एंथ्रोपिक के रिसर्चर ने नौकरी छोड़ी, चेतावनी दी-AI इस दशक के अंत तक हमारी जान पर खतरा बन जाएगा !

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की पहुंच वर्तमान दौर में इंसान के जीवन के हर क्षेत्र में हो चुकी है. एआई हमारे लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह इसपर भी खूब चर्चा पूरे विश्व में हो रही है. इसी क्रम में एंथ्रोपिक कंपनी के एक रिसर्चर का दावा वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि इस दशक के अंत तक एआई इंसानी जान के लिए खतरा बन जाएगा.

एंथ्रोपिक (Anthropic) अमेरिका की प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अनुसंधान और सुरक्षा कंपनी है, जिसके एक रिसर्चर ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया है कि AI लैब्स ऐसे सिस्टम बना रहे हैं जो इंसानी जान के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.

एंथ्रोपिक की नौकरी छोड़ी

एंथ्रोपिक के एक रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने बुधवार सुबह अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि वह एंथ्रोपिक छोड़ रहे हैं. इससे पहले उन्होंने OpenAI छोड़ा था . उनका यह मानना है कि ये AI कंपनियां सुपरइंटेलिजेंस को बेहतर बनाने की जल्दबाजी में जान से खेल रही हैं. जैकब कॉक्सन ने अपने पोस्ट में कहा है कि मैंने आज एंथ्रोपिक से इस्तीफा दे दिया. मैंने पिछले तीन साल OpenAI और एंथ्रोपिक दोनों में प्रीट्रेनिंग रिसर्च में बिताया. कोई भी कंपनी जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही है. ये कंपनियां इंसानी जिंदगी के साथ जुआ खेल रही हैं.


एआई हम सबको मार सकता है

जैकब कॉक्सन ने AI के बारे में यह कहा है कि यह हमारी जान ले सकता है. जैकब ने कहा है कि जो लोग एआई सिस्टम की ताकत को कम आंक रहे हैं वे गलती कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये जल्द ही सुपरह्यूमन सिस्टम बन जाएंगी और किसी भी चीज को हैक कर पाएंगे. रातों-रात किसी भी फील्ड में क्रांति ला पाएंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि ये सुपरइंटेलिजेंट AI सिस्टम कुछ ही सालों में इंसानियत को खत्म कर सकते हैं और इन्हें बनाने वाले लोग इस बात को जानते हैं. 27 साल के पूर्व एंथ्रोपिक रिसर्चर ने चेतावनी दी कि AI बनाने वाले लोग पक्का मानते हैं कि यह दशक के आखिर तक हम सबको मार सकता है.

कई सीनियर रिसर्चर्स भी इस सच को जानते हैं और डरे हुए हैं

सीनियर रिसर्चर्स भी इस खतरे से वाकिफ जैकब कॉक्सन ने यह दावा किया कि है कई सीनियर AI रिसर्चर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इंसानियत के खत्म होने को लेकर परेशान हैं.उन्होंने लिखा कि यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. कोई भी दूसरी इंसानी एक्टिविटी इस लेवल का खतरा पैदा नहीं करती है, जितना की एआई. जैकब ने यह भी दावा किया है कि एंथ्रोपिक भी इस बारे में अच्छे से जानती है, लेकिन वह खुद को बेहतर AI सिस्टम बनाने वाली पहली कंपनी बनना चाहती है, इसलिए वह सभी चीजों को दरकिनार कर रही है.

ये भी पढ़ें : मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली के घर पर ED रेड

WhatsApp ने इन Android फोन पर बंद किया काम, आज से नहीं चलेगा ऐप; ऐसे चेक करें अपना फोन

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >