पाक संसद ने सैन्य अदालतों के गठन के लिए संशोधन विधेयक पारित किए

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसद ने दुर्दांत आतंकवादियों के खिलाफ मुकदमे की त्वरित सुनवाई के लिए सैन्य अदालतों के गठन को लेकर आज दो अहम विधेयक पारित किए.तालिबान द्वारा पेशावर स्कूल नरसंहार को अंजाम दिए जाने की घटना के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है. नेशनल असेंबली ने देश में सैन्य अदालतों के गठन के लिए […]

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसद ने दुर्दांत आतंकवादियों के खिलाफ मुकदमे की त्वरित सुनवाई के लिए सैन्य अदालतों के गठन को लेकर आज दो अहम विधेयक पारित किए.तालिबान द्वारा पेशावर स्कूल नरसंहार को अंजाम दिए जाने की घटना के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है.

नेशनल असेंबली ने देश में सैन्य अदालतों के गठन के लिए दो संशोधन विधेयक निर्विरोध पारित किए. संसद के निचले सदन ने 21 वें संविधान संशोधन विधेयक और पाकिस्तान सेना (संशोधन) विधेयक 2015 को स्वीकृत किया.247 सदस्यों ने संशोधन के पक्ष में वोट दिया.यह संख्या दो तिहाई समर्थन से अधिक है.स्पीकर अयाज सादिक ने बताया कि संविधान संशोधन विधेयक निर्विरोध पारित हो गया.
उपरी सदन सीनेट ने इन विधेयकों को 78 वोटों के साथ पारित किया जबकि इसके विरोध में एक भी वोट नहीं पडा. सीनेट में 104 सदस्य हैं और इसने दो तिहाई से अधिक समर्थन से इसे पारित किया जो संविधान संशोधन के लिए जरुरी है.
दोनों ही विधेयक विधि मंत्री एवं न्यायमूर्ति सीनेटर परवेज राशिद ने पेश किए. सीनेट में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस संशोधन विधेयक को पारित किए जाने की जरुरत का जिक्र किया.
शरीफ ने कहा, ‘‘यह विधेयक पाकिस्तानियों की हत्या करने वाले दुर्दांत आतंकवादियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सैन्य अदालतों के गठन के बारे में है.. यह पाकिस्तान के लिए एक अहम दिन है जब राष्ट्र ने फैसला किया है कि आतंकवादियों को जड से उखाड फेंका जाएगा.’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए हम पिछले 60 साल की अशांति से निजात पा लेंगे जिसे बरसों पहले ,खत्म हो जाना चाहिए था.
सीनेट की मंजूरी के बाद अब विधेयक पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होना है जिसके बाद यह कानून बन जाएगा और सैन्य अदालतों के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा. ये अदालतें दो साल के लिए गठित होंगी और संवैधानिक समय सीमा खत्म होने पर ये निष्क्रिय हो जाएंगी.

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