पाकिस्तान के लिए आयी एक और बुरी खबर, अमेरिकी संसद में पेश हुआ इस अहम दर्जे को समाप्त करने वाला विधेयक

प्रमुख गैर नाटो सहयोगी का दर्जा प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान को अमेरिका से प्रतिवर्ष प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है. इस प्रमाण पत्र के लिए उसे कई शर्तों का भी पालन करना पड़ता है.

पाकिस्तान के लिए आज एक और बुरी खबर सामने आयी है, अमेरिका के एक सांसद ने वहां की प्रतिनिधि सभा में एक विधेयक पेश कर पाकिस्तान को प्राप्त एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा समाप्त करने की मांग की है. कल ही पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था, जिससे पाकिस्तान की छवि को धक्का पहुंचा था.

मान्यता के लिए प्रतिवर्ष लेनी पड़ती है अमेरिकी राष्ट्रपति से अनुमति

पाकिस्तानी पर यह आरोप है कि उसने हक्कानी ग्रुप को अपने क्षेत्रों के इस्तेमाल की अनुमति दी है. हक्कानी ग्रुप को अमेरिका आईएसआईएस का हिस्सा मानता है. प्रमुख गैर नाटो सहयोगी का दर्जा प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान को अमेरिका से प्रतिवर्ष प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है. इस प्रमाण पत्र के लिए उसे कई शर्तों का भी पालन करना पड़ता है. इस प्रमाणपत्र पर अमेरिकी राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होता है लेकिन उससे पहले इस प्रमाणपत्र को प्रतिनिधि सभा और सीनेट से पारित कराना होता है. यही वजह है कि पाकिस्तान की मान्यता को समाप्त करने के लिए प्रतिनिधि सभा में सांसद एंडी बिग्स ने विधेयक पेश किया है.


हक्कानी नेटवर्क की मदद पर अंकुश लगाने की है तैयारी

सांसद द्वारा प्रस्तुत विधेयक में इस बात की मांग की गयी है कि पाकिस्तान इस बात का प्रमाण दें कि उसने हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाया और उनके सदस्यों की गिरफ्तारी कर उनपर मुकदमा चलाया. साथ ही पाकिस्तान से यह भरोसा भी मांगा गया है कि वह अपने क्षेत्र को किसी भी आतंकवादी क्षेत्र को इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा.

गंभीरआर्थिक संकट झेल रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान पिछले कुछ समय से गंभीर आर्थिक संकट झेल रहा है. वहां के कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हैं, जो वहां की स्थिति को बखूबी बयां कर रहे हैं. कल ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने एक इंटरव्यू के दौरान यह कहा है कि वे पाकिस्तान से गरीबी को समाप्त करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत से तीन युद्ध करके पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ कर रहा है. वे अब अपने देशवासियों को खुशहाल करना चाहते हैं और इसके लिए वे उन्हें हर सुविधा उपलब्ध करना चाहते हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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