Deep Sea Life: समुद्र की सतह से नीचे उतरते ही दुनिया तेजी से बदलने लगती है. करीब 200 मीटर की गहराई के बाद रोशनी कम होने लगती है और 1,000 मीटर के नीचे सूरज की रोशनी लगभग पूरी तरह गायब हो जाती है. इसके बावजूद समुद्र की इन गहराइयों में मछलियां, झींगे, जेलीफिश और कई अनोखे जीव अपना जीवन जीते हैं.
अमेरिका की The National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) के मुताबिक आम तौर पर समुद्र में 200 मीटर से ज्यादा गहराई को डीप ओशन यानी गहरा समुद्र माना जाता है. 200 मीटर के बाद रोशनी तेजी से कम होने लगती है. 1,000 मीटर से नीचे की गहराई में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती और वहां प्रकाश संश्लेषण भी नहीं हो सकता. यानी वहां पेड़-पौधों की तरह सूरज की रोशनी से भोजन बनाने की सामान्य प्रक्रिया काम नहीं करती.
वहां कितना ठंडा होता है पानी?
गहरे समुद्र में सिर्फ अंधेरा ही नहीं होता, बल्कि तापमान भी बहुत कम रहता है. NOAA के अनुसार करीब 200 मीटर से नीचे समुद्री पानी का औसत तापमान लगभग 4 डिग्री सेल्सियस होता है. इसलिए वहां रहने वाले जीवों को अंधेरे और कम भोजन के साथ बेहद ठंडे वातावरण में भी खुद को ढालना पड़ता है.
गहराई बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है दबाव
समुद्र की गहराई में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पानी का दबाव है. हर करीब 10 मीटर नीचे जाने पर दबाव लगभग एक वायुमंडल बढ़ जाता है. उदाहरण के लिए करीब 2,000 मीटर की गहराई पर दबाव लगभग 200 वायुमंडल तक पहुंच सकता है. इंसान या ऐसे जीव जिनके शरीर में हवा से भरी जगह होती है, वहां सामान्य तरीके से जीवित नहीं रह सकते.
फिर समुद्री जीव इतना दबाव कैसे सह लेते हैं?
कई गहरे समुद्री जीवों के शरीर में इंसानों जैसे हवा से भरे फेफड़े या दूसरी बड़ी गैस वाली जगह नहीं होती. उनके शरीर का बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है. पानी आसानी से दबता नहीं है, इसलिए ऐसे जीव बहुत ज्यादा दबाव को इंसानों की तुलना में बेहतर तरीके से सह लेते हैं. कुछ समुद्री प्रजातियां रोज करीब 1,000 मीटर तक ऊपर-नीचे भी जाती हैं.
अंधेरे में खुद रोशनी बनाते हैं जीव
समुद्र की गहराई की सबसे हैरान करने वाली चीजों में बायोल्यूमिनेसेंस शामिल है. इसमें जीव अपने शरीर के अंदर होने वाली रासायनिक क्रिया से खुद रोशनी पैदा करते हैं. NOAA के मुताबिक 200 से 1,000 मीटर की गहराई के बीच रहने वाले करीब 80 प्रतिशत जानवर बायोल्यूमिनेसेंट हैं. इनमें मछलियां, स्क्विड, जेलीफिश और दूसरे समुद्री जीव शामिल हैं.
रोशनी बनाकर क्या करते हैं जीव?
गहरे समुद्र में अपनी रोशनी बनाना केवल खूबसूरत दिखने के लिए नहीं है. NOAA के अनुसार अलग-अलग जीव इसका इस्तेमाल शिकार खोजने, शिकार को अपनी ओर आकर्षित करने, शिकारी से बचने और आपस में संकेत देने के लिए कर सकते हैं. समुद्र में ज्यादातर बायोल्यूमिनेसेंट रोशनी नीले रंग की दिखाई देती है, क्योंकि नीली रोशनी पानी में ज्यादा दूर तक जा सकती है.
| विषय | क्या होता है? | आसान जानकारी |
| डीप ओशन की शुरुआत | 200 मीटर के बाद | NOAA के मुताबिक आम तौर पर 200 मीटर से ज्यादा गहराई वाले हिस्से को डीप ओशन कहा जाता है |
| सूरज की रोशनी | गहराई के साथ तेजी से कम | करीब 1,000 मीटर के नीचे सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती |
| प्रकाश संश्लेषण | 1,000 मीटर के नीचे नहीं | सूरज की रोशनी न होने से सामान्य प्रकाश संश्लेषण संभव नहीं होता |
| तापमान | करीब 4°C | 200 मीटर से नीचे समुद्री पानी का औसत तापमान लगभग 4 डिग्री सेल्सियस रहता है |
| पानी का दबाव | हर 10 मीटर पर लगभग 1 वायुमंडल बढ़ता है | करीब 2,000 मीटर की गहराई पर दबाव लगभग 200 वायुमंडल तक पहुंच सकता है |
| जीव दबाव कैसे सहते हैं? | शरीर में बड़ी हवा वाली जगहें कम | कई गहरे समुद्री जीवों के शरीर में हवा से भरी बड़ी जगहें नहीं होतीं और शरीर का बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है |
| ऊपर-नीचे जाने वाले जीव | रोज लंबी दूरी तय करते हैं | कुछ समुद्री प्रजातियां करीब 1,000 मीटर तक ऊपर-नीचे जाती हैं |
| बायोल्यूमिनेसेंस | जीव खुद रोशनी बनाते हैं | रासायनिक क्रिया से शरीर में रोशनी पैदा होती है |
| कितने जीव चमकते हैं? | करीब 80% | NOAA के पुराने आकलन के मुताबिक 200 से 1,000 मीटर की गहराई के बीच रहने वाले करीब 80% जानवर बायोल्यूमिनेसेंट हैं |
| कौन-कौन से जीव? | मछलियां, स्क्विड, जेलीफिश आदि | ये जीव रोशनी का इस्तेमाल शिकार, बचाव और संकेत देने जैसे कामों में करते हैं |
बिना सूरज की रोशनी के भी फलता-फूलता है जीवन
समुद्र की गहराई में कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां सूरज की रोशनी बिल्कुल नहीं पहुंचती, फिर भी वहां बड़ी संख्या में जीव मौजूद हैं. ऐसी जगहों में हाइड्रोथर्मल वेंट शामिल हैं. ये समुद्र तल में ऐसी दरारें होती हैं जहां समुद्री पानी जमीन के नीचे जाकर गर्म मैग्मा के पास गर्म होता है और फिर खनिजों के साथ बाहर निकलता है.
यहां भोजन सूरज से नहीं, रसायनों से बनता है
हाइड्रोथर्मल वेंट के आसपास जीवन का आधार प्रकाश संश्लेषण नहीं बल्कि केमोसिंथेसिस है. यहां कुछ बैक्टीरिया रासायनिक ऊर्जा का इस्तेमाल करके भोजन बनाते हैं. यही बैक्टीरिया आगे कई दूसरे जीवों की भोजन श्रृंखला का आधार बनते हैं. NOAA के मुताबिक इन जगहों पर ऐसे जीवों के समुदाय पाए जाते हैं जो पृथ्वी पर दूसरी जगहों के जीवों से काफी अलग हो सकते हैं.
वैज्ञानिकों ने 1977 में देखी थी ऐसी दुनिया
NOAA के मुताबिक वैज्ञानिकों ने पहली बार 1977 में समुद्र की गहराई में हाइड्रोथर्मल वेंट के आसपास फलता-फूलता जीव समुदाय देखा था. यह खोज बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे पता चला कि जीवन को हर जगह सीधे सूरज की रोशनी पर निर्भर होना जरूरी नहीं है. बाद में दुनिया के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में ऐसे और समुदाय पाए गए.
समुद्र की गहराई में अब भी छिपे हैं कई रहस्य
गहरा समुद्र पृथ्वी के सबसे कम समझे गए जीवित वातावरणों में शामिल है. यहां सी-माउंट, गहरे समुद्री कैन्यन, कोरल, स्पंज, हाइड्रोथर्मल वेंट और कोल्ड सीप जैसे कई अलग-अलग ठिकाने मौजूद हैं. NOAA का कहना है कि हर नई समुद्री खोज के साथ वैज्ञानिक ऐसे जीवों और परिस्थितियों को समझ रहे हैं, जो अंधेरे, ठंड, कम भोजन और बहुत ज्यादा दबाव के बावजूद जीवन को संभव बनाते हैं.
