मिडिल ईस्ट में फंसा ईरान, तो पुतिन ने चली नई चाल, यूरोप को गैस सप्लाई रोकने का दिया संकेत, भारत का फायदा?

Vladimir Putin Hints Europe Gas Halt: ईरान युद्ध में फंसा, तो उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को चोक कर दिया. तेल और गैस का दाम बढ़ा, तो रूस ने भी अपना दांव खेल दिया है. रूसी राष्ट्र्पति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि हमारे लिए यूरोपीय बाजार में गैस की आपूर्ति अभी रोक देना ज्यादा लाभदायक हो.

Vladimir Putin Hints Europe Gas Halt: मिडिल ईस्ट में जारी संकट ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण यूरोप में गैस की कीमतें 50% से अधिक बढ़ गई हैं. इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप को मुसीबत में डालने वाला बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि मॉस्को यूरोपीय बाजारों को गैस की आपूर्ति पूरी तरह रोकने पर भी विचार कर सकता है.

रूस की स्टेट टीवी के क्रेमलिन संवाददाता पावेल जरुबिन को दिए इंटरव्यू में पुतिन ने कहा, ‘अब दूसरे बाजार खुल रहे हैं. संभव है कि हमारे लिए यूरोपीय बाजार में गैस की आपूर्ति अभी रोक देना ज्यादा लाभदायक हो. हम उन नए बाजारों में जा सकते हैं जो खुल रहे हैं और वहां अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं.’ हालांकि पुतिन ने स्पष्ट किया कि इस बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और यह केवल एक विचार है. उन्होंने कहा, ‘यह कोई निर्णय नहीं है, बल्कि सिर्फ एक संभावना पर खुलकर सोचने जैसा है. मैं सरकार को निर्देश दूंगा कि वह हमारी कंपनियों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम करे.’

पुतिन की यह टिप्पणी उस समय आई जब यूरोपियन यूनियन की ओर से यह संकेत दिया गया था कि वह 2027 के अंत तक रूसी पाइपलाइन गैस आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने विचार कर रहा है. साथ ही वह अप्रैल 2026 से रूसी एलएनजी के नए शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर रोक लगाने की योजना पर भी काम कर रहा है. हालांकि, ईरान पर किए गए हमले के बाद और फिर जवाबी कार्रवाई ने यूरोप को भी संकट में डाल दिया है. इस टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) प्रभावित हुआ है.

यूरोप में गैस कीमतों का संकट क्यों?

Strait of Hormuz संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के 20% से अधिक तेल और गैस (LNG) गुजरती है. क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों में कई तेल और गैस संयंत्र एहतियातन बंद किए गए हैं. युद्ध के चलते कतर के एलएनजी उत्पादन संयंत्र बंद हो गए हैं, जबकि सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी भी बंद कर दी गई है. कतर ने 2025 की तीसरी तिमाही में यूरोपीय संघ को करीब 6% LNG सप्लाई किया था.

यूरोप के प्रमुख गैस बेंचमार्क Dutch TTF gas hub पर फ्रंट-मंथ कॉन्ट्रैक्ट की कीमत सोमवार को 50% से ज्यादा बढ़कर 48.66 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा पहुंच गई. इस उछाल ने यूरोपीय सरकारों की चिंता बढ़ा दी है, जो अभी भी 2021-22 के रूसी गैस संकट के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में यूरोप को गैस आपूर्ति रोकने संबंधी पुतिन की टिप्पणी को यूरोपीय खरीदारों पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. 

हालांकि, पिछले साल रूसी गैस का यूरोप को निर्यात लगभग 40% से घटकर सिर्फ 6% रह गया है. यूरोप ने रूस से मिलने वाली गैस की कमी को काफी हद तक अन्य स्रोतों से पूरा किया है. यूरोपीय संघ अब नॉर्वे (30%) और अमेरिका (50%) से गैस खरीद कर रहा है. वहीं उत्तरी अफ्रीका और अजरबैजान से भी गैस आपूर्ति बढ़ाई गई है. फिर भी यूरोप अब भी रूसी LNG का एक महत्वपूर्ण खरीदार बना हुआ है. फ्रांस, स्पेन और बेल्जियम रूसी गैस के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं.

यूरोप ने रूसी गैस को रोकने की बनाई है योजना

स्थिति का आकलन करने के लिए यूरोपीय संघ के गैस आपूर्ति समन्वय समूह ने बुधवार को बैठक की. साथ ही तेल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए ईयू के ऑयल कोऑर्डिनेशन ग्रुप की भी बैठक बुलाई गई. ईयू ने कहा कि फिलहाल तेल आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन सदस्य देशों से सुरक्षा स्थिति का आकलन साझा करने को कहा गया है. यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 में एक बाध्यकारी नियम अपनाया है, जिसके तहत 2027 के अंत तक रूस से सभी गैस आयात, चाहे पाइपलाइन से हों या LNG पूरी तरह समाप्त करने की योजना बनाई गई है.

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भारत को होगा फायदा?

पुतिन ने यह भी कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट की स्थिति में खरीदार गैस के लिए प्रीमियम कीमत देने को तैयार हैं. रूस ने संकेत दिया है कि वह मिडिल ईस्ट में आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अपने कच्चे तेल से भरे जहाजों को भारत की ओर मोड़ सकता है. भारत भी वैकल्पिक आपूर्ति विकल्प तलाश रहा है, क्योंकि देश के पास मौजूद कच्चे तेल का भंडार करीब 25 दिनों की मांग ही पूरी कर सकता है. 

भारत के लगभग 40% कच्चे तेल का आयात इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है, जिससे क्षेत्र में किसी भी व्यवधान से भारत पर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, रूस भारत की करीब 40% तक कच्चे तेल की जरूरत पूरी करने में मदद करने को तैयार है. इसके अलावा रूस भारत को एलएनजी भी उपलब्ध कराने के लिए तैयार है, क्योंकि भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक कतर ने इस सप्ताह अपना उत्पादन रोक दिया है.

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यूरोप पर दबाव बनाने की रूसी रणनीति?

यूरोप की पाबंदियों वाले निर्णय के बाद रूस का अपनी गैस की आपूर्ति को रोकने का संकेत देना, इस बात का संकेत है कि अगर इस समय यूरोप के लिए गैस सप्लाई बंद कर दी जाती है, तो मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते यूरोपीय देशों के पास तुरंत कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं होगा. ऐसी स्थिति में वहां की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है और आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं.

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