कैरोल मानहानि मामला: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप की अर्जी खारिज, यौन शोषण के आरोप में देना पड़ा था हर्जाना

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अर्जी को खारिज कर दिया. जिसमें ट्रंप ने लेखिका ई-जीन कैरोल से जुड़े मामले में जूरी के फैसले को रद्द करने की मांग की थी.

जूरी ने ट्रंप को न्यूयॉर्क के एक डिपार्टमेंट स्टोर में कैरोल का यौन शोषण करने और बाद में उन्हें बदनाम करने के लिए जिम्मेदार ठहराया था. जूरी ने ट्रंप को कैरोल को 50 लाख अमेरिकी डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया था.

ट्रंप के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी

ट्रंप के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से जून में लिए गए उस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी, जिसमें अदालत ने इस मामले में ट्रंप की अपील सुनने से इनकार कर दिया था. हालांकि, ऐसी अर्जियों पर दोबारा सुनवाई के लिए सहमति देना सुप्रीम कोर्ट में बेहद असामान्य माना जाता है. ट्रंप ने जून में अपील खारिज होने के बाद अदालत के आदेश के तहत हर्जाने की रकम भी चुका दी थी.

8.3 करोड़ डॉलर के दूसरे मामले में भी अपील

ट्रंप और अमेरिकी न्याय विभाग कैरोल से जुड़े एक दूसरे मामले में आए फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं. इस मामले में कैरोल के पक्ष में 8.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हर्जाना तय किया गया था.

ट्रंप की क्या है दलील?

ट्रंप की दलील है कि 2019 में राष्ट्रपति रहते हुए कैरोल के बारे में की गई उनकी टिप्पणियों के लिए उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील पर अभी सुनवाई करने का फैसला नहीं किया है.

कैरोल ने ट्रंप पर क्या आरोप लगाए थे?

ई-जीन कैरोल ने 2023 में सुनवाई के दौरान गवाही दी थी कि 1990 के दशक में मैनहट्टन स्थित एक लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर ‘बर्गडॉर्फ गुडमैन’ के ड्रेसिंग रूम में ट्रंप ने उनका यौन शोषण किया था. जूरी ने बाद में माना कि ट्रंप ने 2022 में कैरोल के आरोपों को झूठा बताकर उनकी बदनामी की थी. इसी आधार पर उन्हें हर्जाना देने का आदेश दिया गया. ट्रंप ने कैरोल द्वारा लगाए गए आरोपों से लगातार इनकार किया है. कैरोल ने खुद सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपने आरोपों के बारे में बात की है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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