भाजपा की जासूसी विवाद:मोदी सरकार ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब

वाशिंगटन : अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) द्वारा भाजपा की जासूसी किए जाने की खबरों पर कडी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने आज यहां एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक को तलब किया और कहा कि किसी भारतीय संगठन या भारतीय व्यक्ति की निजता का उल्लंघन किया जाना ‘‘पूरी तरह अस्वीकार्य’’ है. भारत ने अमेरिका […]

वाशिंगटन : अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) द्वारा भाजपा की जासूसी किए जाने की खबरों पर कडी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने आज यहां एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक को तलब किया और कहा कि किसी भारतीय संगठन या भारतीय व्यक्ति की निजता का उल्लंघन किया जाना ‘‘पूरी तरह अस्वीकार्य’’ है.

भारत ने अमेरिका से यह भी आश्वासन मांगा कि इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी. अधिकारियों ने हालांकि, यह नहीं बताया कि विदेश मंत्रालय द्वारा तलब किया गया अमेरिकी राजनयिक कौन है. उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भारत में अमेरिका की अंतरिम राजदूत कैथलीन स्टीफेंस हैं जो पूर्व अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद आईं.

अमेरिका ने 2010 में अपनी खुफिया एजेंसी एनएसए (नेशनल सिक्यूरिटी एजेंसी) को भाजपा और भारत की जासूसी करने का अधिकार दिया था. यह चौंकानेवाला खुलासा एनएसए के पूर्व कॉन्ट्रैक्टर और अब व्हिसलब्लोअर बन चुके एडवर्ड स्नोडेन ने किया है. जाहिर है भारत और अमेरिका के बीच संबंधों के स्तर पर यह बड़ा खुलासा है. खास तौर से ऐसे समय में जब केंद्र की सत्ता पर भाजपा के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी की सरकार काबिज है.सूत्रों के मुताबिक भारत ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताने के लिए दिल्ली में अमेरिकी राजनयिकों को तलब किया है.

* 2010 में दी गयी आधिकारिक मंजूरी

अमेरिका में दूसरे देशों की छह राजनीतिक पार्टियों की लिस्ट बनायी गयी है. इन पार्टियों पर नजर रखने के लिए अमेरिका ने एनएसए को आधिकारिक अनुमति दी गयी. भाजपा भी इनमें से एक है. मंगलवार को स्नोडेन की ओर से सार्वजनिक की गयी जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के विवादास्पद फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विलांस एक्ट (एफआइएसएस) के तहत 2010 में एनएसए को जासूसी का अधिकार दिया गया.

अमेरिकी समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट के खुलासे से अमेरिका का भारत के प्रति सोंच का सच उजागर हुआ है. एक गोपनीय दस्तावेज से मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने अपनी शीर्ष खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) से 2010 में भाजपा एवं दुनिया के पांच अन्य राजनीतिक दलों की जासूसी करवाई थी. इन दलों में मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी शामिल है.

सूची में भाजपा के अलावा अन्य विदेशी राजनीतिक दलों में लेबनान की अमल, बोलिवेरियन कंटिनेंटल कोऑर्डिनेटर ऑफ वेनेजुएला, मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड, इजिप्शियन नेशनल साल्वेशन फ्रंट और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी शामिल हैं.

अमेरिकी समाचार पत्र द वॉशिंगटन पोस्ट ने सोमवार को इस संबंध में दस्तावेज को सार्वजनिक किया था. इस दस्तावेज में 193 विदेशी सरकारों के साथ विदेशी गुटों और अन्य निकायों के नाम शामिल हैं जो विदेशी खुफिया निगरानी अदालत की ओर से मंजूर 2010 के प्रमाणन का हिस्सा थे. इस सूची में भारत शामिल है.

समाचार पत्र ने बताया कि इन संगठनों पर एनएसए विदेशी खुफिया सूचना एकत्र करने के मकसद से नजर रख सकती है. एनएसए के पूर्व कांट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन से मिले दस्तावेज का हवाला देते हुए पत्र ने यह बात कही. समाचार पत्र ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अदालत से इस तरह से नजर रखने के संबंध में एक नये प्रमाणन के लिए एफआईएसए संशोधन अधिनियम की धारा 702 के तहत मंजूरी प्राप्त करनी होती है.

द वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के अनुसार, चार देशों को छोड़कर कोई भी विदेशी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के दायरे से बाहर नहीं है. ये चार देश ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं. नजर रखने के संबंध में प्रमाणन में विश्व बैंक, आईएमएफ, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं.

भारत और विशेष तौर पर भाजपा पर नजर रखने के बारे में एक सवाल के जवाब में एनएसए की प्रवक्ता वेनी वाइन्स ने कहा कि राष्ट्रपति, नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक और राष्ट्रीय खुफिया प्राथमिकता ढांचे के तहत विभागों एवं एजेंसियों की ओर से तय विशिष्ट खुफिया जरूरतों के आधार पर एजेंसी विदेशी खुफिया सूचना एकत्र करता है.

स्नोडेन ने मीडिया में हजारों गोपनीय दस्तावेज लीक किये थे, जिसमें कई एनएसए की ओर से संचालित थे. वाइन्स ने कहा कि एफआईएसए संशोधन अधिनियम की धारा 702 चुनिंदा खुफिया सूचना एकत्र करने को मंजूरी देता है. अमेरिका ने 2010 में अपनी खुफिया एजेंसी को बीजेपी की जासूसी करने का अधिकार दिया था.

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों के स्तर पर यह बड़ा खुलासा है. खास तौर से ऐसे समय में जब बीजेपी केंद्र की सत्ता पर काबिज है.

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