UNGA President Khalilur Rahman: संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के लिए बांग्लादेश के वरिष्ठ राजनयिक और विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान को अध्यक्ष चुना गया है. उनका कार्यकाल 2026-27 तक के लिए होगा. न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुए मतदान में उन्होंने साइप्रस के उम्मीदवार राजदूत एंड्रियास एस. काकौरिस को करीबी मुकाबले में हराया. 193 सदस्य देशों वाली महासभा में रहमान को 99 वोट मिले, जबकि काकौरिस के पक्ष में 91 देशों ने मतदान किया. तीन सदस्य देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
अध्यक्ष पद के लिए जीत हासिल करने के लिए 96 वोटों की जरूरत थी और रहमान ने यह आंकड़ा पार करते हुए जीत दर्ज की. मतदान मंगलवार सुबह स्थानीय समयानुसार 10 बजे महासभा हॉल में संपन्न हुआ. संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 8 सितंबर से शुरू होगा. इसके बाद उच्चस्तरीय सामान्य बहस (हाई-लेवल जनरल डिबेट) का पहला दिन 22 सितंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे.
चार दशक बाद फिर बांग्लादेश के हाथ में यूएनजीए की अध्यक्षता
बांग्लादेश को यह प्रतिष्ठित जिम्मेदारी लगभग 40 साल बाद मिली है. इससे पहले 1986-87 में तत्कालीन विदेश मंत्री हुमायूं रशीद चौधरी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 41वें सत्र के अध्यक्ष बने थे. अब खलीलुर रहमान के चयन के साथ बांग्लादेश एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के इस महत्वपूर्ण मंच की अगुवाई करेगा.
एनालेना बेरबॉक की जगह लेंगे रहमान
खलीलुर रहमान वर्तमान अध्यक्ष जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक का स्थान लेंगे, जिनका एक साल का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष का चुनाव हर वर्ष सदस्य देशों द्वारा किया जाता है और प्रत्येक देश को एक वोट का अधिकार होता है. संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता क्षेत्रीय समूहों के बीच रोटेशन प्रणाली के आधार पर तय होती है. इस बार यह अवसर एशिया-प्रशांत समूह को मिला था.
रहमान सितंबर 2026 में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे और अगले एक वर्ष तक महासभा की कार्यवाही का संचालन करेंगे. उनकी जिम्मेदारियों में पूर्ण सत्रों की अध्यक्षता, सदस्य देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देना और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा एवं वार्ताओं को सुगम बनाना शामिल होगा. खलीलुर रहमान के निर्वाचन के बाद भारत समेत कई देशों और संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेताओं ने उन्हें बधाई देते हुए सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दी हैं.
एस जयशंकर ने जताई साथ मिलकर काम करने की उम्मीद
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर खलीलुर रहमान को बधाई संदेश दिया. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र का अध्यक्ष चुने जाने पर वे खलीलुर रहमान को शुभकामनाएं देते हैं. जयशंकर ने अपने संदेश में कहा कि वे साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए उनके साथ निकटता से काम करने की उम्मीद रखते हैं.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने भी दी शुभकामनाएं
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने भी खलीलुर रहमान के चुनाव पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बहुपक्षवाद का समर्थन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा. हरीश ने अपने संदेश में रहमान के सफल कार्यकाल की कामना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में महासभा का 81वां सत्र महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेगा.
अन्नालेना बेयरबॉक ने बताया चुनौतीपूर्ण समय
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक ने भी खलीलुर रहमान को बधाई दी. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब संयुक्त राष्ट्र कई तरह की चुनौतियों और दबावों का सामना कर रहा है, महासभा अध्यक्ष की भूमिका केवल औपचारिक या प्रक्रियागत नहीं रह गई है. बेयरबॉक ने विश्वास जताया कि रहमान 193 सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त राष्ट्र और उसके चार्टर की रक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे. उन्होंने उनके सफल नेतृत्व की कामना भी की.
एंटोनियो गुटेरेस बोले- अनुभव का मिलेगा बड़ा लाभ
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी खलीलुर रहमान को बधाई देते हुए कहा कि संगठन को उनके व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक अनुभव का बड़ा लाभ मिलेगा. गुटेरेस ने अपने संदेश में महासभा के 80वें सत्र की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक के योगदान की भी सराहना की.
उन्होंने कहा कि बेयरबॉक ने अपने कार्यकाल के दौरान उत्कृष्ट नेतृत्व, दूरदर्शिता और बहुपक्षीय समाधान के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई. खलीलुर रहमान को वर्तमान वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक चुनौतियों और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के एजेंडों को निपटाना होगा. ऐसे में उनके नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की खास नजर रहेगी.
बांग्लादेश की राजनीति से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर
रहमान का उदय ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश हाल के वर्षों में बड़े राजनीतिक बदलावों से गुजरा है. 2024 के छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी. इसी पृष्ठभूमि में हुए चुनावों के बाद नई सरकार बनी और रहमान को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे पहले वे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राजदूत के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.
जीत के बाद रहमान ने गिनाईं संयुक्त राष्ट्र के सामने खड़ी चुनौतियां
अध्यक्ष चुने जाने के बाद खलीलुर रहमान ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध और संघर्ष लगातार मानवीय क्षति बढ़ा रहे हैं, जबकि विकास संबंधी उपलब्धियां भी अस्थिर होती जा रही हैं. उन्होंने कई देशों में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की.
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए संसाधन और अवसर दोनों ही सीमित होते जा रहे हैं. रहमान ने संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति को भी गंभीर चिंता का विषय बताया. उनके अनुसार संगठन पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और इस चुनौती से निपटने के लिए सभी सदस्य देशों के सहयोग की आवश्यकता होगी.
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अहम मंच है UNGA
संयुक्त राष्ट्र महासभा केवल बहस का मंच नहीं है, बल्कि वैश्विक नीति निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. संगठन के बजट से जुड़े फैसलों से लेकर अंतरराष्ट्रीय संधियों को अपनाने तक कई अहम निर्णय इसी मंच पर लिए जाते हैं. गरीबी, भ्रष्टाचार, विकास, मानवाधिकार और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महासभा नियमित रूप से चर्चा करती है और प्रस्ताव पारित करती है, जो भले ही कानूनी रूप से बाध्यकारी न हों, लेकिन दुनिया की सामूहिक राय का प्रतिनिधित्व करते हैं.
भले ही महासभा अध्यक्ष का पद मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक और औपचारिक माना जाता है, लेकिन इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा काफी अधिक है. यही वह मंच है जहां दुनिया के छोटे-बड़े सभी देश अपनी बात रखते हैं और हर वर्ष सितंबर में विश्व नेताओं का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन आयोजित होता है.
