वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास नाव पलटने से 15 भारतीय टूरिस्ट की मौत, बचाव कार्य जारी

वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास एक दर्दनाक घटना में 32 पर्यटकों को ले जा रही नाव पलट गई. इस दुर्घटना में 15 भारतीय टूरिस्ट की मौत होने की सूचना है. भारतीय दूतावास ने मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं.

वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास 32 भारतीय टूरिस्ट को ले जा रही एक नाव पलट गई है. वियतनाम में स्थित भारतीय दूतावास की ओर से यह जानकारी एक्स पर पोस्ट करके दी गई है. दूतावास के पोस्ट में कहा गया है कि एक दुखद घटना में, कुछ घंटे पहले वियतनाम में फु क्वोक आइलैंड के पास कई भारतीय टूरिस्ट को ले जा रही एक नाव पलट गई. घटना की सही जानकारी ली जा रही है और स्थानीय अधिकारियों द्वारा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.

भारतीय दूतावास ने यह जानकारी भी दी है कि वे स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं. न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार इस बोट पर 32 लोग सवार थे जिनमें से 15 की मौत हो गई है, जबकि अन्य को बचा लिया गया है. नाव पर टूरिस्ट के अलावा 4 क्रू मेंबर भी थे.


दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

भारतीय दूतावास की ओर से यह कहा गया है कि जानकारी और मदद देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी में भारत के कॉन्सुलेट जनरल और हनोई में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. दूतावास ने पहले कंट्रोल रूम तक पहुंचने के लिए ये नंबर दिए हैं: 84362817930, 84915523714 और 84334520414. हनोई में दूसरे कंट्रोल रूम से 84913089165 पर संपर्क किया जा सकता है.

भारतीय दूतावास ने 32 टूरिस्ट के नाम जारी किए


वियतनाम में भारतीय दूतावास ने उन 32 लोगों की जानकारी दी है, जो दुर्घटना के वक्त बोट पर सवार थे. दूतावास का कहना है कि बोट पर कुल 32 भारतीय टूरिस्ट सवार थे. हम हताहतों के बारे में और जानकारी पता लगा रहे हैं और जल्द ही अपडेट करेंगे.

टूरिस्ट की सूची-

बालासुब्रमणि पलानीसामी

सेल्वम पिचियाह

सेंथिल कुमार जयवेल

शिवकुमार मुथुकुमारसामी

निर्मल कुमार सेतुरमन

मुरुगा प्रभु अरुमुगम

रुबन सेल्वा नाथन जैकब येसुपाथम

श्रीधर धर्मराजन

विग्नेश्वर राधाकृष्णन गोपाल

रामासुब्बु अन्नावी

अबुथल्खा जाहिरुदीन

श्रीधर सुंदरराजन

वम्शीधर सेल्लूर रामराज

सेंजादैवेल कुप्पुसामी

नागालामडुगु सोहन

नल्लापेटा आदिशेशैया रवितेजा

शेख अब्दुल्लाह अब्दुल मजीद

राजीव कलैवानन

बालाजी नटेशन

विनया कुमार चिथापुरम भास्करा

रविशंकर सुगुमारन

विपुल उत्तम चंद

संतोष कुमार शांतीलालजैन

बाबू कुप्पुस्वामी

अलगुराजन शिवासामी

वसंथा कुमार आनंदन

श्रीधर मुदियम

जया लक्ष्मी गेल्ली

किशोर गेल्ली

एविकॉट चेरियन थॉमस

लोवेनी थॉमस

रमेश कुमार पचियप्पन



कैसे हुई दुर्घटना

अबतक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार जहां दुर्घटना हुई, वहां लहरें बहुत घुमावदार और तेज थीं. संभवत: लहरों की वजह से बोट पलट गई. हालांकि अभी पुष्ट तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है कि आखिर बोट कैसे पलटी. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हैं, जिनमें दुर्घटना के बारे में जानकारी दी जा रही है.



फु क्वोक आइलैंड क्यों प्रसिद्ध है?

फु क्वोक आइलैंड अपने सफेद रेत वाले बीच और नीले, साफ समुद्र के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. इसी वजह से यहां बहुत टूरिस्ट आते हैं. स्नॉर्कलिंग, स्कूबा डाइविंग, जेट स्की, कयाकिंग और पैरासेलिंग जैसी खेल गतिविधियों के लिए यह वियतनाम के सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है. यहां प्राकृतिक मोती की खेती होती है.


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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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