहे दौर में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार सुबह बांग्लादेश पहुंच गए. उन्होंने हवाई जहाज की बजाय सड़क का रास्ता चुना. वह कार से ही बांग्लादेश बॉर्डर तक पहुंचे और आगे भी उसी से गए. बेनापोल भूमि बंदरगाह के रास्ते उनकी एंट्री के साथ ही ढाका में उनके राजनयिक कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत हो गई. वह मौजूदा उच्चायुक्त प्रणय वर्मा की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे.
बांग्लादेश पहुंचने पर बेनापोल सीमा चौकी पर भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे ने दिनेश त्रिवेदी का स्वागत किया. विदेश मंत्रालय ने 27 अप्रैल को उन्हें ढाका में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त करने की घोषणा की थी. इसके बाद 5 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें औपचारिक रूप से प्रत्यय पत्र (लेटर्स ऑफ क्रेडेंस) सौंपे थे, जिसके बाद उनके कार्यभार संभालने की प्रक्रिया पूरी हुई.
बिगड़े रिश्तों को सुधारने पर फोकस
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार गिरने के बाद से काफी खटास आई. विशेषकर मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में इसे बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की गई. हालांकि, तारिक रहमान की वापसी के बाद इसे सुधारने की पहल की गई. लेकिन सीमा विवाद और घुसपैठ जैसे मुद्दे अब भी दोनों देशों के बीच हॉट टॉपिक बना हुआ है. दिनेश त्रिवेदी का करियर राजनीति रहा है. वह पूर्व सांसद रह चुके हैं, साथ ही बांग्ला भाषा में उनकी पकड़ भी इस नियुक्ति में अहम रही.
अहम समय में मिली नई जिम्मेदारी
फरवरी 2026 में तारिक रहमान के आने के बाद से, भारत और बांग्लादेश व्यापार, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन और रणनीतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. ऐसे में दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
ढाका रवाना होने से पहले पहुंचे नेताजी भवन
बांग्लादेश जाने से एक दिन पहले गुरुवार को दिनेश त्रिवेदी कोलकाता स्थित नेताजी भवन पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर आशा जताई और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते साझा सपनों, लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं.
एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है. उन्होंने कहा, ‘मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मेरा बचपन इसी इलाके में बीता. यहां से करीब 400 गज की दूरी पर मेरा घर है. हम नेताजी की भावनाओं और उनके मूल्यों के बीच बड़े हुए हैं. मेरे लिए नेताजी भवन आना किसी सम्मान से कम नहीं है.’
‘भारत और बांग्लादेश सिर्फ सीमाओं से नहीं जुड़े’
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बोलते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता सिर्फ भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ सीमाओं से जुड़े हुए देश नहीं हैं. हम बांग्लादेश के लोगों और उनके सपनों से भी जुड़े हैं. हमारा एक साझा सपना है और वह है लोकतंत्र का सपना. मैं सिर्फ भारत के 140 करोड़ लोगों की बात नहीं करता, बल्कि बांग्लादेश के 20 करोड़ लोगों को भी इसमें शामिल करता हूं. जो भी 160 करोड़ लोगों के हित में होगा, मुझे विश्वास है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भारत और बांग्लादेश के लोग मुझे आशीर्वाद देंगे ताकि हम अपने साझा लक्ष्यों को हासिल कर सकें.’
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कार्यभार संभालने से पहले सुरक्षा मुद्दों पर भी हुई चर्चा
दिनेश त्रिवेदी ने अपने नए कार्यकाल की तैयारी के तहत पिछले महीने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से भी मुलाकात की थी. इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समन्वित करना था. भारतीय सेना के अनुसार, बातचीत में भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने, सीमा सुरक्षा को बेहतर करने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
रिश्तों को नई दिशा देने की उम्मीद
पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुभवी सांसद के तौर पर दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक अनुभव काफी व्यापक माना जाता है. ऐसे में ढाका में उनकी नियुक्ति को केवल एक राजनयिक तैनाती नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई गति देने की रणनीतिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भूमिका काफी अहम रहेगी.
