'Lockdown खुलने पर पहले ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है Coronavirus'

भारतीय मूल के अमेरिकी फिजिशियनों के एक संगठन के अध्यक्ष ने आगाह किया है कि दुनिया भर में सरकारों को सुनियोजित ढंग से लॉकडाउन हटाना होगा और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को फिर से खोलना होगा, नहीं तो घातक कोरोना वायरस वापसी करेगा और इस बार नुकसान पहले से भी ज्यादा होगा.

न्यू यॉर्क : भारतीय मूल के अमेरिकी फिजिशियनों के एक संगठन के अध्यक्ष ने आगाह किया है कि दुनिया भर में सरकारों को सुनियोजित ढंग से लॉकडाउन हटाना होगा और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को फिर से खोलना होगा, नहीं तो घातक कोरोना वायरस वापसी करेगा और इस बार नुकसान पहले से भी ज्यादा होगा. ‘अमेरिकन फिजिशियन्स ऑफ इंडियन ऑरिजन (एएपीआई) के अध्यक्ष डॉ सुरेश रेड्डी ने वायरस के खिलाफ बहादुरी से जंग लड़ रहे भारतीय मूल के लाखों चिकित्साकर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका में हर सातवां डॉक्टर भारतीय है और वे अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों की तरह काम कर वायरस से जंग लड़ रहे हैं.

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रेड्डी ने समाचार एजेंसी भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा कि संपूर्ण चिकित्सा बिरादरी अब सेना बन गयी है और कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है. उन्होंने कहा कि वायरस के खिलाफ जंग लंबी है और कहा कि कोविड-19 कुछेक महीनों में खत्म नहीं होने वाला है और टीका या विषाणुरोधी दवा विकसित नहीं होने तक इसका प्रभाव एक से दो साल तक देखने को मिल सकता है. उन्होंने कहा कि केवल इसी तरीके से इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों एवं बंद के नियमों से लोगों का परेशान और बेचैन होना समझ में आता है, लेकिन लॉकडाउन हटाने का काम बहुत ध्यानपूर्वक और धीरे-धीरे करना होगा.

रेड्डी ने कहा कि यह बहुत धीमी प्रक्रिया होगी. मुझे नहीं लगता कि यह अचानक खोलने या बंद करने जैसा होगा. अगर हमने इसे ध्यानपूर्वक और सुनियोजित ढंग से नहीं किया, तो वायरस लौट आएगा और नुकसान बहुत ज्यादा होगा. रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 को हराने की जंग तीन तरीके से किया जाने वाला हमला होगा, जिसमें प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए सरकारों द्वारा कदमों का क्रियान्वयन, चिकित्सक एवं चिकित्सा समुदाय द्वारा जरूरी इलाज और सामान्य जन द्वारा दिखाया जाने वाला अनुशासन शामिल है.

उन्होंने कहा कि लोग ही हैं, जो बीमारी फैलाते या नियंत्रित करते हैं. यह उनके हाथों में है. जब तक वह नियमों का सख्ती से पालन करेंगे, तब तक मेरे विचार में बीमारी को रोका जा सकेगा, इस ‘राक्षस’ वायरस को खत्म किया जा सकेगा और हम बेहतरीन ढंग से दिवाली मना पाएंगे. रेड्डी ने कहा कि जब कभी प्रतिबंधों में छूट दी जाएगी, तब जीवन वैसा नहीं रहेगा जैसे इस वैश्विक महामारी से पहले था. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि चीजें कभी भी पूरी तरह सामान्य हो पाएंगी. हम अक्सर अपने हाथ धोते, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहने नजर आएंगे. इसलिए यह एक नया भविष्य होगा, यही सामान्य होगा.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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