रफ्तार पर कामयाबी हासिल करने वाले शूमाकर को अब पूरी जिंदगी पड़ेगी सहारे की जरूरत!

जनेवाः माइकल शूमाकर कोमा से बाहर आ गये इस खबर से उनके प्रशंसक काफी खुश है. शूमाकर के चाहने वाले उनके सेहत में सुधार के लिए लगातार दुआएं मांग रहे थे. लेकिन उनके प्रशंसकों की आधी दुआं ही कबूल हो पायी. शूमाकर भले ही कोमा से बाहर आ गये हो लेकिन पूरी जिंदगी शूमाकर दूसरों […]

जनेवाः माइकल शूमाकर कोमा से बाहर आ गये इस खबर से उनके प्रशंसक काफी खुश है. शूमाकर के चाहने वाले उनके सेहत में सुधार के लिए लगातार दुआएं मांग रहे थे. लेकिन उनके प्रशंसकों की आधी दुआं ही कबूल हो पायी. शूमाकर भले ही कोमा से बाहर आ गये हो लेकिन पूरी जिंदगी शूमाकर दूसरों पर ही निर्भर रहेंगे. लगभग छह महीने तक कोमा में रहने के बाद अब वह पूरी जिंदगी निर्बल ही रहेंगे उन्हें हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ेगा

सात बार फार्मूला वन के विजेता माइकल शूमाकर पर आई रिपोर्ट के अनुसार सीनियर मेडिकल विशेषज्ञ एरिच रिएडेरेर ने कहा, ‘वह अपनी बाकी जिंदगी निर्बल ही रहेंगे.’ यानी जिस इंसान ने कार की स्पीड के कारण ही अपना अलग मुकाम हासिल किया उसका कार चलाना तो दूर वह अपने सहारे खड़े भी नहीं हो पायेगा. शूमाकर 16 जून को कोमा से जागे थे, लेकिन, मेडिकल जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि उनका कोमा से बाहर आना उतना सार्थक नहीं है जितना कि समझा जा रहा था.

न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ रिएडेरेर ने कहा किशूमाकर को स्थाई नुकसान हुआहै, अगर वह तीनमहीने में अपने सहारे बैठ सकें और छह महीने मेंव्हील चेयर खुद चला सकें तो यह बड़ी सफलता होगी. ऐसी हालत में कई लोग अपनी तेजी से अपने सेहत में सुधार नहीं ला पाते. हालांकि उन्होंने माना कि शूमाकर का कोमा से बाहर आना एक सकारात्मक बात है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि इतना लंबा वक्त कोमा में गुजारने के बाद होश में आए लोगों में से महज 10 फीसदी अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं को पूरी तरह वापस पा सके हैं. माइकल शूमाकर ने 2012 में संन्यास ले लिया था.

शूमाकर दिसंबर में स्की दुर्घटना में चोटिल हो गये थे जिसके बाद वह कोमा में चले गए थे. कार रेसिंग में इतिहास रचने वाले शूमाकर फ्रांस में 29 दिसंबर को स्कीइंग करते समय दुघर्टना का शिकार हो गए थे. उनका सिर एक पत्थर से टकरा गया था, जिसके बाद से वह कोमा में थे और फ्रांस के ही ग्रेनोबल शहर में एक अस्पताल में भर्ती थे. वहां उनके दो ऑपरेशन हुए जिनमें उनके दिमाग से खून के थक्के हटाए गए. शूमाकर ने 19 साल के फॉर्मूला-1 करियर को 2012 में अलविदा कहा था. उन्होंने बेनटन के साथ 1994 और 1995 में खिताब जीते थे. उन्होंने 1996 में फेरारी के साथ कार रेसिंग शुरू की और तब से 2000 तक लगातार पांच बार खिताब जीते.शूमाकर के प्रशंसक इस खबर से भी काफी निराश है और उनके पूरी तरह ठीक होने की दुआं कर रहे हैं. शूमाकर की पत्नी और उनके बच्चे भी उन्हें पूरी तरह सेहतमंद देखना चाहते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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