ब्रिटिश राजपरिवार के बारे में और चौंकाने वाली बातें सामने आएंगी, पूर्व प्रिंस एंड्रयू पर किताब लिखने वाले लेखक का दावा

British Royal Family: पूर्व राजकुमार एंड्रयू पर किताब के लेखक ने दावा किया है कि ब्रिटिश शाही परिवार में और भी चौंकाने वाली बातें सामने आएंगी. हाल ही में पूर्व प्रिंस एंड्रयू को उनके यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन से संबंधों के चलते ब्रिटिश शाही परिवार के द्वारा दिए गए सभी पद छीन लिए गए, साथ ही उन्हें शाही महल भी खाली करने का आदेश भी दिया गया.

British Royal Family: हाल ही में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III ने अपने भाई और पूर्व प्रिंस एंड्रयू को उनके शाही खिताब को छीन लिया, साथ ही उन्हें रॉयल लॉज आवास (महल) से बाहर कर दिया. उनका नाम यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के साथ जुड़ा था और रॉयल हाउस से लगातार इस बारे में सवाल किए जा रहे थे. ब्रिटेन के पूर्व युवराज एंड्रयू और उनकी पूर्व पत्नी सारा फर्ग्यूसन पर किताब लिखने वाले लेखक एंड्रयू लॉनी ने दावा किया है कि “अभी और भी बहुत कुछ सामने आने वाला है”, जो राजपरिवार के लिए और अधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है. कई वर्षों तक इस जोड़े पर शोध करने और करीब 300 लोगों से बातचीत करने के बाद लॉनी ने ‘एंटाइटल्ड’ शीर्षक से अनधिकृत जीवनी लिखी है. यह पुस्तक उस समय प्रकाशित हुई, जब एंड्रयू की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई थी. 

इतिहासकार, पत्रकार और साहित्यिक एजेंट लॉनी लंबे समय से ब्रिटिश राजपरिवार के विवादों पर लिखते रहे हैं. उनका पिछला काम ड्यूक ऑफ विंडसर पर आधारित था, जिन्होंने 1936 में अमेरिकी तलाकशुदा महिला वॉलेस सिम्पसन से विवाह करने के लिए सिंहासन छोड़ दिया था. पुस्तक में लॉनी ने लिखा है कि यह कहानी “बचपन के आघात, विश्वासघात, लालच, भ्रष्टाचार, अतिशय खर्च, अहंकार और सत्ता के दुरुपयोग” की दास्तान है.

एप्सटीन से संबंधों ने डुबोया करियर

लॉनी के अनुसार, एंड्रयू और सारा फर्ग्यूसन दोनों का ही स्वभाव लापरवाही भरा और विवादास्पद रहा है. यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन से एंड्रयू के करीबी संबंधों ने उनके राजकीय करियर को बर्बाद कर दिया. लॉनी ने लिखा है कि “रैंडी एंडी” के नाम स��� मशहूर एंड्रयू, एप्सटीन के बेहद करीब थे और दोनों कई बार एक ही महिलाओं के साथ देखे गए. बीबीसी के न्यूजनाइट कार्यक्रम में 2019 में एंड्रयू के विवादास्पद साक्षात्कार के बाद उन्हें अपने राजकीय दायित्वों को छोड़ना पड़ा था. उस इंटरव्यू में उन्होंने वर्जीनिया ज्यूफ्रे के आरोपों से इंकार किया था, जिन्होंने दावा किया था कि एंड्रयू ने उनके साथ तीन बार संबंध बनाए. हाल में ज्यूफ्रे की आत्महत्या और उनकी आत्मकथा ‘नोबडी’ज गर्ल’ के प्रकाशन के बाद, राजमहल ने एंड्रयू के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया.

संदिग्ध सौदे और अपार धन

लॉनी ने एंड्रयू के वर्षों से चले आ रहे संदिग्ध वित्तीय सौदों का भी खुलासा किया है. अपने नौसैनिक करियर के बाद एंड्रयू ब्रिटिश व्यापार के राजदूत के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन उन्होंने इस पद का उपयोग निजी लाभ के लिए किया. उन्होंने कथित रूप से लीबिया, कजाखस्तान और अजरबैजान जैसे देशों के तानाशाहों से व्यक्तिगत व्यावसायिक सौदे किए. खबरों के अनुसार, उन्होंने कई बार सरकारी संसाधनों – जैसे निजी उड़ानों के लिए हेलीकॉप्टर का दुरुपयोग किया.

सारा फर्ग्यूसन का फिजूलखर्ची भरा जीवन

लॉनी लिखते हैं कि सारा फर्ग्यूसन की खर्च करने की आदतें हैरान कर देने वाली हैं. वे अमीर दोस्तों के खर्चे पर छुट्टियों पर जाती थीं और अमेरिकी टेलीविजन पर भाषणों और साक्षात्कारों के लिए भारी रकम लेती थीं. उनकी कमाई और खर्च दोनों ही कर्दाशियन परिवार (अमेरिकी फैशन इंडस्ट्री का बड़ा नाम) की तरह चकित करने वाले बताए गए हैं. लॉनी के अनुसार, सारा ने कई चैरिटी अभियानों में हिस्सा लिया, लेकिन उनमें से कुछ से उन्हें व्यक्तिगत आर्थिक लाभ भी हुआ.

राजपरिवार की तुलना ट्रंप परिवार से

लेखक ने माउंटबैटन-विंडसर परिवार की तुलना ट्रंप परिवार से की है. उन्होंने लिखा कि एंड्रयू और सारा का पहला घर सन्निंगहिल ट्रंप शैली का भव्य निर्माण था, जिसमें विशाल संगमरमर हॉल और सजी हुई ट्रॉफियों जैसे शाही प्रदर्शन थे. डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “इस परिवार के साथ जो हुआ, उस पर मुझे बहुत दुख है.”

राजशाही के भविष्य पर सवाल

लॉनी ने अपनी पुस्तक के अंत में लिखा है कि एंड्रयू से जुड़े विवाद ब्रिटिश राजशाही के लिए गंभीर नुकसानदेह रहे हैं. हालांकि, उनका मानना है कि महाराजा चार्ल्स के हालिया कठोर फैसलों ने फिलहाल तो राजशाही को बचा लिया है. उन्होंने कहा कि चार्ल्स ने खुद को अपेक्षा से अधिक सक्षम संवैधानिक सम्राट साबित किया है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या एंड्रयू का सैंड्रिंघम निर्वासन उन्हें और विवादों से बचा पाएगा या नहीं. लॉनी का निष्कर्ष है- “राजशाही शायद इसलिए बनी रहेगी, क्योंकि ब्रिटेन की जनता को अपने राजनीतिक नेताओं पर, अपने बदनाम शाही परिवार से भी कम भरोसा है.”

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